ओसामा पर ओबामा, रोमनी आमने-सामने

ओसामा बिन लादेन का घर इमेज कॉपीरइट AFP
Image caption दो मई 2011 को पाकिस्तान में हुई अमरीकी सैनिक कार्रवाई में ओसामा मारे गए

अमरीका में इस साल नवंबर में होने वाले राष्ट्रपति पद के चुनावों में एक साल पहले ओसामा बिन लादेन के मारे जाने का मामला महत्वपूर्ण राजनीतिक मुद्दा बन गया है.

इस मामले में जहाँ ओबामा की टीम 'फ्रंट फुट' आक्रामक ढंग से इसे भुनाने में जुटी है वहीं रिपब्लिकन पार्टी 'बैक फुट' पर ओसामा पर अपने पिछले बयानों का बचाव करती नजर आ रही है. राष्ट्रपति बराक ओबामा इस कामयाबी को अपने सर का ताज बनाने में लगे हैं. विपक्षी रिपब्लिकन पार्टी के उनके प्रतिद्वंदी मिट रोमनी उन पर आरोप लगा रहे हैं कि जिस मुद्दे से सभी अमरीकियों की भावनाएँ जुड़ी हैं, उस मुददे पर भी ओबामा राजनीति कर रहे हैं.

कितना फायदा होगा?

लेकिन बराक ओबामा को चुनावों में इस मुददे पर कितना फ़ायदा हो सकता है ?

ब्रिटेन में पाकिस्तान के पूर्व राजदूत अकबर अहमद अब वॉशिंग्टन स्थित अमेरिकन यूनिवर्सिटी में प्रोफ़ेसर हैं.

अकबर अहमद कहते हैं,“अमरीका में आम तौर पर रिपब्लिकन पार्टी के लोग मानते हैं कि वे अमरीकी सुरक्षा के मामलों में सबसे सख्त कदम उठाते हैं. इस मामले में वे डेमोक्रेटिक पार्टी को कमज़ोर मानते हैं. अब जब ओबामा के आदेश पर ओसामा बिन लादेन को पाकिस्तान में घुस कर मार डाला गया, तो बराक ओबामा ने स्पष्ट किया कि वे अमरीकी सुरक्षा के मामले में काफी कड़े कदम उठाने की काबिलियत रखते हैं. इससे रिपब्लिकन पार्टी के उस तर्क की हवा निकल गई है.”

बराक ओबामा की चुनाव प्रचार प्रबंधक अमरीकियों को टेलीवीज़न चैनलों पर एक चुनावी विज्ञापन के ज़रिए यह याद दिला रहे हैं कि अमरीका के सबसे बड़े दुश्मन ओसामा बिन लादेन को मारने का कौन ज़िम्मेदार है.

इस विज्ञापन में ओसामा को मारने के फैसले के बारे में पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन को बराक ओबामा की भरपूर सराहना करते दिखाया गया है.

'ओसामा मारे भी गए तो क्या?'

इसी विज्ञापन में मिट रोमनी का 2007 का बयान भी शामिल है जिसमें वो कह रहे हैं, "यदि बिन लादेन मारा भी जाता है तो अमरीकी लोग अधिक सुरक्षित तो नहीं हो जाएंगे...और एक व्यक्ति को पकड़ने के लिए करोड़ों डॉलर खर्च करना कहां की समझदारी है."

बराक ओबामा के इस टी वी विज्ञापन के ज़रिए वोटरों को यह समझाने की कोशिश की जा रही है कि अगर मिट रोमनी राष्ट्रपति होते तो संभवत: वे ओसामा बिन लादेन को मारने का फ़ैसला न लेते.

रिपब्लिकन पार्टी और मिट रोमनी ने बराक ओबामा द्वारा बिन लादेन मुद्दे को इस प्रकार चुनावी विज्ञापन में प्रयोग करने की निंदा की है. उनका कहना है कि ऐसे संवेदनशील मुद्दे को इस तरह चुनाव प्रचार में इस्तेमाल नहीं करना चाहिए क्योंकि इससे सभी अमरीकी एकजुट हुए थे.

मिट रोमनी की प्रवक्ता एंड्रिया सौल ने कहा,“बराक ओबामा की टीम इस मुददे को चुनाव प्रचार में शामिल करके ओबामा प्रशासन की नाकामियों से अमरीकी जनता का ध्यान हटाना चाहती है.”

लेकिन संयुक्त राष्ट्र की पूर्व अधिकारी भारतीय मूल की डॉक्टर स्वदेश राना कहती हैं,“जो अमरीकी लोग आर्थिक मंदी, बेरोज़गारी जैसे अहम मुद्दों पर बराक ओबामा से सहमत नहीं हैं, वो ओसामा बिन लादेन को मार लेने भर से अपना वोट बदलने वाले नहीं हैं. मतलब यह कि और भी गम हैं ज़माने में ओसामा के सिवा...”

कई अन्य जानकारों का मानना है कि ओसामा बिन लादेन को मार देने का फ़ायदा बराक ओबामा को भले मिल जाए लेकिन अगले अमरीकी राष्ट्रपति को अफ़गानिस्तान के मामले में कड़े फैसले लेने पड़ सकते हैं.

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