उजबेकिस्तान: हजारों महिलाओं की 'नसबंदी'

उजबेकिस्तान में महिलाएं
Image caption उजबेकिस्तान में सरकार जबर्दस्ती महिलाओं की नसबंदी करा रही है.

बीबीसी को मिली जानकारी के अनुसार उजबेकिस्तान में सरकार महिलाओं के नसबंदी का एक गुप्त कार्यक्रम चला रही है.

बीबीसी ने इस मामले में कई पीडित महिलाओं और डॉक्टरों से भी बात की है.

सरकार के इस खुफिया कार्यक्रम की शिकार बनी एक महिला अदोलत ने बीबीसी से बातचीत करते हुए कहा, ''मैं हमेशा से चाहती थी कि मेरे चार बच्चे हों, दो बेटी और दो बेटे. लेकिन मेरी दूसरी बेटी के जन्म के बाद मैं दोबारा गर्भवति नहीं हो पाई. जब मैं डॉक्टर के पास गई तो ये जानकर चौंक गई कि दूसरी बेटी को जन्म देते समय मेरी नसबंदी कर दी गई थी.''

अदोलत के अनुसार जब उन्होंने डॉक्टर से इसकी वजह पूछी तो उन्हें बताया गया कि उजबेकिस्तान में ऐसा ही कानून है.

हालाकि आधिकारिक तौर पर उजबेकिस्तान में ऐसा कोई कानून नहीं है.

बीबीसी के जरिए जुटाई गई जानकारी के अनुसार उजबेक अधिकारी पिछले दो साल से पूरे देश में महिलाओं की नसबंदी का कार्यक्रम चला रहें हैं और ज्यादातर मामले में तो महिलाओं को पता भी नहीं होता कि उनकी नसबंदी कर दी गई है.

उजबेकिस्तान में विदेशी पत्रकारों का कोई खास स्वागत नहीं होता है और शायद इसीलिए बीबीसी संवाददाता नतालिया अंतेलावा को भी फरवरी 2012 में उजबेकिस्तान छोड़ने के लिए कह दिया गया था.

नतालिया ने पड़ोसी देश कजाकिस्तान में अदोलत समेत कई उजबेक महिलाओं से मुलाकात की. नतालिया ने कई लोगों से फोन और ई-मेल के जरिए भी बातचीत की.

अपनी आपबीती सुनाने वाली महिलाओं में से कोई भी अपना सही नाम नहीं बताना चाहती थीं.

'गुप्त कार्यक्रम'

राजधानी ताशकंत से आई एक महिला रोग विशेषज्ञ ने इस बारे में जानकारी देते हुए कहा, ''हर साल एक योजना के तहत हर डॉक्टर को कहा जाता है कि उन्हें कितनी महिलाओं की नसबंदी करनी है. मुझे हर महीने में चार महिलाओं की नसबंदी करनी है.''

कुछ और डॉक्टरों के अनुसार उजबेकिस्तान के ग्रामीण इलाकों में तो डॉक्टरों को प्रत्येक सप्ताह आठ महिलाओं की नसबंदी करने के लिए कहा जाता है.

उजबेकिस्तान में एक गैर सरकारी संस्था चलाने वाली सुखरोब इस्माइलोव के अनुसार उन्होंने साल 2010 में सात महीने तक डॉक्टरों का सर्वेक्षण किया था और उस दौरान लगभग 80 हज़ार महिलाओं की नसबंदी के सबूत जमा किए थे.

उजबेकिस्तान में पहली बार 2005 में महिलाओं की जबर्दस्ती नसबंदी करने के मामले सामने आए थे जब अंदिजान शहर में काम करने वाली एक डॉक्टर गुलबखोर तुआरेव ने अपने अस्पताल के मुर्दाघर में जवान और स्वस्थ महिलाओं के ढेर सारे गर्भाशय पाए.

गुलबखोर ने इसकी छानबीन करने के बाद पाया कि लगभग 200 महिलाओं की जबर्दस्ती नसबंदी कर दी गई थी. लेकिन जब उन्होंने इस बारे में अपने वरिष्ठ अधिकारियों से पूछा तो उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया.

2007 में संयुक्त राष्ट्र की एक कमेटी ने भी पाया था कि उजबेकिस्तान में महिलाओं की जबर्दस्ती नसबंदी की जा रही है.

साल 2009 और 2010 में उजबेकिस्तान सरकार ने बाजाब्ता दिशा निर्देश जारी किए कि क्लिनिक के पास महिलाओं की स्वेच्छा से नसबंदी कराने के लिए सारी सुविधाएं होनी चाहिए.

लेकिन एक प्रांतीय अस्पताल के एक वरिष्ठ डॉक्टर ने अपना नाम ना छापने की शर्त पर बीबीसी को बताया कि कानूनी तौर पर तो नसबंदी महिलाओं की मर्जी से की जाती है लेकिन ज्यादातर मामलों में महिलाओं के पास कोई विकल्प नहीं होता है.

'आरोप बेबुनियाद'

इस बारे में उजबेकिस्तान सरकार ने लिखित रूप में अपनी प्रतिक्रिया देते हुए बीबीसी से कहा, ''जबर्दस्ती नसबंदी के आरोप में कोई सच्चाई नहीं है. महिलाओं की नसबंदी एक विशेषज्ञ की राय लेकर, महिलाओं की मर्जी और उनके माता-पिता के लिखित सहमति के बाद ही की जाती है.''

सरकार ने ये भी दावा किया कि माताओं और उनके नवजात शिशुओं की सुरक्षा के मामले में उजबेकिस्तान का रिकॉर्ड बहुत अच्छा है और ये दुनिया भर के देशों के लिए एक नमूना बन सकता है.

लेकिन सरकार के इन दावों के बीच 24 साल की गर्भवती महिला निगोरा की कहानी भी है.

इमरेजेंसी में निगोरा का सिजेरियन ऑपरेशन हुआ और एक दिन बाद उन्हें पता चला कि उनकी नसबंदी कर दी गई है और ठीक उसी दिन उनके नवजात बच्चे की मौत हो गई.

निगोरा अब कभी अपने बच्चे को जन्म नहीं दे सकेंगीं.

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