वेतन में मिल रहे हैं मुर्गे-मुर्गियां !

  • 14 अप्रैल 2012
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Image caption आलोचक कहते हैं कि सरकारी खर्चे में 'कटौती से लिए' मुर्गे बांटे जा रहे हैं

उज्बेकिस्तान के कुछ हिस्सों में अध्यापकों और डॉक्टरों को मेहनताने के तौर पर मुर्गी-मुर्गे दिए जा रहे हैं.

यह मुहिम पश्चिमी बुखारा क्षेत्र में चलाई जा रही है. स्थानीय अधिकारियों के मुताबिक वे तो एक निर्देष का पालन कर रहे हैं जिसका मकसद घरेलू पोल्ट्री उत्पादन को बढ़ावा देना है.

लेकिन आलोचकों का कहना है कि ऐसा बजट खर्चों को कम करने के लिए किया जा रहा है.

बीबीसी के मध्य एशिया संवाददाता रेयहान देमित्री के मुताबिक बुखारा क्षेत्र में सरकारी कर्मचारियों में लगभग 20 हजार मुर्गी-मुर्गे बांटे जा चुके हैं जिन्हें सर्बिया से मंगाया गया था.

अधिकारियों का दावा: खुश हैं लोग

कर्मचारियों के दिए जा रहे इन मुर्गी-मुर्गों की कीमत के बराबर उनकी वेतन से काट लिया जाता है.

Image caption उज्बेकिस्तान को दुनिया के गरीब मुल्कों में शुमार किया जाता है

स्थानीय अधिकारियों का दावा है कि लोग मुर्गी और मुर्गे पाकर बहुत खुश हैं क्योंकि उनसे उन्हें बहुत से अंडे मिल रहे हैं.

लेकिन एक शिक्षिका ने बताया कि उसकी एक रिश्तेदार को 10 मुर्गियां थमा दी गईं, जिनसे वह खासी परेशान है.

बेहद गरीब देश उज्बेकिस्तान के देहाती इलाकों में काम के बदले (पूरी तरह या आंशिक रूप से) खाना देने का चलन बहुत आम है.

राजधानी ताशकंद में किसी सरकार कर्मचारी का औसत मासिक वेतन 300 डॉलर (लगभग 15 हजार रुपए) है जबकि बाकी इलाकों में यह 100 डॉलर (लगभग पांच हजार रुपये) है.

नकदी की किल्लत

उज्बेकिस्तान में हाल के सालों में महंगाई के कारण नकदी की किल्लत रही है, जिससे निपटने के लिए अधिकारियों ने वेतन और पेंशन इलेक्ट्रॉनिक डेबिट खाते में भेजनी शुरू कर दी हैं.

लेकिन लोगों की शिकायत है कि इस तरह कार्ड से पैसा निकालना मुमकिन नहीं है.

आम तौर पर लोगों को खुले बाजारों में खरीददारी करने के लिए नोटों की जरूरत होती है, लेकिन नोट न होने के चलते लोगों को ऐसे महंगे सुपर मार्केट्स में जाना पड़ता है, जहां वे कार्ड के जरिए पैसे चुका सकें.

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