क्या किशोरों को पोर्न साइट्स देखने से रोक सकते हैं?

सांसदों ने चेतावनी दी है कि बच्चों के लिए इंटरनेट पर अश्लील सामग्री या पोर्न साइट्स देखना बहुत आसान है. लेकिन क्या बच्चों से बचाने के लिए इंटरनेट को नियंत्रित किया जा सकता है?

और क्या ऐसा किया जाना चाहिए?

इंटरनेट की आजा़दी के पक्षधर जिम किलोक

Image caption 'कंप्यूटर पर ऐसे सॉफ्टवेयर लगवाए जाने चाहिए ताकि बच्चों को अश्लील साहित्य देखने से बचाया जा सके'

इंटरनेट को फिल्टर करना एक तरीके का सेंसरिशप है और ऐसा करना आसान नहीं है. और ये भी एक अजीब तर्क है कि सरकार को पता है कि क्या बेहतर है.

अगर इंटरनेट पर फिल्टर लगाए जाते हैं कि ऐसी बहुत सी चीजें जो वयस्क देखना चाहते हैं – जैसे राजनीतिक ब्लॉग या फिर सेंसरशिप विरोधी वेबसाइटें – वो नहीं देख सकेंगे.

जैसे अगर बीबीसी के किसी पन्ने पर ‘सेक्स’ शब्द का तीन बार प्रयोग होता है तो उस पर रोक नहीं लगेगी, लेकिन किसी दूसरी ऐसी वेबसाइट पर जिसके बारे में लोगों को बहुत ज्यादा नहीं पता है, वहाँ अगर ऐसा ही होता है ति उस पर रोक लग जाएगी.

माता-पिता को अपने बच्चों की मदद करनी चाहिए और कंप्यूटर पर ऐसे सॉफ्टवेयर लगवाने चाहिए ताकि बच्चों को अश्लील साहित्य देखने से बचाया जा सके.

सेक्स पर लिखने वाली लेखिका ब्रुक मैग्नांटी

Image caption लेखिका ब्रुक मैग्नांटी के मुताबिक बाजार में बहुत अच्छा खासा उचित अश्लील साहित्य भी उपलब्ध है जिसे लोग पैसा देकर खरीद रहे हैं

आम तौर पर ये माना जाता है कि अश्लील साहित्य बुरी चीज़ है और हमें इस बारे में कुछ करना चाहिए. लेकिन अभी ये साफ़ नहीं है कि ये बुरे परिणाम क्या हैं. क्या इसके कारण बच्चे कम उम्र में ही यौन संबंध स्थापित कर लेते हैं?

सच्चाई ये है कि बच्चों में पहली बार यौन संबंध स्थापित करने की उम्र स्थिर हो गई है. और ऐसे बच्चे जो यौन संबंध स्थापित करते हैं उनकी संख्या में भी कमी आई है.

लेकिन ये जिम्मेदारी माता-पिता की है कि वो बच्चों को सही राह पर लाएं.

इंटरनेट के आने से अश्लील साहित्य जिस तरीके से लोगों के सामने परोसा जाता है, उसमें बदलावा आया है. लेकिन मुझे नहीं लगता है कि अश्लीलता के विषय वस्तु में कोई खासा बदलाव आया है.

बाजार में बहुत अच्छा खासा उचित अश्लील साहित्य भी उपलब्ध है जिसे लोग पैसा देकर खरीद रहे हैं.

ये कहना कि अश्लील साहित्य के कारण कम उम्र की लड़कियाँ जल्द यौन संबंध स्थापित करना चाहती हैं, ये पुरानी सोच है. अश्लील साहित्य अभी तक बचा हुआ है क्योंकि इसका विकास हुआ है. जो चीज़ 10 साल पहले अश्लील लगती थी, अब वो अश्लील नहीं लगती.

सोनिया लिविंगस्टोन, प्रोफेसर, लंदन स्कूल ऑफ़ इकोनामिक्स

Image caption प्रोफेसर सौनिया लिविंगस्टोन कहती हैं कि अश्लीलता यौन शिक्षा का हिस्सा नहीं है

मीडिया में ऐसी धारणा है कि सभी नवयुवक और युवतियाँ इंटरनेट पर अश्लील वीडियो देखते हैं, लेकिन मेरे सर्वे से ऐसे संकेत मिलते हैं कि नौ से 16 साल के बच्चों की करीब एक-चौथाई आबादी ने अश्लील चित्र देखे हैं और इनमे से करीब 11 प्रतिशत ने ही वेबसाइटों पर ऐसे चित्र देखे हैं.

लेकिन ये बात जरूर चिंता का विषय है कि अश्लील वीडियो या साहित्य देखने पर कम उम्र की लड़कियों पर ऐसा दबाव ज़रूर पड़ता है कि वो मुख-मैथुन करें. लड़कियों पर इस बात का भी दबाव रहता है कि यौन क्रिया के दौरान वो कैसा प्रदर्शन करती हैं.

लेकिन इसके लिए आप इंटरनेट को दोष नहीं दे सकते हैं. अश्लील वीडियो और तस्वीरों का लड़कों पर भी असर पड़ता है.

अश्लीलता यौन शिक्षा का हिस्सा नहीं है और हम कई बार माता-पिता और अध्यापक इस बारे में बात करने से कतराते हैं.

व्यक्तिगत स्वास्थ्य और सामूहिक शिक्षा की कक्षाओं में इंटरनेट पर अश्लीलता जैसे विषयों को बहस करना सही और न्यायसंगत होगा.

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