लड़ाई से विस्थापितों की संख्या ढाई करोड़ हुई

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Image caption सीरिया, लीबिया और यमन जैसे देशों में लड़ाईयों के कारण बड़ी संख्या में लोग विस्थापित हुए हैं

दुनिया भर में पिछले वर्ष लड़ाइयों के कारण विस्थापित होने वाले लोगों की संख्या बढ़कर ढाई करोड़ से अधिक हो गई है.

संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि इस तेजी का एक बड़ा कारण अरब देशों में हुआ विद्रोह रहा जिसे समाचारों में अरब स्प्रिंग कहा जाता रहा है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया भर में पिछले साल संघर्षों के कारण विस्थापित हुए लोगों की संख्या में 35 लाख की वृद्धि हुई.

इसके बाद अब लड़ाइयों के कारण विस्थापित हुए लोगों की संख्या बढ़कर दो करोड़ 60 लाख हो गई है.

इस आँकड़े में केवल देश के भीतर विस्थापित हुए लोगों को गिना गया है, ऐसे लोगों की गिनती नहीं की गई है जो दूसरे देशों में भाग गए हैं.

मध्य पूर्व के देशों में पिछले साल ट्यूनीशिया से लेकर सीरिया तक जनविद्रोहों के कारण नई लड़ाईयाँ शुरू हुईं.

अकेले मध्य पूर्व में आठ लाख लोगों को अपने घरों से भागना पड़ा.

लीबिया, यमन और सीरिया में स्थिति सबसे खराब थी.

इनके अलावा आइवरी कोस्ट और अफगानिस्तान में भी विस्थापित लोगों की संख्या में खासी बढ़ोत्तरी हुई.

और राहत एजेंसियों के लिए चिन्ता की सबसे बड़ी बात ये है कि विस्थापितों में से अधिकतर लोग कई वर्षों तक अपने घरों में नहीं लौट पाएँगे.

ऐसे में राहत सामग्रियों की कमी हो सकती है क्योंकि वो विस्थापितों के घर लौटने से पहले ही खत्म हो जा सकता है.

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