इतिहास के पन्नों में 15 मार्च

  • 15 मार्च 2012

इतिहास के पन्नों को पलट कर देखें तो पाएगें कि इसी दिन साल 2004 में फ़्रांस के सरकारी स्कूलों में हर तरह के धार्मिक चिन्हों पर प्रतिबंध लगा दिया गया था. इसी दिन मिखाईल गोर्बाचेव सोवियत संघ के पहले राष्ट्रपति बने थे. इसी रोज़ साल 1981 में पाकिस्तान के अगवा यात्री हवाई जहाज़ को लम्बे प्रयासों के बाद छुड़वाया गया था.

2004 : सरकारी स्कूलों में किसी भी तरह के धार्मिक चिन्ह को पहनने पर पाबंदी

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Image caption फ़्रांस के राष्ट्रपति जैक्स शिराक ने फ़्रांसिसी संसद द्वारा पारित उस कानून पर हस्ताक्षर किए थे

आज ही के दिन साल 2004 में फ़्रांस के राष्ट्रपति जैक्स शिराक ने फ़्रांसिसी संसद द्वारा पारित उस कानून पर हस्ताक्षर किए थे जिसके बाद देश भर में सरकारी स्कूलों में छात्रों या शिक्षकों के किसी भी तरह के धार्मिक चिन्ह पहनने पर पाबंदी लगा दी. यह कनून 2 सितम्बर 2004 से लागू हुआ था.

इस कानून के तहत स्कूलों में मुसलमान लड़कियों द्वारा सिर पर पहना जाने वाले हिजाब, सिख बच्चों की पगड़ी, ईसाई बच्चों के क्रॉस सब पर स्कूलों में प्रतिबंध लग गया.

यूं तो इस कानून में किसी एक खास धर्म की बात नहीं की गयी थी लेकिन इस कानून के आलोचकों ने कहा कि यह कानून मुसलमान लड़कियों को सबसे ज़्यादा प्रभावित करेगा क्योंकि इस्लाम में लड़कियों के लिए सिर पर हिजाब बाँधने की ज़रुरत बताई गयी है.

मार्च 1990 : गोर्बाचेव सोवियत संघ के पहले और अंतिम राष्ट्रपति बने

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Image caption मिखाईल गोर्बाचेव सोवियत संघ में राष्ट्रपति के पद को धारण करने वाले पहले और अतिम आदमी थे

सोवियत संघ में मार्च 15 1990 को सोवियत संघ में राष्ट्रपति के पद को सृजित किया गया था. मिखाईल गोर्बाचेव उस पद को धारण करने वाले पहले और अंतिम आदमी थे.

राष्ट्रपति बनने के पहले गोर्बाचेव सोवियत संघ के सबसे ताकतवर पद, यानि सोवियत संघ की कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव, के पद पर भी मार्च 1985 से काबिज थे.

साल 1991 तक गोर्बाचेव दोनों पदों पर आसीन थे लेकिन अपने खिलाफ तख्तापलट के एक असफल प्रयास के बाद इस्तीफा दे दिया था.

1981 : अगवा पाकिस्तानी जहाज रिहा

Image caption इस जहाज़ में सवार 147 लोगों को छुडाने के लिए पाकिस्तान सरकार को 54 लोगों को जेल से छोड़ना पडा था

इसी दिन साल 1981 में पाकिस्तान एयरवेस के अगवा जहाज को दो सप्ताह की कोशिशों के बाद सीरिया में छुड़ा लिया गया था. इस जहाज और इसमें सवार 147 लोगों को छुडाने के लिए पाकिस्तान सरकार को 54 लोगों को जेल से छोड़ना पडा था.

पाकिस्तान एयरवेस के इस बोईंग 720 जहाज़ को उस समय तीन बंदूकधारियों ने अगवा कर लिया था जब वह कराची से उड़ कर पेशावर जा रहा था. इस जहाज़ को पहले तो जबरन अफगानिस्तान ले जाया गया जहाँ जहाज़ पर सावर एक पाकिस्तानी कूटनयिक को मार डाला गया. ऐसा माना गया कि अफरंकर्ता पाकिस्तान में काबिज़ तानाशाह जनरल जिया उल हक़ को सत्ता से हटाना चाहते थे.

पाकिस्तान के तत्कालीन सरकार ने आरोप लगाया था कि पाकिस्तान पीपल्स पार्टी के मुर्तजा भुट्टो अफगानिस्तान में अफरंकर्ताओं से मिलने के लिए आए थे. मुर्तजा के पिता ज़ुल्फ़िकार अली भुट्टो को जिया उल हक़ के शासनकाल में फांसी पर चढ़ा दिया गया था.

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