उत्तराखंड कांग्रेस: 'हम साथ-साथ हैं'

  • 26 मार्च 2012
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Image caption मुख्यमंत्री पद को लेकर हरीश रावत और विजय बहुगुणा के बीच तकरार की स्थिति बनी हुई थी.

हरीश रावत, विजय बहुगुणा और हरक सिंह रावत उत्तराखंड कांग्रेस के ये तीनों ध्रुव जब रविवार को एक साथ हंसते-खिलखिलाते गलबहियां डाले विधानसभा पंहुचे तो उन्होंने यह संदेश देना चाहा कि हम साथ-साथ हैं और हमारे बीच कोई गिला-शिकवा नहीं है.

और अगर इसे दूसरे शब्दों में कहें तो इसका मतलब ये भी होता है कि हमारे बीच समझौता पक्का हो चुका है.

कांग्रेस के बाकी बचे 11 विधायकों ने भी रविवार को शपथ ले ली जिनको लेकर तरह-तरह की आशंकाएं थीं. शपथ लेनेवालों में हरक सिंह रावत भी थे.

उत्तराखंड में छह मार्च को विधानसभा नतीजे आने के बाद से सरकार को लेकर चल रही उठापटक, बगावत की नौबत, कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान और बहुगुणा बनाम हरीश का झगड़ा फिलहाल के लिए थम गया लगता है.

हरीश रावत ने दिल्ली से देहरादून तक अपनी ताकत का अहसास करा दिया है और एक-एक कर उनकी सभी मांगे पूरी हो रही हैं. हरीश रावत और विजय बहुगुणा के बीच समझौते में जो छह बिंदु थे उनमें हरीश रावत की पसंद के व्यक्ति को राज्यसभा का उम्मीदवार बनाया जा चुका है और कैबिनेट में भी उनके चहेतों को पद हासिल हुआ है.

हम साथ-साथ हैं

विधानसभा के स्पीकर का मामला भी अब उनकी मर्जी से तय हो रहा है. ये सुनिश्चित कराने के लिए कि उनके साथ के सभी विधायक आकर शपथ ले लें इसके लिए वो खुद विधानसभा में मौजूद रहे.

हरीश रावत ने कहा कि, "पार्टी में कोई गतिरोध नहीं है और कांग्रेस की सरकार पूरे पांच साल चलेगी." समझा जा रहा है कि रावत के इस बयान का मतलब है कि विजय बहुगुणा की सरकार चल पड़ी है और बहुमत साबित करने में उन्हें कोई दिक्कत नहीं होगी.

लेकिन इसके बाद भी मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा की चुनौतियां खत्म नहीं हुई. उनके सामने इस समय दो बड़ी चुनौतियों हैं. पहला ये कि वो सांसद हैं और उन्हें छह महीने के भीतर ही विधानसभा के लिए चुनाव लड़ना होगा. ऐसा तभी होगा जब कोई विधायक उनके लिए अपना सीट खाली करता है, इसके बाद भी उनकी जीत की क्या संभावनाएं बनती हैं ये भी देखने वाली बात होगी.

जानकारों का कहना है कि जिस तरह से भारतीय जनता पार्टी में पूर्व मुख्यमंत्री भुवनचंद्र खंडूरी अपनी ही पार्टी के भितरघात के कारण हार गए हैं उससे सीख लेते हुए बहुगुणा को हर कदम फूंक-फूंक कर रखना होगा.

विधानसभा अध्यक्ष

दूसरी तरफ टिहरी की जिस संसदीय सीट को बहुगुणा खाली करते हैं वहां से भी कांग्रेस को दोबारा जीत दिलाने की जिम्मेदारी उनके कंधों पर होगी.

इस बीच स्पीकर पद पर कांग्रेस और बीजेपी के बीच मुकाबला भी तय हो गया है. सोमवार को होने वाले चुनाव में कांग्रेस की ओर से गोविंदसिंह कुंजवाल और बीजेपी की ओर से हरबंस कपूर ने स्पीकर के पद के लिए नामांकन किया है. हालांकि अब कांग्रेस मजबूत स्थिति में है.

हांलाकि बीजेपी के पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी ने कहा है कि, "कांग्रेस में जो लड़ाई है उसे देखते हुए हमने अपना प्रत्याशी उतार दिया है."

इसके बाद कांग्रेस और बीजेपी के बीच एक और लड़ाई राज्यसभा सीट को लेकर होगी जहां कांग्रेस के महेंद्र सिंह माहरा और बीजेपी से अनिल गोयल पर्चा दाखिल कर चुके हैं, जिसके लिए 30 मार्च को चुनाव होना है.

आनेवाले दिनों में मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा की सरकार किस तरह से चलती है वो इस बात पर निर्भर होगा कि उनके और हरीश रावत के बीच कैस तालमेल रहता है.

क्योंकि अभी तक तो दोनों नेता अपनी ऊर्जा का इस्तेमाल एक दूसरे को राजनैतिक रूप से मात देने में ही खर्च करते रहे हैं.

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