बेथेलहम के लिए रास्ता पाने को संघर्ष करते ईसाई

  • 9 अप्रैल 2012
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Image caption पश्चिमी किनारे पर बन रही दीवार का विरोध हो रहा है

पश्चिमी तट पर इसराइल की सीमा चौकी हमेशा विवादों में रही है. इसराइल जोर देता रहा है कि ये चरमपंथियों को रोकने के लिए जरूरी है लेकिन फलस्तीनियों का मानना है कि ये जमीन पर कब्जा करने का तरीका है.

सात साल पहले अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ने इसे गैर कानूनी करार दिया था, लेकिन वहां निर्माण अभी भी जारी है. अब पश्चिमी किनारे पर ईसाई समुदाय इसराइली कोर्ट में इस अवरोध पर बेथेलहम के लिए रास्ता पाने के लिए लड़ाई लड़ रहा है.

बड़ी संख्या में फलस्तीनी ईसाई क्रेमिसन घाटी में जैतून के पेड़ के नीचे इकट्ठा हुए हैं और इस तरह का प्रदर्शन ये हर हफ्ते करते हैं.

ये लोग इसलिए आते हैं क्योंकि ये जानते हैं कि इस जगह पर उनकी पहुंच जल्दी ही इसराइल के अवरोधक दीवार की वजह से बंद हो सकती है.

इब्राहिम शोमाली जैसे स्थानीय पादरी कहते हैं, "57 ईसाई परिवार इस क्षेत्र में दीवार खड़ी होने की वजह से अपनी जमीन से हाथ धो बैठेंगे. एक फलस्तीनी के लिए जमीन बहुत महत्वपूर्ण होती है, एक ईसाई के लिए जमीन बहुत मायने रखती है. हममें से ज्यादातर लोग जो अपनी जमीन से हाथ धो बैठे हैं, वो देश छोड़कर दूसरी जगहों पर चले गए हैं. इसलिए हमारे लिए ये बहुत जरूरी है कि हमारे पास जमीन बची रहे, ताकि हमारे बच्चों का भविष्य सुरक्षित हो सके."

फलस्तीनी बच्चों के लिए घर आने का समय है, जो स्कूल बसों में भरे हुए हैं. लेकिन यहां चिंता की भी बात है कि वे अपने भले के लिए कुछ दिनों में इस जगह को छोड़ देंगे.

हो सकता है कि इनका स्कूल भी इस दीवार के पार हो जाए. यहां काम करने वाली नन खुले तौर पर तो बात करने से कतराती हैं, लेकिन ये लोग भी उस कानूनी अभियान में शामिल हैं जो इस दीवार के रास्ते को बदलने की कोशिश कर रहा है.

अहसान अमीन की तरह और बच्चों के माता-पिता उम्मीद जताते हैं कि उन्हें सफलता मिलेगी. वे कहते हैं, "अगर दीवार बन जाती है तो हम अपने बच्चे को दूसरे स्कूल में भेज देंगे. वैसे हम लोग इसे रोकने की कोशिश करेंगे, लेकिन इससे ज्यादा हम और कुछ नहीं कर सकते."

लेकिन ईसाई समुदाय में इसे लेकर काफी तनाव है.

स्थानीय रेस्तरां में परोसी जाने वाली शराब क्रेमिसन घाटी के मठवासी बनाते हैं. पश्चिमी किनारे पर बनने वाली दीवार से उनका मठ और वहां बनने वाली शराबखाना दोनों ही यरुशलम के लोग हड़प सकते हैं. सामिया खलीलिया को डर है कि वो अपनी पुश्तैनी जमीन खो सकती हैं. वो कहती हैं कि ईसाई समुदाय को एक होने की जरूरत है.

सामिया कहती हैं, "अगर हम सब एक साथ हैं तभी हम मजबूत हैं. हम एक साथ लड़ रहे हैं. ये ईसाई जमीन है. हम लोग हमेशा मठ में पिकनिक मनाने जाते हैं. लोग वहां जाते हैं और शराब खरीदते हैं. साथ ही हम उन्हें अंगूर बेचते हैं ताकि मठवासी उससे शराब बना सकें. वे हमेशा से इस शहर की धरोहर रहे हैं."

सड़क से ऊंची कंकरीट की दीवार देखी जा सकती है जो कि दूर से पड़ोसी बेथेलहम को घेरती है.

इसराइल इसे घाटी में आगे तक बढ़ाना चाहता है और उसका कहना है कि ये रास्ता हार गिलो और गिलो पहाड़ियों के ऊपर यहूदी बस्तियों के फैलाव से बचाएगा.

इन्हें अंतरराष्ट्रीय कानून के हिसाब से गैर कानूनी माना जा रहा है लेकिन इसराइल इस पर विवाद खड़ा करता है और इन्हें यरुशलम के यहूदियों पड़ोसियों के रूप में देखता है.

इसराइली रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता जोशुआ हंटमैन कहते हैं, "आपको याद होना चाहिए कि इससे पहले इस क्षेत्र में जब सुरक्षा दीवार नहीं बनी थी, पहाड़ी के ऊपर से येरुशेलम के दक्षिणी इलाके में लगभग हर रोज गोलीबारी होती थी. हमें इस दीवार को धन्यवाद देना चाहिए जिसने हमारा जीवन बचाया है."

क्रेमिसन घाटी में खुले में जमा लोगों का संगीत शाम होते बंद हो जाता है. स्थानीय ईसाइयों का कहना है कि सालों से यहां छोटी-मोटी हिंसा होती रही है. लेकिन अब दीवार पहाड़ी के आधे रास्ते को बंद कर दे रही है. इसे कहां तक जानी है, इस बारे में कानूनी कार्यवाही जारी है.

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