सीरिया पर चीन को मनाने की कोशिश क्यों?

  • 27 मार्च 2012
कोफी अन्नान और बशर अल असद इमेज कॉपीरइट AFP
Image caption कोफी अन्नान और बशर अल असद की बैठक से कोई समाधान नहीं निकल पाया

सीरिया के मामले पर संयुक्त राष्ट्र और अरब लीग के विशेष दूत कोफ़ी अन्नान चीन को अपनी शांति योजना पर रज़ामंद करने की कोशिश के तहत बीजिंग पहुँचे हैं जहाँ उन्होंने चीनी प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ से मुलाक़ात की है.

बीजिंग में वेन जियाबाओ से कोफ़ी अन्नान ने कहा, "मैं यह काम अकेले नहीं कर सकता, मुझे आप जैसे देश का समर्थन और मशविरा चाहिए."

संयुक्त राष्ट्र के पूर्व महासचिव कोफ़ी अन्नान की शांति योजना को रूस पहले ही समर्थन देने की घोषणा कर चुका है.

मौजूदा परिस्थिति में चीन एक ऐसी शक्ति है जिसे राज़ी किए बिना संयुक्त राष्ट्र के तत्वाधान में बात आगे नहीं बढ़ सकती, कोफ़ी अन्नान की शांति योजना में संयुक्त राष्ट्र की निगरानी में युद्धविराम कराके राजनीतिक वार्ता शुरू करने की बात शामिल है.

रूस का समर्थन मिलने के बाद चीन को मनाने का काम अन्नान के लिए थोड़ा आसान हो गया है.

इससे पहले सीरिया पर लाए गए प्रस्ताव को संयुक्त राष्ट्र में रूस और चीन दो बार वीटो कर चुके हैं जिसके लिए उनकी कड़ी आलोचना हुई थी.

सीरिया में जारी राजनीतिक हिंसा में अब तक आठ हज़ार से अधिक लोग मारे जा चुके हैं और हिंसा को रोकने की सभी अंतरराष्ट्रीय कोशिशें अब तक नाकाम ही साबित हुई हैं.

सीरिया में विद्रोही राष्ट्रपति बशर अल असद को सत्ता से हटाए जाने और उनके ख़िलाफ़ युद्ध अपराध का मुकदमा चलाए जाने की माँग कर रहे हैं जबकि पिछले एक वर्ष से जारी जनविद्रोह को बलपूर्वक कुचले जाने की ख़बरें लगातार आ रही हैं.

कूटनीतिक मामलों के जानकारों का कहना है कि बशर अल असद अब तक अंतरराष्ट्रीय दबाव के बावजूद टिके हैं क्योंकि रूस और चीन उनके ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई के पक्षधर नहीं हैं.

विश्लेषक कहते हैं कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पाँचों स्थायी सदस्यों की सहमति के बिना कोई सैनिक कार्रवाई नहीं होगी इसलिए बशर विद्रोहियों के दमन की नीति से पीछे नहीं हट रहे हैं लेकिन अगर रूस के बाद चीन कोफ़ी अन्नान के प्रस्ताव को मान लेता है तो सीरिया पर वास्तविक दबाव पड़ेगा.

चीन सीरिया में हिंसा रुकवाने की बात तो कर रहा है लेकिन बशर को पद से हटाए जाने की बात मानने से हिचक रहा है.

कोफ़ी अन्नान के प्रस्ताव में छह प्रमुख बातें कही गई हैं-- राजनीतिक प्रक्रिया की शुरूआत हो, आबादी वाले इलाक़ों से सेना हटाई जाए, विद्रोही लड़ाई बंद करने का वादा करें, दोनों पक्ष मानवीय सहायता को बाधित न करें, राजनीतिक बंदियों की रिहाई हो, देश में पत्रकारों को आवागमन की खुली छूट हो और सरकार शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार का सम्मान करे.

कोफ़ी अन्नान के प्रस्ताव में बशर को हटाने या उन पर मुकदमा चलाने की बात नहीं कही गई है.

संयुक्त राष्ट्र एक एक अधिकारी ने बताया है कि सीरिया के पास अन्नान शांति योजना की प्रति पहुँच गई है और उसने जल्दी ही इस पर अपनी प्रतिक्रिया देने की बात कही है.

अन्नान के प्रस्ताव में सीरिया के लिए समय सीमा तय नहीं की गई है.

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