सीरिया में बशर की फौज का कहर जारी

  • 7 अप्रैल 2012
सीरिया (फाइल) इमेज कॉपीरइट AP

सीरिया में शनिवार को हुई लड़ाईयों में कम से कम 24 लोगों की मौत हो गई है.

सरकार विरोधी कार्यकर्ताओं का कहना है कि ये मौतें फौज के हमा शहर के लतामनेह इलाके में किए गए हमलों के दौरान हुईं. कुछ खबरों के मुताबिक मारे जाने वालों की तादाद 27 है.

उनका कहना है कि बीते दो दिनों में कम से कम 100 लोग मारे गए हैं क्योंकि सैनिकों ने अपना अभियान तेज कर दिया है

संयुक्त राष्ट्र अध्यक्ष बान कि मून ने शांति समझौते के बावजूद सरकार द्वारा किए गए फौजी हमले की निंदा की है.

बान कि मून ने कहा है कि युद्धविराम के लिए 10 अप्रैल की तय समय सीमा को हिंसा जारी रखने के एक बहाने के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है.

विस्थापित

इस बीच तुर्की ने कहा है कि सीरिया से आ रहे विस्थापतों की देख-रेख के लिए उसे संयुक्त राष्ट्र के मदद की दरकार होगी.

बान कि मून से बात करने के बाद, तुर्की के विदेश मंत्री अहमेत दवातोगलु ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र और अरब लीग की शांति योजना को लागू करने के राष्ट्रपति बशर अल-असद की सहमति के बाद से शरणार्थियों के आगमन की दर दोगुनी हो गई है.

तुर्की का कहना है कि पिछले 36 घंटों में सीरिया के 2800 नागरिकों ने उसकी सीमा में प्रवेश किया है जबकि वहां मौजूद कुल शरणार्थियों की संख्या 24,000 पहुंच गई है.

संयुक्त राष्ट्र के पूर्व अध्यक्ष कोफी अन्नान की मध्यस्थता से तैयार छह मुख्य बिंदुओं वाले शांति समझौते में सभी पक्षों को 10 अप्रैल से किसी तरह की हिंसा को रोकना है, जबकि पुर्ण युद्दविराम 12 अप्रैल से लागू होगा.

संदेह

लेकिन सीरिया के विपक्ष, अमरीका और कई अन्य देशों ने राष्ट्रपति बशर अल असद की प्रतिबद्धता पर संदेह जताया है.

बेरूत स्थित बीबीसी संवाददाता जिम मुइर का कहना है कि होम्स और अन्य इलाकों में हिंसा कम होने के बजाए बढ़ गई है. उनका कहना है कि सरकार विरोधी कार्यकर्ता, सरकार पर पूरी तरह दमन करने का आरोप लगा रहे हैं.

लेकिन सरकारी अधिकारियों का कहना है कि विद्रोही लड़ाके उन कस्बों और शहरों में फायदा उठा रहे हैं जहां से सेना को वापस बुलाया जा रहा है.

संयुक्त राष्ट्र का एक दल दमिश्क में मौजूद है जो वहां संघर्ष विराम की निगरानी के लिए एक खास दल को तैनात किए जाने की संभावना पर चर्चा कर रहा है.

संयुक्त राष्ट्र का अनुमान है कि राष्ट्रपति बशर अल असद के खिलाफ जारी विरोध प्रदर्शनों और दमन कार्रवाई में साल भर में 9000 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं.

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