बंद मुट्ठी के पीछे क्या है?

  • 18 अप्रैल 2012
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नॉर्वे में 77 लोगों की मौत के मामले में अभियुक्त हैं आंद्रेस बेरिंग ब्रेविक. अब उनके खिलाफ मुकदमा भी शुरू हो गया है.

लेकिन बंद मुट्ठी से अपना सीना ठोंककर और फिर हवा में मुट्ठी लहराकर ब्रेविक ने एक संदेश देने की कोशिश की है. उनका मुस्कुराता चेहरा और फिर उनकी इस खास भाव-भंगिमा काफी कुछ इशारा करती है.

दुनियाभर की मीडिया में उनके इस इशारे का अर्थ ये निकाला गया कि कई लोगों की हत्या के इस अभियुक्त को अपने कृत्य पर कोई पछतावा नहीं है.

लेकिन ब्रेविक के इस अंदाज से मारे गए लोगों के परिजनों की स्मृति को और झटका लग सकता है. ऐसा इसलिए भी हो सकता है क्योंकि ब्रेविक ने राजनीतिक संघर्ष के संकेतों को अपनाया है.

ब्रेविक की भाव-भंगिमा वर्ष 1968 के ओलंपिक की याद दिलाती है, जब अमरीकी एथलीट टॉमी स्मिथ और जॉन कार्लोस ने काली आबादी के प्रति अमरीकी व्यवहार के विरोध में बंद मुट्ठी से अभिवादन किया था.

इतिहास

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Image caption ब्रेविक पर 77 लोगों की हत्या का आरोप है

चुनौती और एकता के प्रतीक के रूप में इस भाव-भंगिमा का लंबा इतिहास रहा है. ये आम तौर पर वामपंथी राजनीति और पीड़ित संगठनों के संघर्ष से जुड़ा रहा है.

मुट्ठी से जुड़े संकेतों का इस्तेमाल मजदूर संगठनों के शुरुआती प्रचार में देखा जा सकता था.

वर्ष 1917 के मशहूर प्रचार कार्टून में इसका इस्तेमाल हुआ था, जिसे अमरीका के एक ट्रेड यूनियन इंडस्ट्रियल वर्कर्स ऑफ़ द वर्ल्ड ने तैयार किया था.

लेकिन इस अंदाज को वर्ष 1936-39 में स्पेन के हुए गृह युद्ध के दौरान खूब लोकप्रियता मिली. उस दौरान फ्रैंको के राष्ट्रवादियों के खिलाफ संघर्ष कर रहे रिपब्लिकंस ने इस फासिस्ट विरोधी सैल्यूट का इस्तेमाल किया. इसे अभिवादन के रूप में इस्तेमाल किया जाता था और इससे इस अंदाज ने खूब लोकप्रियता बटोरी.

हालाँकि स्पेन के रिपब्लिकंस को हार का सामना करना पड़ा, लेकिन उनके सैल्यूट करने का तरीका यूरोप के वामपंथियों और फासिज्म विरोधियों ने अपना लिया.

उस समय से भींची हुई मुट्ठी में गुलाब का फूल सोशलिस्ट इंटरनेशनल का लोगो बना हुआ है, इससे ब्रिटेन की लेबर पार्टी भी जुड़ी हुई है. ब्रिटेन की लेबर पार्टी के अलावा यूरोप की कई सोशलिस्ट पार्टियाँ भी इससे जुड़ी हुई हैं.

संकेत

इसके अलावा बंद मुट्ठी कई सुधारवादी और अतिवादी संगठनों के संकेतों के रूप में जुड़ी हुई है.

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Image caption टॉमी स्मिथ ने 1968 ओलंपिक में विरोध का ये तरीका अपनाया था

1960 के दशक में अमरीका में नागरिक अधिकारों के लिए लड़ने वाले संगठनों की कट्टरपंथी इकाइयों और ब्लैक पैंथर्स पार्टी जैसे संगठनों से ब्लैक पावर सैल्यूट निकला.

वर्ष 1968 के ओलंपिक के दौरान इसे 'ब्लैक पावर' का संकेत माना गया. हालाँकि अमरीकी एथलीट टॉमी स्मिथ ने अपनी आत्मकथा में इस बात पर जोर दिया कि वो भाव-भंगिमा 'मानवाधिकार का अभिवादन' थी.

बंद मुट्ठी लहराने के अंदाज को व्यक्तिगत चुनौती के अलावा सामूहिक चुनौती के रूप में भी देखा गया. खासकर उस समय जब 1990 में नेल्सन मंडेला जेल से रिहा हुए.

मनोवैज्ञानिक ओलिवर जेम्स भींची हुई मुट्ठी को एक शक्तिशाली संकेत मानते हैं, जो प्रतिरोध, एकता, गर्व के साथ-साथ आक्रामकता का भी प्रतीक है और ये सब चीजें एक सामान्य सी भाव-भंगिमा से प्रकट हो जाती हैं.

हालाँकि ये भी देखने को मिलता है कि ऐसा अंदाज सिर्फ राजनीतिक नहीं होता, कई बार खिलाड़ी भी जीत के बाद ऐसी भाव-भंगिमा दिखाते हैं. टेनिस खिलाड़ी टिम हेनमैन इसका उदाहरण हैं.

लेकिन ब्रेविक के ऐसा करने पर एक बार फिर इस अंदाज की चर्चा तेज है. लेकिन ये पहला ऐसा मौका नहीं है कि कोई तथाकथित राजनीतिक हत्यारे ने ऐसी भाव-भंगिमा दिखाई है.

ली हार्वी ओसवाल्ड को जब राष्ट्रपति जॉन एफ केनेडी को गोली मारने के मामले में गिरफ्तार किया गया, तो उन्होंने भी फोटोग्राफरों के सामने ऐसी ही भाव-भंगिमा दिखाई थी.

कार्लोस द जैकाल के रूप में चर्चित इलिच रामीरेज सांचेज भी इसी तरह अपनी मुट्ठी लहराई थी.

ब्रेविक का अंदाज रोमन सैल्यूट की भी याद दिलाता है, जिसे मुसोलिनी के फासिस्ट प्रदर्शित करते थे. ब्रेविक की विचारधारा के मुताबिक उनका सैल्यूट 'मार्क्सवादी अत्याचारियों' के खिलाफ मजबूती, शक्ति और चुनौती का प्रतिनिधित्व करता है.

लेकिन मनोवैज्ञानिक ओलिवर जेम्स के लिए 1968 के ओलंपिक के समय अमरीकी एथलीटों की भाव-भंगिमा अब भी सर्वाधिक शक्तिशाली उदारहण बनी हुई है.

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