हिटलर की पुस्तक 'माइन कम्फ' फिर प्रकाशित होगी

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Image caption 1945 से पहले माइन कम्फ की एक करोड़ प्रतियाँ बिक चुकी थीं

द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद पहली बार जर्मनी में एडोल्फ हिटलर की आत्मकथात्मक पुस्तक 'माइन कम्फ' के प्रकाशन की तैयारी चल रही है.

जर्मनी के बवेरिया प्रांत ने इस पुस्तक का कॉपी राइट ख़त्म होने से पहले, वर्ष 2015 में इसे प्रकाशित करने का फ़ैसला किया है.

हालांकि जर्मनी में इस पुस्तक का प्रकाशन कानूनी रुप से प्रतिबंधित नहीं है लेकिन कॉपी राइट या प्रकाशन के अधिकार होने के नाते बवेरिया ने वर्ष 1945 के बाद से इसका कोई संस्करण प्रकाशित नहीं किया है.

नियमानुसार हिटलर की मौत के 70 वर्ष होने के बाद यानी वर्ष 2015 के बाद इस पुस्तक पर से प्रकाशन का एकाधिकार या कॉपी राइट ख़त्म हो जाएगा.

बवेरिया राज्य का कहना है कि वह छात्रों के लिए एक संस्करण प्रकाशित करने की योजना बना रहा है लेकिन इसके साथ एक आलोचनात्मक व्याख्या भी प्रकाशित की जाएगी.

'माइन कम्फ़' यानी मेरा संघर्ष नाम के इस पुस्तक को हिटलर ने 1924 में लिखी थी जब वो तख्तापलट की कोशिशों के आरोप में जेल की सजा काट रहे थे.

'उबाऊ' पुस्तक

आंशिक आत्मकथा, आंशिक रुप से राजनीतिक और नस्लीय बड़बोलेपन से भरी ये पुस्तक मूल रुप से नाजी आदर्शों को रेखांकित करती है.

हालांकि इस पुस्तक का प्रकाशन द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से नहीं हुआ है लेकिन वर्ष 1945 से पहले इसकी एक करोड़ प्रतियाँ बिक चुकी थीं.

इस पुस्तक का कई भाषाओं में अनुवाद हो चुका है और ये इंटरनेट पर भी उपलब्ध है.

वर्ष 1933 में हिटलर के सत्ता में आने के बाद से हर विवाह में ये पुस्तक नवविवाहित जोड़े को नाज़ी शासन की ओर से भेंट में दी जाती थी.

बर्लिन में बीबीसी के संवाददाता स्टीफ़न इवान्स का कहना है कि इटली का फासीवादी तानाशाह बेनितो मुसोलिनी सहित बहुत से लोगों को ये पुस्तक उबाऊ लगी.

बवेरिया राज्य के वित्तमंत्री मार्कस सोएडर का कहना है कि पुस्तक के प्रकाशन का फ़ैसला इस पुस्तक के प्रकाशन का फ़ैसला इसकी वकालत और विरोध कर रहे दोनों से चर्चा के बाद लिया गया है.

उनका कहना है कि इस पुस्तक का एक बार फिर प्रकाशन का उद्देश्य इस पर पड़े रहस्य को ख़त्म करना है.

उन्होंने कहा, "हम स्पष्ट करना चाहते हैं कि इसमें कैसी निरर्थक बातें लिखी हुई हैं और इस तरह के ख़तरनाक विचारों ने किस तरह पूरी दुनिया में विपदाएँ पैदा कीं."

माना जा रहा है कि कॉपी राइट का प्रावधान ख़त्म होने से पहले इस पुस्तक का संस्करण प्रकाशित करके राज्य सरकार ये सुनिश्चित करना चाहती है कि इसके बाद इस पुस्तक का प्रकाशन व्यावसाय की दृष्टि से आकर्षक न बचे.

वर्ष 2016 के बाद से इस पर से कॉपी राइट ख़त्म हो जाएगा और इसके बाद कोई भी इसके प्रकाशन के लिए स्वतंत्र होगा, बशर्ते इससे समाज में किसी तरह की नस्लीय घृणा की भावनाएँ न फैलें.

जर्मनी में यहूदियों के केंद्रीय परिषद के अध्यक्ष डाइटर ग्रॉमैन का कहना है कि वे चाहेंगे कि जर्मनी के लोग व्याख्या सहित इस पुस्तक को पढ़ सकें.

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