इतिहास के पन्नों में

  • 19 मार्च 2012

इतिहास में 19 मार्च की तारीख के नाम कई घटनाएं दर्ज हैं. इसी दिन अर्जेंटीना ने फॉकलैंड द्वीप पर अपना झंडा फहराया था और पूर्वी और पश्चिमी जर्मनी के नेताओं की मुलाकात हुई थी.

1982: अर्जेंटीना ने दक्षिणी जॉर्जिया में झंडा फहराया

Image caption 1833 से फॉकलैंड ब्रिटेन के अधिकार क्षेत्र में था

इतिहास में 19 मार्च को ही 1982 में अर्जेंटीना के कुछ लोग दक्षिण अटलांटिक में ब्रिटेन के उपनिवेश फॉकलैंड द्वीप पर उतरे थे और वहां अपने देश का झंडा फहरा दिया था.

खबर के मुताबिक अर्जेंटीना के करीब 50 सैनिक फॉकलैंड द्वीपसमूह से 1400 मील पूर्व में स्थित दक्षिणी जॉर्जिया के लीथ हार्बर पर पहुंचे थे.

फॉकलैंड द्वीपसमूह को ब्रिटेन ने 1833 में अपने अधिकार में ले लिया था और दक्षिणी जॉर्जिया इस विवादित द्वीप के अंतर्गत आता था.

माना जा रहा था कि फॉकलैंड पहुंचे इन लोगों को लीथ हार्बर से कचरा हटाने का व्यवसायिक करार मिला था लेकिन खबर ये भी थी कि ये लोग अर्जेंटीना सरकार के एक चार्टर जहाज पर वहां पहुंचे थे.

इन लोगों से कहा गया कि द्वीप पर काम करने के लिए वो ब्रिटीश सरकार से अनुमति हासिल करें.

इस घटना को ब्रिटेन और अर्जेंटीना के बीच चल रहे विवाद को और भड़काने के कदम के रूप में देखा गया था.

स्पेन का शासन खत्म होने के बाद से ही अर्जेंटीना फॉकलैंड द्वीपसमूह को अपना हिस्सा मानता था.

लेकिन ब्रिटेन का कहना था कि जब तक वहां रहनेवाले लोग और ब्रिटेन की संसद अनुमोदन नहीं करते तब तक फॉकलैंड को अर्जेंटीना को नहीं सौंपा जा सकता.

1970: पूर्वी जर्मनी में मिले विली और विली

Image caption विली ब्रांट पश्चिमी जर्मनी के चांसलर थे

इसी दिन 1970 में पूर्वी और पश्चिमी जर्मनी के नेता 1949 में जर्मनी के विभाजन के बाद पहली बार मिले थे.

करीब 2,000 जर्मन युवाओं ने पश्चिमी जर्मनी के चांसलर विली ब्रांट का पूर्वी जर्मनी के शहर इर्फुर्त में स्वागत किया था जहां देश के प्रधानमंत्री विली स्टाफ से उनकी मुलाकात होनी थी.

करीब 21 साल बाद हो रही इस मुलाकात का मकसद दोनों देशों के संबंधों में सुधार लाना था.

दोनों नेताओं की बातचीत के दौरान विली ब्रांट ने दोनों देशों को संयुक्त राष्ट्र में शामिल होने का सुझाव दिया था.

1961 में बर्लिन की दीवार खड़ी होने के बाद से दोनों देशों के संबंध और खराब हो गए थे और पूर्वी जर्मनी के लोगों के पश्चिमी जर्मनी में प्रवेश पर प्रतिबंध लगा था.

बहरहाल संबंधों की बेहतरी की कोशिश कर रहे दोनों देशों के नेता इस बात पर सहमत हो गए थे कि उसी साल 21 मई को वे दोबारा पश्चिमी जर्मनी के केसेल शहर में फिर मुलाकात करेंगे.

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