'भारत नहीं जाने दिया तो आत्महत्या कर लेंगे'

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Image caption दीपक रहेजा जल्द से जल्द भारत लौटना चाहते हैं

चीन में एक व्यापारिक विवाद में फँसे दो भारतीय नागरिकों ने एक सप्ताह के भीतर स्वदेश लौटने की अनुमति न मिलने की स्थिति में आत्महत्या करने की धमकी दी है.

दूसरी ओर, चीनी अधिकारियों ने गुरुवार को एक बार फिर कहा है कि जब तक इन लोगों के ख़िलाफ़ चल रहे मुकदमे का फ़ैसला नहीं हो जाता तब तक ये लोग देश छोड़कर नहीं जा सकते.

दीपक रहेजा और श्यामसुंदर अग्रवाल की मुसीबतें तब शुरू हुईं जब उनकी कंपनी के मालिक 15 लाख डॉलर की देनदारी चुकाए बिना देश से भाग गए, इसके बाद लेनदारों ने रहेजा और अग्रवाल को 14 दिसंबर 2011 को बंधक बना लिया, भारतीय दूतावास के प्रयासों के बाद चार जनवरी 2012 को उनकी रिहाई हो सकी.

रहेजा का कहना है, "हम दोनों कंपनी के कर्मचारी हैं, मालिक अगर पैसे लेकर भाग गए तो किस क़ानून के मुताबिक़ हमसे पैसे वसूलने की कोशिश की जा रही है, हमारे साथ जानवरों से भी बुरा बर्ताव किया गया, हमारी पिटाई की गई, हमें बिना खाने और दवाई के रखा गया."

रिहाई के बाद भी दोनों की मुसीबतों का अंत नहीं हुआ है, दीपक रहेजा ने शंघाई से फ़ोन पर बातचीत में बीबीसी हिंदी को बताया, "हमारे सारे पैसे ख़त्म हो गए हैं, हम मंगलवार से ही सड़क पर रात बिता रहे हैं, हमारे पास खाने के पैसे भी नहीं है, शंधाई में बहुत सर्दी है, अगर एक सप्ताह के भीतर हमें भारत नहीं जाने दिया गया तो हम दोनों में से एक व्यक्ति ज़रूर आत्महत्या कर लेगा."

रहेजा और अग्रवाल आभूषणों में इस्तेमाल होने वाले क्रिस्टल का कारोबार करने वाली एक कंपनी से जुड़े हुए थे, बीजिंग में मौजूद वरिष्ठ पत्रकार सैबल दासगुप्ता का कहना है कि कई लोग इन दोनों को कंपनी का हिस्सेदार मानते हैं लेकिन रहेजा इससे इनकार करते हैं, उन्होंने सबूत के तौर पर अपना अप्वाइंटमेंट लेटर भी पेश किया है.

जबकि दूसरी ओर चीनी व्यापारियों ने अदालत में काग़ज़ात पेश किए हैं जिनके मुताबिक़ इन दोनों लोगों ने बक़ाया रक़म चुकाने का वादा किया था मगर रहेजा कहते हैं, "वह कागज़ सही नहीं है, हमने ऑरिजनल इनवायस माँगा था लेकिन हमें सिर्फ़ कॉपी दिखाई गई है."

ईवू औद्योगिक क्षेत्र से चलने वाली कंपनी के फ़रार मालिकों के नाम हैं, माहिर हुसैन और फिरोज़ ख़ान. हुसैन का संबंध यमन से है जबकि फ़िरोज़ ख़ान भारतीय नागरिक बताए जाते हैं. उन दोनों में से किसी को अभी तक ढूँडा नहीं जा सका है.

सड़क पर बीतती रातें

शंघाई की सर्दी में रेहजा और अग्रवाल रातें बिता रहे हैं क्योंकि वे जिस होटल में रह रहे थे उसका बिल न चुका पाने की वजह से उन्हें वहाँ से निकाल दिया गया है.

अब तक शंघाई स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास इन दोनों लोगों के ख़र्च उठा रहा था मगर अब दूतावास ने उन्हें बताया है कि ख़र्च सात हज़ार डॉलर की सीमा पार कर गया है इसलिए वे और आर्थिक सहायता नहीं दे सकते.

डेढ़ साल से चीन में रह रहे रहेजा ने कहा, "रात में तापमान दो डिग्री सेल्सियस तक चला जाता है, हम खाने और दवाओं के बिना रह रहे हैं, हम दोनों में से किसी का स्वास्थ्य अच्छा नहीं है, हम दोनों हाइ ब्लडप्रेशर और डायबिटीज़ के मरीज़ हैं. अगर हमें एक सप्ताह के भीतर नहीं जाने दिया गया हममें से एक आदमी की जान ज़रूर चली जाएगी, हम आत्महत्या कर लेगें या उससे पहले ठंड और भूख-प्यास से हमारी जान चली जाएगी."

चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता होंग ली का कहना है, "हमारी जानकारी के मुताबिक़, स्थानीय अदालत ने मामले में सही क़ानूनी प्रक्रिया का पालन किया है, जब तक लेनदारों की रकम नहीं चुकाई जाती तब तक इन लोगों के देश छोड़ने पर रोक है, वह आदेश मुकदमे का फ़ैसला होने तक लागू है."

रहेजा का कहना है कि "मेरे घर के लोगों ने सारी जमा पूंजी निकालकर लगभग डेढ़ लाख डॉलर लेनदारों को दिया है मगर इससे अधिक रकम देना हमारे बस की बात नहीं है."

मुकदमे की सुनवाई पहली मार्च से शुरू हुई है और इसे पूरा होने में अभी समय लगेगा तब तक इन दोनों भारतीय नागरिकों का भविष्य अनिश्चित दिखाई दे रहा है.

चीन में मौजूद भारतीय कूटनयिकों ने चीन सरकार से अनुरोध किया है कि मामले को जल्द जल्द से निबटाया जाए.