तालिबान का मोबाइल प्रचार

Image caption तालिबान ने अपना प्रभाव बढ़ाने के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है.

तालिबान चरमपंथी अफगानिस्तान में मोबाइल फोन को प्रचार के साधन के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं.

चरमपंथी वीडियो और संदेश भेज रहे हैं ताकि लोगों को अफगान सरकार का समर्थन करने और सुरक्षा बलों में शामिल होने से रोका जा सके.

देश के दक्षिणी और पूर्वी इलाकों में रात में मोबाइल सेवा पर प्रतिबंध लगाने के लिए भी वो अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर रहे हैं.

इस बीच, तालिबान के प्रभाव वाले इलाकों में आने-जाने वाले लोग अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तालिबानी धार्मिक गीतों और रिंगटोन्स का खूब इस्तेमाल कर रहे हैं.

तालिबान की तरफ से जो वीडियो क्लिप ग्राहकों को भेजी जाती हैं उनमें सिर काटते, आत्मघाती हमला करते और सड़कों के किनारे किए गए धमाकों की तस्वीरें शामिल होती हैं.

इन वीडियो क्लिपिंग का मकसद अवाम को चेतावनी देना होता है ताकि वो सरकारी अधिकारियों की मदद न करें और अफगान राष्ट्रीय सेना और पुलिस में शामिल न हों.

इसके साथ ही विदेशी सेना द्वारा आम नागरिकों की हत्या और अफगान और मुस्लिम धार्मिक आस्था को कथित रूप से नुकसान पहुंचाने की तस्वीरें भी भेजी जाती हैं.

तालिबान की धमकी

पझवॉक अफगान न्यूज़ के निदेशक दानेश करोखेल ने अमरीका की एक रेडियो वेबसाइट को बताया,''तालिबान चरमपंथी आम लोगों को डराना चाहते हैं ताकि वे सरकार की मदद न करें.वो लोगों को धमकाते हैं. जो भी इस तरह के वीडियो देखता है उसका डरना तो लाजमी है.''

पिछले एक साल में अमरीकी सेना ने देश के दक्षिणी हिस्से में तालिबान चरमपंथियों पर कड़ी कार्रवाई की है जिसके जवाब में उन्होंने मोबाइल फोन सेवाओं पर रात्रि में प्रतिबंध लागू करने की घोषणा कर दी जिनमें प्रांतीय राजधानियां भी शामिल हैं.

तालिबान की इन कार्रवाइयों के मनोवैज्ञानिक दबाव और दूसरे विपरीत प्रभावों से चिंतीत अफगान राष्ट्रपति हामिद करजई ने मोबाइल कंपनियों को चेतावनी दिया था कि अगर वे तालिबान के आदेशों का पालन करेंगे तो उनके लाइसेंस रद्द कर दिए जाएंगे.

लेकिन जब मोबाइल सेवा प्रदान करने वाली कंपनियों ने तालिबान के आदेशों का पालन नहीं किया तो उन्होंने कुछ ही हफ्तों में तकरीबन तीन दर्जन मोबाइल टावर नष्ट कर दिए.

ऐसे एक टावर की मरम्मत में कंपनियों को कम से कम दो लाख डॉलर रुपए खर्च करने पड़ते हैं.

तालिबान शासन

Image caption अफगानिस्तान में लैंड लाइन फोन की आधारिक संरचना न होने की वजह से मोबाइल फोन का महत्व बढ़ जाता है.

2001 एक से पहले जब अफगानिस्तान पर तालिबान का शासन था तब संगीत को गैर इस्लामिक माना जाता था और संगीत के टेप बेचने वाले दुकानदारों को गिरफ्तार कर लिया जाता था.

यहां तक कि शादियों में भी संगीत और वाद्य बजाने पर प्रतिबंध था.

तालिबान ने हाल ही में धार्मिक गीतों की एक वेबसाइट लॉन्च की है.

इस साइट में जिहाद, शहादत, बुरका और संगीत पर प्रतिबंध से जुड़े उपदेश दिए गए हैं.

एक दशक पहले तालिबान के पतन के बाद अफगानिस्तान में मोबाइल फोन का इस्तेमाल करनेवालों की संख्या काफी बढ़ गई है.

अफगानिस्तान में लैंडलाइन फोन की आधारिक संरचना का अभाव है.

ऐसे में मोबाइल फोन सेवा बाधित होने पर आम लोगों, सरकार और कारोबारियों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है.

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