एक विद्रोही को जिंदा जलाया गया था :ब्रितानी दस्तावेज

  • 19 अप्रैल 2012

ब्रितानी औपनिवेशिक शासनकाल से जुड़े गुप्त दस्तावेजों के अनुसार लंदन में मंत्रियों को पता था कि कीनिया में माउ-माउ विद्रोहियों को कैसे प्रताड़ित किया गया और फिर उनकी हत्या की गई.

इसमें इस बारे में भी जानकारी दी गई है कि इस दौरान कैसे एक विद्रोही को जिंदा जला दिया गया था.

माउ-माउ विद्रोह वर्ष 1952 से वर्ष 1960 के बीच कीनिया में हुआ था. पूर्वी अफ्रीकी उपनिवेश में रह रहे गोरे लोगों के विरोध में छापामार अभियान चलाया गया था जिसका नाम माउ-माउ दिया गया था.

इस पर रोक लगाने के लिए ब्रितानी प्रशासन ने माउ-माउ अभियान के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के आदेश दिए थे.

अहम जानकारी

इन दस्तावेजों में कई तरह की जानकारियां दी गई है जिसमें बताया गया है कि कैसे साइप्रस में वर्ष 1955 में हिंसक विद्रोह को खत्म करने के लिए वहां एक नेता से बातचीत होने के बावजूद उन्हें सेशल्स निर्वासित करने की गुप्त योजना बनाई गई.

इन दस्तावेजों से पता चलता है कि ब्रिटेन ने बोत्सवाना में काफी जहरीली गैस के परीक्षण की योजना बनाई थी.

वर्ष 1943 में एयरक्राफ्ट प्रोडक्शन मंत्रालय ने इसका प्रस्ताव दिया था जिसमें बड़े पैमाने पर लोगों पर व्यवाहारिक तौर पर इसके इस्तेमाल का प्रस्ताव दिया गया था.

जो दस्तावेज जारी किए गए हैं उसमें अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा के पिता का भी नाम शामिल है.

सार्वजनिक

इसमें बताया गया है कि अमरीकी विदेश मंत्रालय ने ब्रितानी अधिकारियों को वर्ष 1959 में भेजे एक संदेश में चिंता जताई थी कि अमरीका में पढ़ रहे कीनियाई छात्र गलत हाथों में जा सकते हैं.

दस्तावेजों के अनुसार अमरीकी अधिकारियों ने ये शिकायत की थी कि कीनिया के छात्र अमरीका और गोरों के विरोधी होते जा रहे हैं. ओबामा के पिता भी उसी साल कीनिया से अमरीका पढ़ने गए थे.

इनमें हिंद महासागर के ब्रितानी क्षेत्र से चागौस द्वीपवासियों को निर्वासित करने की कोशिशों के बारे में बताया गया है.

आर्काइव के जो 1200 रिकॉर्ड जारी किए गए वो नवंबर 2013 में नेश्नल आर्काइव में सार्वजनिक तौर पर जारी किए जाएंगे.

ये आर्काइव 1930 से 1970 के बीच के है.

इन आर्काइव में पूर्व ऐडेन, एंगुला, बहामास, बसुतोलैंड (लेसोथो), बोत्सवाना, हिंद महासागर में ब्रितानी क्षेत्र, ब्रूनेई, साइप्रस, कीनिया, मलाया, सरावाक और सेशल्स क्षेत्रों के बारे में आधिकारिक दस्तावेज हैं.

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