भारतीय रेलवे आगे, सेना पीछे

  • 20 मार्च 2012
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सुधारों को लेकर बड़े राजनीतिक विवाद का केंद्र बनी इंग्लैंड की राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा (एनएचएस) को चीन की सेना और भारतीय रेलवे के बाद दुनिया का सबसे बड़ा नियोक्ता माना जाता है. लेकिन क्या ये वाकई सच है?

चीन और भारत के मुकाबले ब्रिटेन के आकार को देखते हुए इस दावे पर भरोसा तो नहीं होता. जी हां, ये दावा सच है भी नहीं.

इंग्लैंड की राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा अपने कर्मचारियों की संख्या के हिसाब से दुनिया का पांचवी सबसे बड़ी नियोक्ता है. इसके कर्मचारियों की संख्या 17 लाख है.

वहीं 19 लाख कर्मचारियों के साथ मैकडोनल्ड चौथे और अमरीकी सुपर-मार्केट चेन वालमार्ट 21 लाख लोगों के साथ इस सूची में तीसरे स्थान पर है.

और दूसरे पायदान पर है चीन की सेना पीपुल्स लिबरेशन आर्मी जिसके सुरक्षा बलों की संख्या 23 लाख है.

कर्मचारियों की संख्या के लिहाज से अमरीका रक्षा विभाग दुनिया में अव्वल है जिसके तहत 32 लाख लोग काम करते हैं.

तुलना आसान नहीं

अमरीकी रक्षा विभाग चीन की सेना से बडा़ क्यों है, इस तरह की तुलना करना बड़ा मुश्किल है.

अमरीकी रक्षा विभाग का मुख्यालय वर्जिनिया स्थित पेंटागन इमारत में है जो असैन्य कर्मचारियों की शक्ल में अपने लोगों की संख्या और बढ़ाना चाहता है.

वैसे कहा ये भी जाता है कि जिन इमारतों में कार्यालय हैं, उनमें पेंटागन दुनिया की सबसे बड़ी इमारत है.

वहीं चीन के सेना में कितने सैनिक है, इसकी सटीक संख्या बताना लगभग नामुमकिन है.

और जो इसके 23 लाख कर्मचारी बताए जाते हैं, वो सिर्फ सैन्य कर्मचारी हैं यानी अमरीकी रक्षा विभाग की तरह इसमें असैन्य कर्मचारियों की संख्या शामिल नहीं है.

क्या है आधार

दुनियाभर की सेनाओं के बारे में सालाना आकलन मिलिट्री बैलेंस के मुताबिक, पीपुल्स लिबरेशन आर्मी दुनिया की सबसे बड़ी सक्रिय सेना है. ब्रिटेन स्थित अंतरराष्ट्रीय सामरिक अध्ययन संस्थान ने ये आकलन प्रकाशित किया है.

वैसे यदि आप अमरीकी रक्षा विभाग में सक्रिय सुरक्षा बलों की गिनती करें तो पाएंगे कि वहां केवल 16 लाख लोग हैं और इस लिहाज से ये महकमा हमारी सूची में फिसलकर सातवें स्थान पर आ जाएगा.

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Image caption एक अनुमान के मुताबिक भारतीय सशस्त्र बलों में सक्रिय सैनिकों की संख्या 13 लाख है

और यदि असैन्य कर्मचारियों की संख्या पता चल जाए तो ये भी मुमकिन है कि पीपुल्स लिबरेशन आर्मी, अमरीकी रक्षा विभाग के बराबर निकले. होने को ये भी सकता है कि चीन की सेना आगे निकल जाए.

लेकिन ये पता लगाना आसान नहीं है कि कौन कर्मचारी सैन्य और कौन असैन्य, क्योंकि चीन की सेना और अमरीकी रक्षा विभाग का संगठन और ढ़ांचा एकदम अलग है.

मिलिट्री बैलेंस के संपादक जेम्स हैकेट कहते हैं, ''सेनाओं के भीतर कई संगठन होते हैं जैसे सक्रिय सुरक्षाबल, आरक्षित बल, असैन्य बल. वो लोग भी शामिल होते हैं जो अनुबंध पर काम कर रहे होते हैं. इसलिए जब आप संख्या की बात करते हैं तो ये इस पर निर्भर करता है कि आप गिनती किसकी कर रहे हैं.''

उन्होंने बताया, ''हमने अपनी गिनती में उन कर्मचारियों को गिना है जो वर्दी में हैं, जो राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी सेना की जिम्मेदारियों को पूरा करने में सक्षम हैं.''

जेम्स हैकेट कहते हैं, ''पीपुल्स लिबरेशन ऑर्मी अन्य सेनाओं के मुकाबले बड़ी होने का एक कारण ये है कि ये एक जगह तैनात है जबकि पश्चिमी सेनाएं दुनियाभर में बिखरी हैं.''

देखन में छोटे लगें

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Image caption चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी दुनिया की सबसे बड़ी सेना है लेकिन उसके सैनिकों की एकदम सटीक संख्या पता लगाना मुश्किल है

इंग्लैंड की राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा तुलनात्मक रूप से छोटी भले ही नजर आती है लेकिन फिर भी बड़ी है. ये चीन के राष्ट्रीय पेट्रोलियम निगम से बड़ी है जिसके दुनिया के 49 देशों में 16 लाख कर्मचारी हैं.

ये चीन के स्टेट ग्रिड कॉर्पोरेशन से भी बड़ी है जो 15 लाख कर्मचारियों के साथ इस सूची में सातवें स्थान पर है.

हैरानी की बात तो ये है कि इंग्लैंड की राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा में भारतीय रेलवे से भी ज्यादा कर्मचारी हैं जिसके बारे में आमतौर पर कहा जाता है कि ये दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा नियोक्ता है जबकि ये आठवे स्थान पर आता है.

जेम्स हैकेट के मुताबिक, ''भारतीय रेलवे के कर्मचारियों की संख्या 14 लाख है, उसकी इस वर्ष एक लाख और कर्मचारियों की भर्ती करने की योजना है.''

फिर भी भारतीय रेलवे, भारतीय सशस्त्र बलों से आगे है जिनके सक्रिय बलों की संख्या 13 लाख है.

चीन के रेलवे को इस सूची में शीर्ष दस में जगह नहीं मिली है और इसकी वजह ये है कि वो अलग-अलग हिस्सों में बंटा हुआ है.

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