सूडान: सल्फियों का अनोखा संगीत बैंड

मोहम्मद उसमान वर्दी (फाइल फोटो) इमेज कॉपीरइट BBC World Service
Image caption सूडान में संगीत की परंपरा बहुत पुरानी है. मोहम्मद उसमान वर्दी वहां के जाने माने गायक है.

पिछले साल यानी 2011 के जूलाई में सूडान से अलग होकर दक्षिण सूडान नाम का एक नया देश बन जाने के बाद भी सूडान में इस बात पर बहस जारी है कि उस देश का स्वरूप क्या होना चाहिए.

सबसे बड़ी बहस इस बात को लेकर है कि सूडान में धर्म का क्या रोल होना चाहिए.

दक्षिण सूडान के अलग होने के बाद से सूडान में लगभग सारे लोग इस्लाम धर्म के मानने वाले हैं.

लेकिन इसका कत्तई ये अर्थ नहीं है कि सारे लोगों की सोच एक जैसी है.

इस्लाम धर्म मानने वालों में ही अलग-अलग पंथ के लोगों की विचार धारा एक दूसरे से ठीक विपरीत होती है.

उदाहरण के तौर पर इस्लाम धर्म की धार्मिक पुस्तक पवित्र 'कुरान' की रूढिवादी व्याख्या करने वाले सल्फी जमात के लोग सूफी मत के समर्थकों से लगभग हर मामले में अलग होते हैं.

सूफी विचारधारा के समर्थक इस्लाम के उदारवादी पहलू को उजागर करते हैं.

ऐसे में जब सूडान में सल्फियों ने बिना किसी वाद्य यंत्र का इस्तेमाल किए एक संगीत बैंड को शुरू किया तो उनकी तरफ सबका ध्यान जाना लाजमी है.

बीबीसी संवाददाता जेम्स कोपनैल ने भी इस संगीत बैंड का जायजा लिया.

'अल-माली' नाम का ये ग्रुप सूडान में गाना गाकर महिलाओं को हिजाब पहनने के लिए कहते हैं.

इस ग्रुप को सूडान के कुछ प्रभावशाली धार्मिक संगठनों का समर्थन हासिल है खासकर सल्फियों का.

कहा जाता है कि इस संगीत बैंड के पीछे ओसामा अब्दुल हमीद का हाथ है.

'वाद्य यंत्र हराम हैं'

ओसामा अब्दुल हमीद बीबीसी से बातचीत के दौरान कहते हैं, ''दो कारणों से ये संगीत जायज है. पहला ये कि इसमें कोई वाद्य यंत्र का इस्तेमाल नहीं किया जाता क्योंकि पैगम्बर मोहम्मद ने हर तरह के संगीत यंत्र को इस्लाम में प्रतिबंधित करार दिया है और दूसरा ये कि हम इसके जरिए अच्छे काम करने का संदेश देते हैं.''

बीबीसी संवाददाता ने अल-माली ग्रुप के प्रमुख मोहम्मद इब्राहिम से पूछा कि बिना किसी वाद्य यंत्र के वो कैसे एक सफल संगीत बैंड बनने की आशा कर सकते है.

मोहम्मद इब्राहिम का जवाब था, ''किसी भी वाद्य यंत्र की तुलना में मनुष्य की आवाज ज्यादा शक्तिशाली और प्रभावशाली होती है. मनुष्य की आवाज को आप जैसे चाहें इस्तेमाल कर सकते हैं.''

लेकिन जाहिर है सूडान में सभी की सोच मोहम्मद इब्राहिम जैसी नहीं है.

मुस्तफा खोगाली एक सफल संगीतज्ञ हैं और वो ड्रम बजाते हैं.

विचारधारा के ऐतबार से वो एक सूफी हैं और सूफी लोग अपनी संगीत के लिए हमेशा से वाद्य यंत्रों का इस्तेमाल करते रहें हैं.

सूडान में सूफी विचारधारा के लोग ही बहुमत में हैं. सूफियों और सल्फियों के ना केवल संगीत के मामले में बल्कि राजनीतिक विचारधारा के मामले में भी एक दूसरे से गहरे मतभेद हैं.

मुस्तफा खोगाली के अनुसार सल्फियों का उत्थान सूडान के लिए एक खतरा है.

'अरब प्रभाव'

खोगाली कहते हैं, ''सूफियों के जरिए ही हमारा इस्लाम धर्म फैला है. सूडान में हाल ही में सल्फियों और सूफियों के बीच कई हिंसक संघर्ष देखे गए हैं जो कि पहले नहीं होते थे. मैने महसूस किया है कि आजादी के बाद से पिछले 50 वर्षों में सूडान पर सऊदी अरब का काफी प्रभाव बढ़ा है. इसने संगीत को भी प्रभावित किया है.''

दक्षिण सूडान के अलग होने के बाद सूडान की पहचान को लेकर बहस बहुत जोरों से हो रही है.

सल्फियों का मानना है कि सूडान में शरिया कानून लागू होना चाहिए जबकि सूफियों का कहना है कि इस्लाम की असल आत्मा ज्यादा जरूरी है ना कि उसका बाहरी दिखावापन.

सूडान में नया संविधान लिखा जा रहा है. सल्फियों और सूफियों दोनों का ही मानना है कि ये मामला सिर्फ संगीत के मतभेद का नहीं है.

उनके मुताबिक ये बहस इस बात को दर्शाती है कि भविष्य में सूडान की पहचान क्या होगी.

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