'श्रीलंकन ग्लोरी' कॉकटेल और राष्ट्रवाद

  • 12 मई 2012
Image caption लक्ष्मी दक्षिण भारतीय राज्य तमिलनाड़ु से है. पति श्रीलंका से हैं, तो शादी के बाद वे यहां आकर बस गईं.

मेरे हाव भाव देखकर लक्ष्मी को शायद अंदाजा हो गया कि मैं भारत से हूं. कुछ ही पलों में वो मुझसे यूं घुल-मिल गई, कि मानो मुझे काफी समय से जानती हो.

लक्ष्मी ‘श्रीलंका का इंग्लैंड’ कहे जाने वाले हिल स्टेशन न्वौरेलिया की सबसे पुरानी चाय की दुकान पर बतौर सेल्सगर्ल काम करती हैं.

चाय बेचने से ज़्यादा लक्ष्मी की रुचि मेरी राष्ट्रीयता जानने में थी और बेसब्री में उन्होंने मुझसे ये सवाल पूछ ही लिया.

जब मैंने हामी भरी तो लक्ष्मी के चेहरे पर एक आश्वस्त कर देने वाली मुस्कुराहट दिखी.

उन्होंने मुझे बताया कि वो दक्षिण भारतीय राज्य तमिलनाड़ु से है और ससुराल न्वौरेलिया की ख़ूबसूरत वादियों में है.

भारतीय तमिल

न्वौरेलिया की ज्यादातर आबादी तमिल हिंदुओं की है. कुछ डेढ़ सौ साल पहले जब श्रीलंका (सीलोन) ब्रितानी राज के अधीन था, तब श्रीलंका के चाय बागानों में काम करवाने के लिए दक्षिण भारत से तमिल समुदाय के हजारों श्रमिकों को वहां लाया गया था.

और फिर पीढ़ी-दर-पीढ़ी भारतीय तमिल यहीं के हो कर रह गए. श्रीलंका में भारतीय व स्थानीय तमिल समुदाय की कुल आबादी 18 प्रतिशत है.

लंबे समय से इस अल्पसंख्यक समुदाय की शिकायत रही है कि सरकार ने उन्हें नज़रअंदाज़ किया, जिसका नतीजा तमिल टाइगर्स और सरकार के बीच 30 साल लंबे गृह युद्ध में देखने को मिला.

इस युद्ध में 70,000 से ज़्यादा लोग मारे गए. आज तमिल टाइगर्स के विरुद्ध श्रीलंका सरकार की निर्णायक कार्रवाई को तीन साल हो चुके हैं.

सरकार का दावा है कि उन्होंने चरमपंथ को हमेशा के लिए ख़ामोश कर दिया है. लेकिन साथ ही खामोश हो चले हैं लक्ष्मी जैसे हजारों लोग.

चुप्पी

Image caption सिंहला समुदाय के लोगों में राष्ट्रवाद की भावना बेहद मज़बूत है.

जब मैंने लक्ष्मी से पूछा कि क्या उनके पति और वे राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे की नीतियों का समर्थन करते हैं, तो उनकी खिलखिलाती हुई मुस्कुराहट को मानो ग्रहण सा लग गया.

पांच मिनट में हमारे बीच हुई घनिष्ठ मित्रता बस उसी पल काफूर हो गई. लक्ष्मी ने बस इतना कहा कि सरकार भले ही कैसी भी हो, सच्चाई ये है कि उन्हें और उनके पति को श्रीलंका में रह कर ही अपनी रोज़ी-रोटी कमानी है.

लक्ष्मी ने झटपट मेरा सामान मुझे पकड़ाया और वहां से चलती बनी. लक्ष्मी तो चली गई, लेकिन उसकी आवाज की कंपन पूरी वादी में अपनी गूंज छोड़ गई.

मैं अपनी गाड़ी में बैठी और दक्षिण प्रांत के बेनटोटा समुद्र तट की ओर निकल पड़ी. मेरा ड्राइवर सरथ लियानगे श्रीलंका के बहुसंख्यक सिंहला समुदाय का हिस्सा है.

लियनगे की बातों में सिंहला राष्ट्रवाद का कट्टरपंथ झलकता है. वो कहता है कि राजापक्षे की कड़ी नीतियों की बदौलत श्रीलंका से चरमपंथ का खात्मा हुआ जिसके लिए पूरा देश उनका शुक्रगुजार हैं.

विवादस्पद विषय

Image caption सिंहला समुदाय के सरथ लियनगे का कहना है कि गृह युद्ध की समाप्ति से आने वाली पीढ़ियों का भविष्य सुनहरा होगा

जैसे ही मैं ये विषय छेड़ती, तो वो राजापक्षे की चरमपंथ-विरोधी नीतियों की वकालत करते हुए अपनी मुट्ठी को कस कर बंद कर लेता और उसकी आवाज भी ऊंची हो जाती.

जितना भय लक्ष्मी की आवाज में महसूस किया जा सकता था, उससे कहीं ज्यादा क्रांति लियनगे की आवाज में थी.

कोलंबो की वीआईपी सड़कों की ओर इशारा करते हुए लियनगे ने मुझे बताया कि राजापक्षे की बदौलत आज मेरे जैसे सैलानी निडर भाव से कहीं भी घूम सकते हैं.

उसने मुझे बताया कि कुछ सालों पहले कोलंबो किसी कैदखाने की तरह लगता था.

लेकिन यही वो शहर भी था जहां 2007 में तमिल समुदाय के लोगों को पुलिस ने हिदायत दी थी कि वो अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए वहां से बाहर चले जाएं.

खैर इन दो पहलुओं के बारे में सोचते-सोचते मैं शाम ढलने से पहले बेनटोटा के समुद्र तट पर पहुंची. होटल के बार में नीला नाम के बारटेंडर से मुलाकात हुई. नीला सिंहाला समुदाय से हैं, लेकिन उसके विचार औरों से अलग हैं.

नीला का मानना है कि ग़लती सरकार से भी हुई और तमिल टाइगर्स से भी. वो कहता है कि दोनों ही पक्षों ने युद्ध की नीतियों का उल्लंघन किया.

वो इस बात पर ज़ोर देता है कि तमिल समुदाय के सभी लोगों को तमिल टाइगर्स से जोड़ना ग़लत होगा. फिर बातों बातों में नीला मुझे सुझाव देता है कि मुझे होटल की ‘श्री लंकन ग्लोरी’ नाम की कॉकटेल पीनी चाहिए.

‘ग्लोरी’ यानि शान. नीला कहता है कि गृह-युद्ध की समाप्ति के बाद वहां की ग्लोरी इस बात में है कि अल्पसंख्यक तमिल और बहुसंख्यक सिंहला समुदाय बिना किसी वैर भाव के मिल-जुल कर रहते हैं.

इस बीच बार के एक कोने में खड़ा तमिल समुदाय का सिक्योरिटी गार्ड हमारी बातें सुन कर मुस्कुरा रहा था. मैं उससे बात करने के लिए आगे बढ़ी ही थी कि वो वहां से गायब हो गया. क्या उसके होंठ भी लक्ष्मी की तरह सिले हुए थे?

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