अमरीका के ड्रोन प्रशिक्षण अड्डे का दौरा

ड्रोन

अमरीका और उसके मित्र देश विश्व भर में जो लड़ाईयां लड़ रहे हैं वो नेवादा और न्यू मेक्सिको के रेगिस्तानों से संचालित की जा रही हैं.

ड्रोन - जो दरअस्ल रिमोट कंट्रोल से चलने वाला विमान है, आधुनिक युद्ध कौशल का एक अहम हिस्सा है.

ये मानव रहित विमान विवादपूर्ण इलाकों के ऊपर चक्कर काट सकते हैं और वहां की तस्वीरें लेकर उसे रिले करने की क्षमता रखते हैं. इनमें से सबसे अधिक विवादास्पद हथियारों से लैस वो विमान होते हैं जो हमले करने की क्षमता रखते हैं.

अमरीका हजारों ड्रोन का इस्तेमाल करता है. इनमें से जो बड़े हैं और अधिक संवेदनशील हैं उन्हें अमरीका में मौजूद अड्डो से संचालित किया जाता है.

अमरीका में चालक रहित विमान उड़ाने वाले जितने पायलटों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है वो लड़ाकू विमान उड़ाने वाले पायलटों के मुकाबले अधिक हैं.

'रोबोट नहीं'

न्यू मेक्सिको में मौजूद होलोमैन एयर फोर्स बेस विश्व का सबसे बड़ा ड्रोन पायलट प्रशिक्ष केंद्र है जहां अमरीकी और ब्रितानी कर्मीदल उन्हें उड़ाने, उनके माध्यम से जासूसी करने और मिसाईल फायर करने की ट्रेनिंग हासिल करते हैं.

प्रेडेटर और रिपर के नाम से जाने जो दो किस्म के ड्रोन हैं, वो आकार में बहुत छोटे होते हैं, उनमें हाई-टेक कैमरे लगे होते हैं और उनके विंग के नीचे हथियार फिट होते हैं.

कर्नल केन जॉनसन का कहना है, "इन विमानों को हमेशा मानवों द्वारा संचालित किया जाएगा. इसलिए ये रोबोट नहीं हैं. ये रोबोट के जरिए संचालित युद्ध नहीं है."

मेरी वहां मौजूदगी में ही कुछ विमानों ने रनवे से उड़ान भरी जिनका संचालन वहां मौजूद कंप्युटरों से लैस खाकी रंग के डब्बे नुमा केंद्रों से किया जा रहा था.

ट्रेनिंग

अड्डे पर ही एक दूसरे कमरे में जहां लगभग अंधेरा था पायलट सिम्युलेटर्स पर ट्रेनिंग ले रहे थे.

एक अमरीकी महिला प्रशिक्षक ने ब्रिटिश रॉयल एयर फोर्स के एक प्रशिक्षु से कहा, "आप परछाइयों के आकार और रंग को देखकर ये तय कर सकते हैं कि क्या उस व्यक्ति के पास हथियार है."

वहां मौजूद स्क्रीनों पर जो चित्र दिख रहे थे उनमें मानचित्र, भवनों की आसमान से ली गई तस्वीरें, सड़कों और कंप्युटर के जरिए तैयार लोगों की छाया - जिनमें से कुछ के पास हथियार भी मौजूद थे, शामिल थीं.

प्रशिक्षक ने कहा कि ये मूल रूप से गुप्त सूचना, निगरानी और सैनिक सर्वेक्षण का मिशन है.

उन्होंने कहा कि एक व्यक्ति ड्रोन उड़ाता है, जबकि दूसरा कैमरे और सेंसर का संचालन करता है.

हालांकि इस तरह की लड़ाई को थल सेना पर बढ़त हासिल है लेकिन अमरीका के ड्रोन के इस्तेमाल को लेकर विवाद है.

पाकिस्तान

पाकिस्तान में, संदिग्ध चरमपंथियों पर मिसाइलों से हमले हो रहे हैं जबकि पाकिस्तान और अमरीका के बीच किसी तरह का कोई युद्ध जारी नहीं है.

किसे निशाना बनाया जा रहा है, और क्यों और आगे कौन-कौन से लोग हैं जो इसका शिकार हो सकते हैं: ये सभी सुचनाएं गुप्त हैं, और इस तरह की खबरें हैं कि ड्रोन हमलों में नागरिकों की भी मौतें हुई हैं.

मानवधिकार संगठनों का कहना है कि इस तरह की कार्रवाई में और अधिक पारदर्शिता होनी चाहिए.

उनका कहना है कि जो नागरिक इन इलाकों में रह रहे हैं उन्हें मालूम नहीं होता कि क्या कल वो इस हमले का निशाना बन सकते हैं या क्या उस स्थिति में क्या होगा जब ड्रोन किसी चरमपंथी पर हमला करता है और आम नागरिक वहां मौजूद होते हैं.

संबंधित समाचार