तेल, ओबामा और चुनाव

तेल इमेज कॉपीरइट AFP
Image caption जैसे-जैसे पेंसिलवेनिया, टेक्सस और नॉर्थ डकोटा में उर्जा कंपनियाँ नए नए भंडार खोज रही हैं, एक जबरदस्त संभावना जन्म ले रही है

दुनिया में अमरीका को एक ऐसे देश के तौर पर देखा जाता है जो विदेशी तेल पर पूरी तरह निर्भर है. ये तेल ही है जिसके कारण अमरीका की महंगी जीवनशैली चलती है.

जैसे जैसे राष्ट्रपति पद के चुनाव के लिए प्रतिदंदता बढ़ेगी, उर्जा पर अमरीका की निर्भरता एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन कर उभरेगा.

दशकों से अमरीकी नेताओं की कोशिश रही है कि किस तरह विदेशी तेल पर निर्भरता खत्म की जाए.

आखिरकार लगता है कि ये सपना जल्द ही सच होगा. इसका श्रेय जाता है कि विवादित तकनीक हाइड्रॉलिक फ्रैकिंग को.

इस तकनीक की मदद से अमेरिकी कंपनियाँ देश के कोने-कोने से बड़ी मात्रा में कुओं से तेल और गैस निकाल रही हैं.

अब समस्या ये है कि इतना तेल और गैस निकाला जा चुका है कि उसे रखने के लिए गोदामों की कमी हो गई है.

लेकिन साथ ही तेल की खपत और आपात में भी कमी आई है. ये एक असाधारण कहानी है.

अमरीका के पेंसिलवेनिया राज्य में एक जगह पर धीरे धीरे तेल को निकाला जा रहा था.

तेल का ये कुँआ उन छह कुँओं में से है जिसे कंसोल एनर्जी ने खरीदा हुआ है. पीटर निकोल कंपनी के इंजीनियर हैं.

वो हमें तेल और गैस के भंडार के बारे में बताते हैं.

जैसे जैसे पेंसिलवेनिया, टेक्सस और नॉर्थ डकोटा में उर्जा कंपनियाँ नए नए भंडार खोज रही हैं, एक जबरदस्त संभावना जन्म ले रही है.

आत्मनिर्भरता

फिल वर्लेगर उर्जा के बाजार का दशकों से विश्लेषण करते रहे हैं.

वो कहते हैं, “उर्जा के नए श्रोतों के अविष्कार के साथ उम्मीद है कि वर्ष 2023 तक अमरीका उर्जा में आत्मनिर्भरता हासिल कर लेगा. मैने 2023 को इसलिए चुना क्योंकि वर्ष 1973 में राष्ट्रपति निक्सन ने उर्जा आत्मनिर्भरता की बात की थी.”

लेकिन रिचर्ड निक्सन की बातों के बाद भी विदेशी उर्जा पर अमरीका की निर्भरता तेज़ी से बढ़ी थी. लेकिन अब तेल की खपत घट रही है और उत्पादन बढ़ रहा है.

पीएफसी एनर्जी के रॉबिन वेस्ट कहते हैं कि इस गतिविधि के पूरी अर्थव्यवस्था पर बड़े नतीजे होंगे.

उनका कहना है, “अमरीका में बिजली के दाम यूरोप और जापान से बहुत कम होंगे. अमरीका में उद्योग और उपभोक्ताओं को इससे दूसरे देशों के साथ प्रतिस्पर्धा में बहुत मदद मिलेगी और उन्हें आर्थिक फायदा होगा.”

लेकिन पेंसिलवेनिया राज्य को इस बदलाव के लिए कीमत चुकानी पड़ी है. पिछले 200 सालों से यहाँ कोयले, तेल और गैस के लिए खनन हुआ है.

पैट्रिक ग्रंटर पर्यावरण कार्यकर्ता हैं.

वो कहते हैं, “गैस निकालने की तकनीक जिसे फ्रेकिंग कहा जाता है विवादित है.”

लेकिन पर्यावरण और सेहत पर होने वाले असर के अलावा अगर बात करें तो तेल और गैस की इतनी बड़ी मात्रा में उपलब्धता से और क्या असर होंगे?

डेनियल कामम कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय में उर्जा के प्रोफेसर हैं.

वो कहते हैं कि इतनी प्रचुर मात्रा में उर्जा की उपलब्धता से साफ उर्जा के स्रोतों को ढूँढने में मदद मिलेगी.

उधर कोंसोल में मीडिया की देखरेख करने वाली लिन सी कहती हैं कि भविष्य बहुत साफ़ है.

वो कहती हैं कि तेल, गैस पर अमरीका की निर्भरता इतनी जल्द कम नहीं होगी.

राष्ट्रपति पद के लिए होने वाले चुनाव में बराक ओबामा के पक्ष में जारी विज्ञापनों में कहा जा रहा है कि उन पर तेल औऱ गैस कंपनियों की ओर से इसलिए हमला किया जा रहा है क्योंकि उन्होंने इन कंपनियों के टैक्सों को बढ़ाने की बात की है.

आज की दुनिया में कोई भी देश पूरी तरह आत्मनिर्भर नहीं हो सकता. सभी देश एक दूसरे पर निर्भर हैं. लेकिन उर्जा पर आत्मनिर्भरता हासिल कर पाना अमरीका के महत्वपूर्ण है.

संबंधित समाचार