पानी है तो जहान है....

इकाल एंजेलेई
Image caption गोल्डमैन पुरस्कार से सम्मानित इकाल एंजेलेई

पहली नजर में इकाल एंजेलेई को देख कर नहीं लगता कि वह विद्रोही भी हो सकती हैं. युवा, शिष्ट और टी शर्ट पतलून में अपने आपको काफी सहज महसूस करने वाली.....

शायद यह कहावत सही है कि किसी किताब के बारे में उसके आवरण को देख कर ही राय नहीं बना लेनी चाहिए. यह केन्याई महिला भी एक ऐसा विरोध आँदोलन चला रही है जिसकी वजह से पूर्वी अफ़्रीका की एक महत्वपूर्ण बाँध परियोजना पर रोक लग सकती है.

उनकी इस मुहिम की वजह से एंजेलेई को इस वर्ष का गोल्डमैन पुरस्कार मिला है. यह जमीन से जुड़ी पर्यावरण गतिविधियों के लिए साल भर में दिये जाने वाले दुनिया के सबसे बड़े पुरस्कारों में से एक है.

इथियोपिया, दक्षिणी सूडान और युगांडा की सीमाओं से लगे केन्या के तुरकाना क्षेत्र में बहुत कम बारिश होती है और हाल के सालों में इसमें और कमी आई है.

इस इलाके का सबसे बड़ा जल संसाधन तुरकाना झील है. अब इथियोपियाई सरकार सीमा के निकट ओमो नदी पर एक बड़ बाँध बना रही है. तुरकाना झील का 80 फीसदी पानी इसी नदी से आता है.

दुनिया का चौथा सबसे बड़ा बाँध

240 मीटर ऊँचे इस बाँध से 1870 मेगावाट बिजली पैदा होगी. बनने के बाद यह अप्रीका का सबसे बड़ा और दुनिया का चौथा सबसे बड़ा बाँध बन जाएगा. प्रधान मंत्री मेलेस ज़नावी का कहना है कि इस बाँध को हर कीमत पर बनाया जाना चाहिए ताकु इथियोपिया की बिजली और सिचाई व्यवस्था बेहतर बन सके.

केन्याई सरकार भी जो इस परियोजना से बनी बिजली खरीदना चाहती है, इसका समर्थन कर रही है.

लेकिन इकाल एंजेलेई को डर है कि इस बाँध से तुरकाना झील के आसपास रहने वाले लाखों लोगों की जीवन रेखा सूख जाएगी. इसकी वजह से इसका जल स्तर कई मीटरों तक नीचे चला जाएगा और इसके आसपास रहने वाले लोगों को पानी की तलाश में दूसरे स्थानों पर जाना पड़ेगा.

एंजेलेई कहती हैं कि इसकी वजह से पूरे इलाके में संघर्ष के लिए और दबाव बनेगा. हाल ही में पड़े सूखे और बढ़ती आबादी की वजह से इस पूरे इलाके में संघर्ष की संभावनाएं और बढ़ गई हैं.

एंजेलेई इस परियोजना से मिलने वाले फायदों को कम करके नहीं आंकती, लेकिन वह इथियोपिया सरकार के उस दावे पर सवाल खड़े करती हैं कि इसका तुरकाना झील पर कोई असर नहीं पड़ेगा.

मछलियों पर असर

वह चाहती हैं कि इस सारे मामले पर खुली बहस हो जिसमें सभी मुद्दों को सामने रखा जाए. 2008 में उन्हे पता चला कि बहुत कम लोगों को इस बाँध के बारे में जानकारी है हाँलाकि इस पर काम शुरू हो चुका है. बहुतों को तो यह तक पता नहीं था कि बाँध क्या होता है.

उनका तर्क है कि सरकार आर्थिक कीमतों को समझे बगैर इस परियोजना के संभावित लाभों की तरफ ही देख रही है. किसी ने अभी तक यह जानने की कोशिश नहीं की है तुरकाना झील से पैदा होने वाली मछलियों की कीमत क्या है. न ही किसी का ध्यान इस ओर गया है कि अगर यह खत्म हो गई तो समाज को इसकी क्या कीमत चुकानी पड़ेगी.

इस बारे में भी सवाल उठाए जाने चाहिए कि क्या सूखे वाले इलाके में पनबिजली परियोजनाएं कारगर साबित हो सकती हैं.

एंजेलेई कहती हैं, ‘ हमारे प्रधान मंत्री ने दो वर्ष पूर्व कहा था कि हम जल बिजली पर निर्भर नहीं रह सकते- लेकिन अब हम इथियोपिया से पानी से बनने वाली बिजली खरीद रहे हैं जो कि केन्या से भी ज्यादा शुष्क देश है.’

संबंधित समाचार