'संगीत कम कर रहा है देशों के बीच की दूरियां'

के पॉप कलाकार
Image caption के पॉप बैंड की गायिकाओं को जापानी युवतियां ख़ूब पसंद कर रही हैं.

कुछ लोगों का मानना है कि भारत और पाकिस्तान के रिश्तों को बेहतर बनाने में संगीत एक अहम किरदार अदा कर सकता है.

कुछ हद तक ये बात सही भी है क्योंकि दोनों देशों के बीच तमाम कडवाहट के बावजूद पाकिस्तान में लता, रफी, किशोर, दिलीप कुमार, अमिताभ बच्चन, शाहरूख खान और माधुरी दीक्षित जैसे भारतीय कलाकारों के चाहने वालों में कभी कमी नहीं हुई.

ठीक उसी तरह भारत का हर संगीत प्रेमी नूर जहां से लेकर राहत फतह अली खान तक सभी से बेहद मुहब्बत करता है.

ऐसा ही कुछ अब कोरिया और जापान के बीच में भी होता हुआ देखा जा रहा है.

जापान और कोरिया एक दूसरे के पुराने विरोधी रहें हैं खासकर 20वी सदी के पहले हिस्से में जापान के कोरिया पर अपना कब्जा जमा लेने के बाद से तो दोनों देशों के बीच कड़वाहट और बढ़ गई थी.

जापान में अल्पसंख्यकों का एक बड़ा हिस्सा कोरियाई मूल का है और उनमें से कई लोगों का कहना है कि उनके साथ वर्षों से कथित भेद-भाव पूर्ण रवैया अपनाया जाता है.

लेकिन अब जापान में एक कोरियाई पॉप संगीत बहुत लोकप्रिय हो रहा है जिसके कारण इन दोनों देशों के बीच की दूरी भी कुछ कम हो रही है.

शनिवार की शाम जापान की राजधानी टोक्यो स्थित एक विशाल स्टेडियम में हो रहे संगीत समारोह को देखने के लिए बीबीसी संवाददाता रॉलैंड बर्क भी जाते हैं.

'के पॉप'

जापान में इन दिनों सबसे ज्यादा लोकप्रिय संगीत बैंड कोई जापानी नहीं बल्कि कोरिया का 'के पॉप' बैंड है.

सियोल की चार लड़कियों ने कोरियाई आवाज को पूरी दुनिया तक पहुंचाने का सपना देखा है.

उन्हीं में से एक हैं चाई ली.

चे ली कहती है, '''के पॉप' के कई स्टार इन दिनों जापान में हैं लेकिन मेरे ख्याल में ये सिर्फ संगीत की बात नहीं है बल्कि ये पूरे कोरियाई संस्कृति को दर्शाता है.''

जापानी पॉप बैंड की गायिकाओं के मुकाबले कोरियाई बैंड की लड़कियां ज्यादा तड़क-भड़क कपडें पहनती हैं. जापानी गायिकाएं तो कभी-कभी स्कूल युनिफॉर्म भी पहन लेती है.

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Image caption के पॉप ने इन दिनों जापान में हर तरफ धूम मचाया हुआ है.

शायद इन्हीं कारणों से जापान की लड़कियों के बीच में ये कोरियाई लड़कियां काफी लोकप्रिय हो गई हैं.

लेकिन चे ली का मानना है कि उनके कपड़ों या वेश-भूषा के बजाए लोगों पर दर असल उनकी संगीत का असर है.

चे ली कहती है, ''हम अपने संगीत में शक्तिशाली महिलाओं का जिक्र करते हैं, उनको अपनी आवाज उठाने के लिए कहते हैं. इसलिए हमारा संगीत और उनमें महिलाओं का वर्णन ही हमारी लोकप्रियता की वजह है.''

'के पॉप' के कारण टोक्यो शहर में कोरियाई मूल के लोगों के इलाकों का महत्व बहुत बढ़ गया है.

जापान-कोरिया संबंध

जापानी महिलाएं अपने पसंदीदा कलाकारों के पोस्टर्स खरीदने के लिए इन इलाकों में खूब जाने लगी हैं. होटलों और रेस्तरां में कोरियाई खाने की मांग बढ़ गई है.

ये बातें बहुत चौंकाने वाली हैं क्योंकि जापान और कोरिया के संबंध अच्छे नहीं रहें हैं.

दूसरे विश्व युद्ध की समाप्ति से पहले तक कोरियाई प्रायद्वीप एक जापानी कॉलोनी थी.

जापान में कोरियाई मूल के लोगों के साथ इस कदर भेदभाव किया जाता है कि कई कोरियाई लोगों ने तो अपनी पहचान छिपाने के लिए अपने नाम तक बदल लिए हैं.

कोरियाई मूल की किम यंग ई कहती हैं, ''मेरा असली नाम किम यंग ई है लेकिन मेरे पिता जी ने जोर देकर मेरा जापानी नाम रख दिया. मेरा जापानी नाम रिकी तनाका है.''

किम के पिता के अनुसार कोरियाई नाम के साथ उन्हें ऐसी कोई भी नौकरी मिली जिसमें ग्राहकों के साथ बातचीत करनी हो.

किम के दादा-दादी उस समय जापान आए थे जब कोरियाई लोगों को बंधुआ मज़दूर बनाकर जापान लाया जा रहा था.

लेकिन किम का कहना है कि अब कोरियाई होना कोई खतरे की बात नहीं.

किम कहती है, ''मेरा ख्याल है कि कुछ लोग मुझसे ईर्ष्या करते हैं. खासकर वे लोग जो के पॉप में इच्छा रखते हैं. कोरिया के बारे में शायद वे मेरे अलावा कुछ नहीं जानते. वे मुझसे पूछते हैं कि क्या मैं उन्हें कोरिया ले जा सकती हूं. कुछ तो यहां तक कहते हैं कि वे मेरी तरह कोरियाई जापानी बनना चाहते हैं, लेकिन मुझे नहीं लगता कि उन्हें इस बात की समझ है कि जापान में कोरियाई होने का मतलब क्या है.''

लेकिन जापान में 'के पॉप' बैंड के गायकों की जिंदगी का मतलब सिर्फ चमक-दमक नही है.

किनो को एक दुकान के ऊपर दिन में पांच बार संगीत कार्यक्रम में हिस्सा लेना पड़ता है.

गायकों को थोड़ी मेहनत तो करनी पड़ती है लेकिन इस कोरियाई लहर की वजह से कोरियाई संगीतकारों को जापान में शोहरत मिलने की पूरी उम्मीद है.

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