संयुक्त बैंक और स्थानीय मुद्रा समेत कई अहम फैसले

Image caption प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने ब्रिक्स समूह के देशों से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार जैसे मुद्दों पर एक स्वर में बोलने का आह्वान किया है

पिछले दिनों अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ''मात्र एक कैचफ्रेज़'' यानी प्रचलित शब्द बन जाने जैसी आलोचना सहने वाले ब्रिक्स देशों के समूह ने चौथे सम्मेलन में कई अहम फैसले किए हैं.

ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ़्रीकी नेताओं के नई दिल्ली में एक दिन के सम्मेलन में आपस में व्यापार बढ़ाने के लिए स्थानीय मुद्रा में व्यापार करने पर समझौता किया है.

साथ ही यह भी फैसला किया गया है कि यह देश मिल कर विकास बैंक बनाएंगे. इस प्रस्ताव की व्यावहारिकता पर इन देशों के वित्त मंत्री अगले सम्मेलन में अपनी रिपोर्ट देंगे.

दुनिया के 43 प्रतिशत आबादी का प्रतिनिधित्व करने वाले इस समूह ने दिल्ली घोषणा पत्र जारी करते हुए अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी आईएमएफ को भी आड़े हाथों लिया और कहा कि वे जनवरी 2013 तक उन सुधारों की उम्मीद करते हैं जिसके तहत उभर रहे देशों की बात इनमें नजर आएगी.

यह भी कहा गया कि वर्ल्ड बैंक में वे विकासशील देशों की उम्मीदवारी का स्वागत करते हैं. दिल्ली घोषणा पत्र में कहा गया कि आईएमएफ की नियुक्ति साफ और योग्यता के आधार पर होनी चाहिए.

ब्राजील की राष्ट्रपति डिलमा रूसेफ, चीन के राष्ट्रपति हू जिंताओ, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति जैकब जुमा और रूस के राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव- इन सभी के दिल्ली में एक साथ मौजूद होने से कई सड़कों पर लोगों को मुश्किलें तो पेश आईं लेकिन यह देश के लिए अवसर भी बहुत बड़ा था.

बैंक

इन ब्रिक्स देशों के चौथे शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि समूह के सदस्य 'दक्षिण-दक्षिण विकास बैंक' बनाने के प्रस्ताव पर गौर करने के लिए सहमत हो गए हैं जिसे ब्रिक्स देशों के साथ ही अन्य विकासशील देश भी धन मुहैया कराएंगे.

चीन और रूस समेत सभी ब्रिक्स समूह के नेताओं ने पश्चिम एशिया में जारी अशांत माहौल पर भी चर्चा की और वे संकट के शांतिपूर्ण समाधान के लिए साथ मिलकर काम करने पर सहमत हुए. उनका कहना था कि केवल वार्ता ही स्थाई शांति का समाधान है.

मनमोहन सिंह का भी यही मानना था. ब्रिक्स देशों के चौथे शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने उन राजनीतिक बाधाओं से बचने पर जोर दिया जिनकी वजह से वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता पैदा होती है जिससे व्यापार पर असर पड़ता है.

उन्होंने कहा, ''हमें राजनीतिक बाधाओं से बचना चाहिए जो विश्व ऊर्जा बाजार में अस्थिरता पैदा करती हैं और कारोबार पर असर डालती हैं...हमें आर्थिक विकास के लिए नीतियों में समन्वय सुनिश्चित करना चाहिए.''

सफलता

ब्रिक्स के सम्मेलन की सफलता पर भी सभी देशों ने खुशी जताई. दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति जैकब जुमा ने कहा, ''मुझे खुशी है कि इतने कम समय में कई अहम मुद्दो पर चर्चा भी हुई और सहमति भी. मुझे बहुत खुशी है कि हमें ब्रिक्स में यह सफलता मिली है.''

आंतकवाद के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि ब्रिक्स देशों को आतंकवाद और सोमालियाई समुद्री लुटेरों के खतरों समेत अन्य चुनौतियों पर आपसी सहयोग बढ़ाना चाहिए.

आर्थिक मंदी का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, ''हम सभी वैश्विक आर्थिक मंदी से प्रभावित हैं, खाने-पीने की चीजों और ईंधन की कीमतें बढ़ रही हैं. मध्य पूर्व में राजनीतिक अनिश्चितता है, आतंकवाद बढ़ रहा है.''

उन्होंने कहा, ''इन चुनौतियों के प्रति हमारा जवाब अलग-अलग हो सकता है, लेकिन साझा हित हमें एक-दूसरे से जोड़ते हैं.''

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने दस खास मुद्दों का जिक्र किया जिनके बारे में उनका मानना है कि ये ब्रिक्स के सदस्य देशों के लिए चिंता के विषय हैं.

इन मुद्दों में रोजगार के अवसर पैदा करना, ऊर्जा और खाद्यान्न सुरक्षा, आर्थिक मंदी से निजात, दोहा दौर की व्यापार वार्ता में जान फूंकना और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए धन मुहैया कराना शामिल है.

अगले दशक में हर साल लगभग अस्सी लाख रोजगार के नए अवसर पैदा करने की भारत की जरूरत पर प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ब्रिक्स देशों के अनुभवों से सीखना चाहेगा कि वे इन समस्याओं से किस तरह निपट रहे हैं.

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