अफगानिस्तान को अमरीका का आश्वासन

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Image caption क्लिंटन ने हाल में तालिबानी हमलों के दौरान अफगान बलों की भूमिका की सराहना की

अमरीका ने अफगानिस्तान को भरोसा दिलाया है कि वो 2014 में अमरीकी सैनिकों की वापसी के बाद उसे उसके हाल पर छोड़कर नहीं जाएगा.

ब्रसेल्स में नेटो की एक बैठक के दौरान अमरीकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने आश्वस्त किया कि अफगानिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा बल को पर्याप्त मात्रा में धन मुहैया कराया जाएगा.

ब्रसेल्स में चल रही दो दिवसीय बैठक में ये फैसला लिया जाना है कि 2014 के अंत में अफगानिस्तान से नेटो सेनाओं की वापसी के बाद सुरक्षा बलों के लिए धन कैसे मुहैया कराया जाएगा.

अफगान बलों की तारीफ

अफगानिस्तान में स्थानीय सेना सुरक्षा की जिम्मेदारी धीरे-धीरे खुद ले रही है और 2014 तक ये पूरी तरह से उसके हाथ में आ जानी चाहिए.

क्लिंटन ने कहा कि रविवार को काबुल में हुए तालिबान के हमले से ये स्पष्ट है कि धमकी के बावजूद स्थिति नियंत्रण में की जा सकती है.

उन्होंने कहा, “इन हमलों से पता चलता है कि खतरा अभी बना हुआ है लेकिन सेना की रवानगी जारी रखी जा सकती है. अफगान सुरक्षा बलों ने हमले पर जो प्रतिक्रिया दिखाई वो काफी प्रभावशाली थी और इसीलिए हमले नाकाम रहे. इसका मतलब ये है कि अफगान ये साबित कर रहे हैं कि वे भविष्य में स्थिति पर नियंत्रण रखने के लिए खुद को तैयार कर लेंगे.”

अमरीका इस कोशिश में भी लगा है कि दूसरे देश भी अफगानिस्तान को करीब 63 करोड़ डॉलर की सालाना मदद करें. अमरीका हर साल तीन अरब डॉलर की सहायता अफगानिस्तान को देता है.

अफगानिस्तान को दी जाने वाली सहायता के बारे में अंतिम सहमति अगले महीने शिकागो में होने वाली नेटो की बैठक में होगी.

वहीं अफगानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करजई ने अमरीका से सुरक्षा बलों के रख-रखाव के लिए दो अरब डॉलर सालाना की मदद का लिखित आश्वासन माँगा है.

साफ तस्वीर की दरकार

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Image caption नेटो सेनाएं 2014 के अंत तक अफगानिस्तान छोड़ देंगी

इस बीच नैटो के महासचिव एंडर्स फॉग रासमुसेन ने कहा है कि उन्हें उम्मीद है कि इस हफ्ते अफगानिस्तान में सुरक्षा बलों के लिए लंबे समय तक के लिए कोई विस्तृत कार्य योजना बन जाएगी.

वह कहते हैं, “मैं इस सम्मेलन में किसी ठोस घोषणा की उम्मीद नहीं करूंगा लेकिन ये उम्मीद जरूर करूंगा कि लंबे समय तक अफगान सुरक्षा बलों के लिए आकार, संरचना और खर्च के बारे में एक स्पष्ट तस्वीर सामने आए.”

बीबीसी के रक्षा मामलों के संवाददाता का कहना है कि अफगानिस्तान में गठबंधन सेना को एक रखना इस समय नेटो के सबसे कठिन कामों में से एक है.

मंगलवार को ऑस्ट्रेलिया ने घोषणा की थी कि वह तयशुदा समय से एक साल पहले यानि 2013 के अंत तक अफगानिस्तान से अपने सैनिकों को वापस बुला लेगा. इसके अलावा नेटो गठबंधन के अन्य देश- कनाडा, फ्रांस और नीदरलैंड भी अपने ज्यादातर सैनिकों को वापस बुला रहे हैं.

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