श्रीलंका: गृहयुद्ध के बाद अपहरण का दौर

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Image caption श्रीलंका में हाल में अपहरण की घटनाओं पर विपक्ष कहना है कि ये सब सरकार की शह के बिना नहीं हो सकता

श्रीलंका में गृह युद्ध खत्म हुए तीन साल हो गए हैं और अब यहां खून-खराबे और गोलाबारी की घटनाओं से लोगों को आमतौर पर राहत मिली है. लेकिन यहां मानवाधिकार हनन के मामले आए दिन सामने आते रहते हैं और हाल ही में अपहरण तथा लोगों के लापता होने की घटनाएं बढ़ी हैं.

इस पृष्ठभूमि में अमरीका संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में एक प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रहा है जिसमें श्रीलंका से पूछा जाएगा कि वो लोगों को न्याय दिलाने और मेलजोल के लिए कैसे काम करेगा.

शिरोमनि की दास्तां

शिरोमनि एक ऐसी ही महिला हैं जिनके पति को उनकी आंखों के सामने घर से अगवा कर लिया गया. वे अब हिंदू देवी-देवताओं के आगे अपना सिर रगड़ रही हैं.

उन्हें अब ज्यादा सांत्वना भी नहीं दी जा सकती क्योंकि उनके पति को अगवा किए एक महीना हो गया है. शिरोमनि बताती हैं कि आठ लोग आए थे जो उनके पति रामासामी प्रबागरन को खींचकर अपने साथ गाड़ी में लेकर फरार हो गए.

वे कहती हैं, ''मेरे पति दरवाजे पर लटके थे और मदद के लिए चिल्ला रहे थे. सड़क पर और भी लोग थे और भी गाड़ियां थी लेकिन मदद के लिए कोई आगे नहीं आया. उन्होंने मुझे धक्का देकर नीचे गिरा दिया. उन्होंने प्रबा को गाड़ी के अंदर खींचा और गायब हो गए.''

और भी हैं ऐसे मामले

Image caption श्रीलंका की सेना पर भी आरोप लगते रहे हैं

प्रबा उन 32 लोगों में से एक हैं जो बीते साल अक्तूबर से इस साल फरवरी के दौरान अगवा किए गए और जिनके अपहरण की शिकायत कागजों में दर्ज है. ये मामले श्रीलंका में कानून का मजाक उड़ाते हैं.

प्रबा को पुलिस ने इस आरोप में गिरफ्तार किया था कि उनके तमिल टाइगर्स से संबंध हैं. प्रबा इससे इनकार करते रहे लेकिन पुलिस ने उन्हें दो साल से ज्यादा समय तक पकड़कर रखा और प्रताड़ित किया.

बीते साल सितम्बर में उन्हें बिना किसी आरोप के रिहा किया गया था. इससे पहले कि पुलिस प्रताड़ना के खिलाफ उनकी शिकायत अदालत की चौखट तक पहुंचती, उनका अपहरण हो गया.

ये अपनी तरह का अकेला मामला नहीं है. एक अन्य व्यक्ति को उस वक्त अदालत के बाहर से अगवा कर लिया गया था जब वो जेलकर्मियों के पहरे में जमानत की अर्जी के लिए जा रहे थे.

दो युवक बीते साल दिसम्बर में उत्तरी श्रीलंका से तब अगवा कर लिए गए जब वे अगवा किए गए लोगों के परिवारों को प्रदर्शन के लिए एकजुट कर रहे थे.

इस बारे में जब पुलिस प्रवक्ता अजिथ रोहाना से पूछा गया तो उन्होंने कहा, ''नहीं-नहीं, ऐसी कोई बात नहीं है. हम ऐसे किसी भी आरोप से एकदम इनकार करते हैं. हमारे पास ऐसा कोई दस्ता नहीं है जो लोगों को मारता है.''

लेकिन विपक्ष का कहना है कि ऐसी घटनाएं सरकार के वरदहस्त के बिना संभव नहीं हो सकतीं.

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