जगन के मीडिया समूह पर कार्रवाई से पत्रकार सड़कों पर

  • 10 मई 2012
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Image caption सीबीआई ने जगनमोहन रेड्डी के मीडिया समूह के सभी दस खाते सील कर दिए हैं.

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की ओर से लोकसभा सदस्य और वाईएसआर कांग्रेस के अध्यक्ष जगनमोहन रेड्डी के समाचार पत्र और टीवी चैनल के बैंक खातों को ज़ब्त करने से आंध्र प्रदेश में बवाल खड़ा हो गया है.

कुछ लोग इसे राजनैतिक उद्देशों से प्रेरित कदम के रूप में देख रहे हैं तो कुछ पत्रकारिता की आज़ादी पर हमले के रूप में.

सीबीआई ने समाचार पत्र साक्षी और उसी नाम से टीवी चैनल चलाने वाली तीन कंपनियों- जगती पब्लिकेशंस, इंदिरा टेलीविज़न और जननी इन्फ्रास्ट्रक्चर के ऐसे दस बैंक खातों को ज़ब्त किया है, जिनमें 113 करोड़ रुपए जमा हैं.

आय से अधिक संपत्ति

जगनमोहन रेड्डी पर आमदनी से ज्यादा संपत्ति रखने और कथित तौर पर भ्रष्ट तरीके से दौलत जमा करने की जांच कर रही सीबीआई ने दावा किया है कि बैंक खातों में आपराधिक गतिविधियों द्वारा मिला पैसा रखा गया है.

इन कंपनियों ने सीबीआई की इस कारवाई को अदालत में चुनौती दी है और बैंक खातों को बहाल करने की मांग की है.

दूसरी तरफ जगनमोहन रेड्डी ने आरोप लगाया है कि राजनैतिक स्तर पर सामना करने में असफल कांग्रेस पार्टी उन्हें कुचलने के लिए सीबीआई का दुरूपयोग कर रही है.

जगनमोहन रेड्डी और कांग्रेस के बीच टकराव उस समय से चल रहा है जब 2009 में उनके पिता और तत्कालीन मुख्यमंत्री वाईएस राजशेखर रेड्डी की हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी. पिता की जगह मुख्यमंत्री न बनाए जाने से नाराज़ जगन ने कांग्रेस से निकलकर अपनी अलग पार्टी बना ली.

कांग्रेस के लिए चुनौती

उसी समय से सीबीआई जगनमोहन रेड्डी की संपत्ति में आश्चर्यजनक वृद्धि और उनकी कंपनियों में कई सौ करोड़ रुपये की पूँजी निवेश की जांच कर रही है. जबकि दूसरी ओर वाईएसआर कांग्रेस पार्टी, सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी है.

सीबीआई अब तक जगन मोहन रेड्डी और उनकी कंपनियों के विरुद्ध तीन आरोप पत्र दाखिल कर चुकी है जिसमें उन पर भ्रष्ट तरीके से संपत्ति जमा करने का आरोप लगाती है.

सीबीआई का कहना है कि जगन की कंपनियों में उन्हीं लोगों ने पैसा लगाया है जिन्हें जगन के पिता की सरकार के फैसलों से लाभ पहुंचा था. आरोप के अनुसार जिन कंपनियों में इस तरह का पैसा लगा है उनमें जगती पब्लिकेसंस भी शामिल है.

मीडिया है मुद्दा

लेकिन अब मामला पत्रकारों से जुड़ गया है इसलिए अब ये मामले पत्रकारों और सरकार के बीच टकराव का रूप धारण करता दिखाई दे रहा है.

आंध्र प्रदेश यूनियन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स और इंडियन जर्नलिस्ट्स यूनियन (इजेयू) के आह्वान पर आज हैदराबाद और राज्य के अनेक नगरों में सैंकड़ों पत्रकारों ने जुलूस निकाले और सीबीआई की निंदा की.

हैदराबाद में यूनियन के नेताओं ने राज्यपाल इएसएल नरसिम्हन को एक ज्ञापन दिया जिसमें बैंक खातों को बहाल करने की मांग की गई.

इजेयू के पूर्व महासचिव श्रीनिवास रेड्डी ने कहा कि सीबीआई की कार्रवाई जायज नहीं है, क्योंकि अब तक यह आरोप सिद्ध नहीं हुआ है कि इन कम्पनियों के खाते में जो पैसा है, वो अवैध स्रोत से आया है.

"फिर सवाल यह भी है कि जगन की कई कंपनियों में से केवल समाचार पत्र और टीवी चैनल को ही निशाना क्यों बनाया गया. हमें संदेह है की यह करवाई राजनैतिक कारणों से की गई है".

अभी बैंक खातों के ज़ब्त होने के धक्के से यह कम्पनियाँ संभली भी नहीं थीं कि राज्य सरकार ने साक्षी समाचार पत्र और टीवी चैनल को सरकारी विज्ञापन देने पर भी प्रतिबन्ध लगा दिया है.

सरकारी विज्ञापन पर रोक

इस संबंध में गुरुवार को एक सरकारी आदेश जारी किया गया. सूचना विभाग के अधिकारियों का कहना है कि सीबीआई की ओर से बैंक खाते ज़ब्त किए जाने, अभियोग पत्र अदालत में दाखिल पेश करने के आरोप के मद्देनजर ही विज्ञापन बंद करने का फैसला किया गया है.

साक्षी समाचार पत्र और चैनल में लगभग 20 हजार लोग काम करते हैं. साक्षी अखबार का दावा है कि उसका सिर्कुलेशन 14 लाख से भी ज्यादा है.

बैंक खातों के ज़ब्त होने के बाद इन दोनों संस्थानों में एक अनिश्चितता का माहौल पैदा हो गया है. लेकिन साक्षी के अधिकारियों को विश्वास है कि वे इस संकट के बावजूद दैनिक और टीवी चैनल को जिंदा रखेंगे. अब सबका ध्यान अदालत की ओर लगा है कि वह बैंक खातों की ज़ब्ती पर क्या आदेश देती है.

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