बुरी मंशा वाले परमाणु सामग्री की खोज में: ओबामा

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Image caption इस सम्मेलन में 53 देशों के नेताओं ने भाग लिया

विश्व के 53 देशों के नेताओं ने परमाणु आतंकवाद के खतरे का सामना करने के लिए आपसी सहयोग पर बल देते हुए खतरनाक परमाणु सामग्री की सुरक्षा का संयुक्त अनुरोध किया है.

नेताओं का मानना था कि कड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय नीतियों के द्वारा परमाणु सामग्री को आतंकवादियों के हाथ में जाने से रोकने की ज़रूरत है.

चाहे दक्षिण कोरिया की राजधानी सियोल में हो रहे सम्मेलन में परमाणु आतंकवाद का मुद्दा छाया रहा लेकिन अंतरराष्ट्रीय समुदाय की उत्तर कोरिया और ईरान के परमाणु कार्यक्रमों पर चिंता भी सामने आई.

उत्तर कोरिया ने कहा है कि वह अप्रैल में एक रॉकिट प्रक्षेपित करेगा जो एक उपग्रह को ले जाएगा. उधर अमरीका का कहना है कि यह संयुक्त राष्ट्र प्रस्तावों का उल्लंघन होगा और मिसाइल टेस्ट ही माना जाएगा.

'कई हलकों में चिंता'

अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा कि वे ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर रूस और चीन के नेताओं से बात करेंगे.

ओबामा का कहना था, "अब भी कई बुरी मंशा रखने वाले खतरनाक सामग्री खोज रहे हैं और इसे जमा करने की धमकी दे रहे हैं. ज्यादा नहीं, इनमें से थोड़ी बहुत सामग्री ही सैकड़ों, हज़ारों लोगों के जान से मारने के लिए काफी है."

उनका कहना था, "मैं ये बढ़ा-चढ़ाकर नहीं बोल रहा हूँ. हम इसी असलियत का सामना कर रहे हैं. दुनिया की सुरक्षा इस बात पर निर्भर कि हम क्या कार्रवाई करते हैं."

उधर चीन का कहना था कि परमाणु सुरक्षा के लिए बेहतर अंतरराष्ट्रीय माहौल बनाना चाहिए.

बीबीसी के कूटनीतिक मामलों के संवाददाता जोनाथन मार्कस के अनुसार, "संयुक्त बयान परमाणु आतंकवाद को अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक मानता है. लेकिन परमाणु सामग्री की सुरक्षा सुनिश्चित करना देशों की जिम्मेदारी है, न कि अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की..इसलिए साझा अंतरराष्ट्रीय मानक तय करने के प्रयासों से कई हलकों में चिंता पैदा होती है कि बड़ी ताकतें क्या अन्य देशों के परमाणु मसलों में दखल दे रही हैं?"

जोनाथन मार्कस का कहना है कि इसीलिए ये भी जोर देकर कहा गया है कि उठाए जाने वाले कोई भी कदम देशों के शांतिपूर्ण मकसदों के लिए परमाणु ऊर्जा बनाने के अधिकार का उल्लंघन नहीं करेंगे.

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