भारत में अभी नहीं दिखेंगे चीते

  • 9 मई 2012
चीता, बीबीसी हिंदी समाचार इमेज कॉपीरइट caters news agency
Image caption इस समय पूरी दुनिया सबसे ज्यादा चीता अफ्रीका के जंगलों में पाया जाता है.

चीतों को भारत में एक बार फिर बसाने की सरकार की योजना पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है. चीतों के बड़ी तादाद में शिकार किए जाने की वजह से भारत से ये जानवर सौ साल पहले ही लुप्त हो गए थे.

कुछ वन्य जीव जानकारों ने इस योजना पर सवाल उठाया था और कहा था कि इसे ‘ठीक तरीके के समझा ही नहीं गया हैं.’ इसी के बाद सुप्रीम कोर्ट का ये निर्देश आया है.

इससे पहले सरकार ने वन्यजीव संरक्षण संस्थानों की सलाह पर मध्यप्रदेश और राजस्थान में दो अभ्यारण्य बनाने की मंज़ूरी दे दी थी. इन अभ्यारण्यों को चीतों के लिए संभावित निवास के तौर पर तैयार करने की योजना थी.

खबरों कि मुताबिक चीतों को अफ्रीका से मंगवाकर इन अभ्यारण्यों में रखे जाने की योजना बनाई थी.

वरिष्ठ वकील पीएस नरसिम्हा ने अदालत में कहा कि चीता को दोबारा यहां लाकर बसाने के प्रस्ताव को राष्ट्रीय वन्यजीव परिषद के साथ बगैर चर्चा किए तय किया गया था.

राष्ट्रीय वन्यजीव परिषद भारत में वन्यजीव कानून को लागू करने के लिए बनाई गई एक संवैधानिक संस्था है.

मूल असमानता

पीएस नरसिम्हा के अनुसार, ''चीतों के अफ्रीकी और एशियाई नस्लों में काफी फर्क होता है. दोनों आनुवांशिक और स्वाभाविक रूप से बिल्कुल अलग हैं.''

पी एस नरसिम्हा ने कोर्ट को बताया कि चीता को दोबारा बसाने की योजना, अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ के जंगली जानवरों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने के नियमों के विरुद्ध है.

शिकार की वजह से एशियाई चीते भारत के जंगलों से दशकों पहले खत्म हो चुके हैं.

पर्यावरण सरंक्षकों के अनुसार लुप्त हो रहे एशियाई चीतों की उपजाति के 100 से भी कम सदस्य फिलहाल ईरान के केंद्रीय जंगलों में पाए जाते हैं.

पूरी दुनिया में इस समय सबसे ज़्यादा चीतों की संख्या अफ्रीका के जंगलो में है, जहां अब भी करीब 10,000 चीते पाए जाते हैं.

चीतों को दोबारा बसाने की योजना के आलोचकों का मानना है कि जब तक हम इन लुप्तप्राय जानवरों के प्राकृतिक आवास और उनके शिकार की जगह को पहले जैसा नहीं बनाएंगे तब तक चीतों की गिनती में वृद्धि नहीं होगी.

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