छोटे बच्चों के मृत्यु दर में कमीः यूनिसेफ

Image caption बांग्लादेश, ब्राजील और वियतनाम में पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु में गिराबट आई है

दुनिया भर में पांच साल तक के बच्चों के मृत्यु दर में कमी आई है. यूनिसेफ और सेव द चिल्ड्रेन ने अपनी ताजा रिपोर्ट में कहा है कि वर्ष 1990 की तुलना में अब हर साल चालीस लाख बच्चे अधिक जिंदा रहते हैं.

ओवरसीज डेवलपमेंट इस्टीट्यूट ने अपने शोध के कहा है कि ऐसा इसलिए हो पाया है क्योंकि पूरी दुनिया में बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर चिंता बढ़ी है.

शोध में कहा गया है कि बच्चों में घट रहे मृत्यु दर के पीछे आर्थिक विकास और अच्छी प्रशासनिक नीतियां भी रही हैं और इसके चलते लोगों की जिन्दगी बेहतर हुई है.

यूनिसेफ और सेव द चिल्ड्रेन की रिपोर्ट में कहा गया है कि आर्थिक विकास दर और अच्छी प्रशासनिक नीतियों का असर सबसे ज्यादा ब्राजील, बंग्लादेश और वियतनाम के बच्चों पर पड़ा है.

एक चौथाई कमी

रिपोर्ट के अनुसार 2009 के दशक में पाँच करोड़ 60 लाख बच्चे स्कूल जा रहे थे. इसके अनुसार सब सहारा और अफ्रिका के देशों को सबसे ज्यादा आर्थिक सहायता मिलती है. इसलिए वहां के बच्चों का विकास सबसे बेहतर है.

सबसे चौंकाने वाले परिणाम कुपोषण के कारण बच्चों पर होने वाले मानसिक और शारीरिक प्रभाव पर पड़ा है.

इसमें वर्ष 1990 से 2008 की तुलना में जबर्दस्त गिरावट आई है.

दुनिया के 131 देशों के बच्चों को टिटेनस, खसरा और डिप्थिरिया जैसे संक्रामक रोगों से बचाने की बेहतर सुविधा उपलब्ध हुई है.

परिणामस्वरूप 1990 की तुलना में 2008 में इन बीमारियों से बच्चों के मृत्यु दर में एक चौथाई की कमी आई है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 1990 में 45 फीसदी लोग 63 रूपए प्रतिदिन पर जीवन यापन कर रहे थे, जो वर्ष 2005 में घटकर 27 फीसदी रह गई है.

हालांकि मध्य एशिया और कॉकसस के देशों, जिसमें यूरोप, उत्तरी अमेरिका, पश्चिमी एशिया के कुछ देश शामिल हैं, में थोड़ी गिराबट आई है.

'अच्छी नीति जरूरी'

रिपोर्ट के अनुसार जिन छह कारणों से बच्चों के मृत्यु दर में कमी आई है, उनमें-विदेशों से आर्थिक सहायता, सरकारों की प्रतिबद्धता और नेतृत्व कौशल, आर्थिक विकास और सामाजिक क्षेत्रों में पूंजी निवेश, जरूरतमंदों के लिए सोच-समझकर परियोजना की शुरुआत और प्रौद्योगिकी का बेहतरीन इस्तेमाल शामिल है.

सेव द चिल्ड्रेन का कहना है कि वैसे यह कहना काफी मुश्किल है कि सिर्फ आर्थिक सहायता मिल जाने से सकारात्मक परिवर्तन आने लगते हैं.

रिपोर्ट के अनुसार सकारात्मक परिवर्तन उस वक्त होता है जब आर्थिक विकास और अच्छी प्रशासनिक नीतियां एक साथ चलती हैं.