कंबोडिया की खस्ताहाल यातायात व्यवस्था

नोम पेन्ह (फाइल फोटो) इमेज कॉपीरइट Reuters
Image caption अप्रैल 2012 के पहले सप्ताह में नोम पेन्ह में आसियान सम्मेलन हुआ था.

लंदन, बैंकॉक या फिर हॉगकॉंग में रहने वाले ज्यादातर लोगों को शायद सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था की अहमियत का अंदाजा नहीं होता.

लेकिन कंबोडिया की राजधानी नोम पेन्ह शायद इन सबमें अलग है, क्योंकि वहां आम जनता के लिए शायद कोई भी व्यवस्थित यातायात सेवा नहीं है.

लगभग एक दशक पहले वहां बस सेवा शुरू की गई थी लेकिन वो प्रयोग असफल रहा क्योंकि लोगों ने उसका इस्तेमाल ही नहीं किया.

लेकिन अब शहर बड़ा होता जा रहा है और भीड़-भाड़ भी अब ज्यादा होने लगी है.

इसको देखते हुए स्थानीय अधिकारी एक बार फिर शहर में बस और ट्राम सेवा शुरू करने पर विचार कर रहें हैं.

बीबीसी संवाददाता गाइ डे लॉने ने शहर में दोबारा शुरू होने वाली बस सेवा का जायजा लिया.

एक पुरानी कहावत है कि आप घंटों तक बस का इंतजार करते रहें और फिर अचानक एक ही साथ तीन-तीन बस आ जाती है. लेकिन कंबोडिया में शायद इंतजार की सीमा एक दशक है.

दस साल पहले शहर में जो बस सेवा शुरू की गई थी, वो कुछ ही महीनों में रोक दी गई. क्योंकि लोग कहते थे कि वे बस से क्यों यात्रा करें जब उन्हें घर के दरवाजे पर ही टक-टक या मोटरसाइकिल वाली टैक्सी मिल जाती है.

टक-टक तीन पहियों वाली एक खास तरह की सवारी होती है जो कंबोडिया में बहुत आम है. इसमें आगे हिस्से में मोटरसाइकिल की इंजन होती है और पीछे की तरफ रिक्शा की तरह लोगों के बैठने की जगह होती है.

टक-टक सेवा

शहरी विकास के विशेषज्ञ इम सोकली कहते हैं, ''उस समय केवल मेन रोड पर ही बस सेवा शुरू की गई थी. इस कारण लोगों को बस स्टैंड तक पहुंचने के लिए 15-20 मिनट तक पैदल चलना पड़ता था. रास्ते में ना कोई पेड़-पौधे होते थे और ना ही कोई फुटपाथ. लोगों को आती जाती तेज रफ्तार कारों का भी डर रहता था. इस वजह से लोगों ने मोटरबाइक टैक्सी से सफर करना ज्यादा बेहतर समझा.''

इम सोकली का कहना है कि अब जबकि शहर की आबादी बढ़ रही है तो केवल पारंपरिक यातायात साधनों से काम नहीं चलेगा, क्योंकि उससे बहुत ज्यादा वायु प्रदूषण होगा और पर्यावरण को नुकसान पहुंचेगा.

कंबोडिया में लोग टक-टक सेवा इस्तेमाल करना क्यों पसंद करते हैं. इसकी वजह बताते हुए एक टक-टक चालक सोखोर्न कहते हैं, ''लोग टक-टक में ज्यादा आरामदेह और सुरक्षित महसूस करतें हैं. लोग इसे अपने घर के दरवाजें के पास से ही पकड़ सकते हैं और ये बहुत महंगा भी नहीं है. मुझे नहीं लगता कि लोग बस स्टेशन तक पैदल जाना और फिर वहां बस का इंतजार करना पसंद करेंगें.''

लेकिन बीबीसी से बातचीच के दौरान पता चला कि शहर के कुछ लोग अब लगता है कि टक-टक सेवा या मोटर-टैक्सी को छोड़कर वातानुकुलित बस में यात्रा करने के लिए तैयार दिखते हैं.

लेकिन इन सब के बावजूद नोम पेन्ह में अगर किसी सार्वजनिक यातायात व्यवस्था को सफल बनाना है तो उसके लिए कुछ खास बातों का ध्यान रखना होगा.

सरकार को बस-सेवा को इतनी आरामदेह और सस्ती बनानी होगी कि लोग इस ओर आकर्षित हो सकें. साथ ही साथ सरकार को कुछ ऐसे कदम उठाने होंगे ताकि निजी वाहन का इस्तेमाल और महंगा और मुश्किल हो सके.

कंबोडिया में संयुक्त राष्ट्र हैबिटाट के प्रोग्राम मैनेजर और यातायात प्रबंधन के मामले में कंबोडिया के स्थानीय अधिकारियों के सलाहकार रह चुके डिन रिथ का कहना है, ''हाल के दिनों में शहर काफी फैल गया है. दूर-दराज इलाकों में रहने वाले ज्यादातर लोग कम आमदनी वाले हैं. उन्हें सार्वजनिक यातायात सेवा की जरूरत है क्योंकि यातायात के दूसरे साधन काफी महंगें हैं. इसलिए हो सकता है कि इस बार बस योजना सफल हो जाए. लेकिन दूर-दराज के इलाकों तक बस सेवा पहुंचानी होगी. और पैदल चलने वालों के लिए भी बेहतर सुविधाएं मुहैया करानी होगी.''

नोम पेन्ह के गवर्नर ने एक बार कहा था, ''मेरे लोग पैदल चलना पसंद नहीं करते.''

लेकिन अगर पैदल चलने वाले लोग फुटपाथ पर से कारोबारियों को हटा सकें तो शायद उन्हें करीब के बस-स्टॉप तक पैदल जाने में मज़ा आएगा.

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