नॉर्वे से भारतीय बच्चे स्वदेश लौटेंगे

  • 23 अप्रैल 2012
Image caption नॉर्वे की बाल कल्याण संस्था को लगता था कि बच्चे अपने मां-बाप के पास खतरे में है

नॉर्वे की अदालत ने महीनों की कानूनी और कूटनीतिक खींचतान के बाद भारतीय मूल के दो बच्चों को उनके चाचा को सौंपने का आदेश दिया है.

बच्चों के पिता अनुरूप भट्टाचार्य ने बीबीसी से बातचीत में कहा " बच्चे मुझे नहीं मेरे भाई को मिल रहे हैं. कल अदालती कार्रवाई को समाप्त करने के बाद बच्चे मेरे भाई को सौंप दीए जाएगें."

इन बच्चों को 28 फरवरी को नौर्वे की बाल कल्याण संस्था ने उनके भारतीय मूल के माता पिता से ले लिया था. नॉर्वे की बाल कल्याण संस्था के अनुसार इन बच्चों के माता पिता इन्हें ठीक ढंग से नहीं रख रहे थे.

कई बार बनी बिगड़ी बात

मार्च में मीडिया में हंगामे के बाद किसी तरह से इन बच्चों को बाहर लाने की बात अंजाम पर पहुँचती दिख ही रही थी. लेकिन फिर इन बच्चों के माता पिता के बीच कथित तौर पर खराब दाम्पत्य संबंधों की खबर सामने आ गई.

इसके बाद नॉर्वे की बाल कल्याण सेवा (सीडब्लूएस) ने बच्चों को उनके चाचा को भी सौंपने से इनकार कर दिया था.

संस्था का कहना था कि ऐसा उसने बच्चों के परिवार में घरेलू विवाद को देख कर किया है.

स्थानीय बाल कल्याण अधिकारियों का कहना था कि भारतीय बच्चों के माता पिता उनका अच्छा ख्याल नहीं रख रहे थे. बच्चों के माता पिता, अनुरूप और सागरिका भट्टाचार्य इस आरोप से इनकार करते रहे हैं.

'सांस्कृतिक अंतर'

जब बाल कल्याण सेवा ने बच्चों को लिया था, तब माता पिता ने कहा था कि नॉर्वे को बच्चों से ज्यादती होती इसलिए लग रही है क्योंकि भारत और नॉर्वे के बीच "सांस्कृतिक अंतर" है.

तीन साल के अभिज्ञान और एक साल की ऐश्वर्य को नॉर्वे के बच्चों की देखरेख करने वाली एक संस्था में भेज दिया गया था. नॉर्वे की बाल कल्याण संस्था को लगता था कि बच्चे अपने मां-बाप के पास खतरे में है.

ये मामला भारत और नॉर्वे के बीच कूटनयिक विवाद बन गया था जिसमें भारत की मांग थी कि बच्चों को अपने देश की संस्कृति और माहौल में पलने-बढ़ने का मौका दिया जाना चाहिए.

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