बर्मा उपचुनाव शांतिपूर्ण, भारी मतदान

  • 1 अप्रैल 2012
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Image caption सू ची अपने मतदान क्षेत्र में वोट डालने के बाद समर्थकों का अभिवादन करते हुए.

बर्मा में मतदाता 45 सीटों के लिए उपचुनावों में वोट डाल रहे हैं. देश की लोकतंत्र हिमायती नेता आंग सान सू ची पहली बार चुनाव लड़ रही हैं और उन्होंने अपना मत डाल दिया है.

बीबीसी के एक संवाददाता के मुताबिक मतदान केंद्रों पर बहुत भीड़ जुट रही है और चुनावों मे भारी मतदान की आशा है.

यूरोपीय संघ के पर्यवेक्षक के अनुसार मतदान अबतक शांतिपूर्ण चल रहा है.

यूरोपीय संघ पर्यवेक्षक इवो बेलेत ने कहा, "हम उम्मीद करते है कि पूरे दिन मतदान शांतिपूर्ण रहेगा. हम जिन मतदान केंद्रो पर नजर बनाए हुए हैं उनका जायजा लेते हुए बाद में चुनाव का आकलन करेंगे."

इससे पहले सू ची मतदान में गड़बड़ियों की आशंका जता चुकी हैं.

आंग सान सू ची ने शुक्रवार को कहा था कि रविवार को होने वाले उप-चुनावों में अनियमितताएं हो सकती हैं. उन्होंने कहा है कि पूरी तरह से स्वतंत्र होने पर संदेह के बावजूद वे आगे बढ़ने के प्रति दृढ़संकल्प हैं.

बर्मा की नेशनल लीग ऑफ़ डेमोक्रेसी की नेता के रंगून के दक्षिण-पश्चिम में स्थित कावमू नाम की सीट पर जीतने की संभावना है.

आंग सान सू ची ने एक प्रेसावार्ता में कहा कि अनियमितताएं लोकतांत्रिक चुनावों में स्वीकार्य सीमा से कहीं अधिक होने वाली हैं.

उनकी पार्टी ने कहा है कि आंग सान सू ची के चुनाव क्षेत्र में सैंकड़ों मृत लोगों के नाम चुनाव सूची में दर्ज हैं जबकि कम से 1300 जीवित लोगों के नाम सूची से गायब हैं.

सू ची ने पार्टी की चुनाव सामग्री को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया है.

उन्होंने पत्रकारों को बताया, “अनियमितताओं के संदेह बावजूद हम आगे बढ़ने के लिए दृढ़संकल्प हैं क्योंकि लोगों की यही इच्छा है. हमें चुनावों में हिस्सा लेने का कोई अफ़सोस नहीं हैं. ”

विदेशी पर्यवेक्षक

इन उप-चुनावों में बर्मा की राजनीतिक सुधारों की यात्रा में एक मील का पत्थर माना जा रहा है.

ये सेना समर्थित सरकार के सत्ता में आने के एक साल बाद हो रहे हैं.

इन चुनावों में 45 संसदीय सीटों के प्रतिनिधि चुने जाएंगे. बर्मा में पहली बार विदेशी चुनाव पर्यवेक्षकों को देश में आने की अनुमति दी गई है.

आसियान, यूरोपीय संघ और अमरीका से कुछ प्रतिनिधियों को मतदान की निगरानी के लिए निमंत्रित किया गया है.

सौ से अधिक विदेशी पत्रकारों को भी मतदान के दिन ख़बरें कवर करने की इजाजत दी गई है.

भारतीय विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता के मुताबिक भारत ने चुनाव आयोग के दो वरिष्ठ अधिकारी और भारतीय राजदूत को मतदान पर निगरानी रखने के लिए भेजा है. प्रवक्ता के अनुसार बर्मा में भारत के राजदूत वीएस शेषाद्री, असम के मुख्य चुनाव आयुक्त मनिंदर सिंह और मणिपुर के मुख्य चुनाव आयुक्त पीसी लामकुंगा मतदान पर नजर रख रहे हैं.

आंग सान सू ची पहली बार किसी चुनाव में हिस्सा ले रही हैं. वे साल 1990 से अपने घर में नज़रबंद रही थीं. उसी वर्ष उनकी पार्टी ने चुनावों में प्रचंड बहुमत हासिल किया था. लेकिन सेना ने उनकी पार्टी को सत्तारूढ़ नहीं होने दिया था.

सू ची की नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी ने साल 2010 में हुए चुनावों का बहिष्कार किया था. उन चुनावों के बाद सैन्य प्रशासकों के स्थान सेना समर्थित राष्ट्रपति थीन सेन की सरकार अस्तित्व में आई थी.

इन चुनावों के बाद नवंबर 2010 में आंग सान सू ची को नज़रबंदी से रिहा कर दिया गया था.

अब वे कावमू नाम के ग्रामीण कस्बे से चुनाव लड़ रही हैं.

साल 2008 में रंगून और इरावदी डेल्टा में आए नर्गिस नाम के चक्रवात में कावमू सबसे अधिक प्रभावितों होने वाले कस्बों में से एक था.

ये लगभग तय है कि उपचुनावों के बाद वे संसद में पहुंचेंगीं और उनका पार्टी नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी बर्मा आधिकारिक विपक्ष का स्थान लेगी.

ये उपचुनाव ऐसे दौर में हो रहे हैं जब पश्चिमी देश एक बार फिर बर्मा के साथ संबंध स्थापित कर रहे हैं.

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