नेपाल में शिक्षा के लिए मिले अरबों रुपयों का अता पता नहीं

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Image caption विदेशी दानदाता नेपाल में शिक्षा के लिए दी जाने वाली अपनी मदद की समीक्षा करेंगे

नेपाल में शिक्षा के लिए दी गई अरबों रुपये की रकम का कोई अता पता नहीं है.

नेपाली शिक्षा मंत्रालय के मुताबिक ये रुकी हुई रकम अब तक 20 अरब नेपाली रुपये तक पाई गई है. इसमें एक बड़ा हिस्सा उस रकम का भी हो सकता है जो दानदाताओं की तरफ से दी गई.

अधिकारियों का कहना है कि इस रकम में से अच्छे खासे हिस्से के बारे में कभी पता भी नहीं लगाया जा सकता क्योंकि वह 1950 के दशक से जुड़ी है.

'बही-खाते दुरुस्त हों'

नेपाली शिक्षा मंत्रालय के बड़े अधिकारी योगराज पोखारेल ने बताया, “जब तक हम संस्थागत खामियों को दूर नहीं करेंगे, तब तक इस समस्या से निपटना मुश्किल होगा.”

उनका कहना है कि सरकार को उस रकम के बारे में चर्चा छोड़ देनी चाहिए जिसका अब कोई हिसाब किताब पेश नहीं किया जा सकता.

लेकिन महालेखा परीक्षक के अनुसार इस तरह की रुकी हुई रकम में हर साल 10 फीसदी के हिसाब से इजाफा हो रहा है. इसी साल शिक्षा मंत्रालय की यह बकाया रकम तीन अरब नेपाली रुपये के आसपास है.

नेपाली के शिक्षा बजट में 22 फीसदी का योगदान करने वाले विदेशी दानदाता सरकार पर दबाव बना रहे हैं कि वह अपने बहीखातों को दुरुस्त करे. इन नौ दानदाताओं में ब्रिटेन का अंतरराष्ट्रीय विकास विभाग (डीएफआईडी) भी शामिल है.

यह अभी साफ नहीं है कि बिना हिसाब वाली इस रकम में विदेशी दानदाताओं की मदद का कितना हिस्सा है.

वित्तीय अनुशासनहीनता

नेपाल के शिक्षा मंत्रालय को मदद जुटाने के लिए विश्व बैंक के साथ काम कर रहे एक अधिकारी ने बताया, “यह पैसा कहीं खोया नहीं है, लेकिन उसका हिसाब किताब रखने की व्यवस्था लचर है.” वह कहते हैं कि हाल के सालों में लचर वित्तीय प्रबंधन को सुधारने की कोशिशें हुई हैं, फिर भी चीजें नहीं बदली हैं.

अगले हफ्ते दानदाता नेपाल के शिक्षा मंत्रालय को दी जाने वाली अपनी मदद की सालाना समीक्षा के लिए बैठक कर रहे हैं. उसमें फिर से यह मुद्दा उठने की उम्मीद है.

सहायक महालेखा परीक्षक महादत्ता तिमिलसीना कहते हैं कि जब तक सरकार इस रकम का हिसाब किताब रखे जाने की व्यवस्था को दुरुस्त नहीं करेगी, तब तक वित्तीय अनुशासनहीनता की संस्कृति को बदला नहीं जा सकता.

10 साल तक चले गृह युद्ध के बाद नेपाल अब बदलाव के तौर से गुजर रहा है. ऐसे में लोकतांत्रिक जवाबदेही की कमी के कारण देश में भ्रष्टाचार तेजी से फैल रहा है. भ्रष्टाचार के मामले में नेपाल 183 देशों की सूची में 153वें स्थान पर आता है.

हिसाब किताब से परे रहने वाली इस रकम का बढ़ना भ्रष्टाचार और वित्तीय अनुशासनहीनता को बढ़ावा मिल रहा है.

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