अफगान वार्ताकार रहमानी की हत्या

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Image caption अरसला रहमानी तालेबान सरकार में उच्च शिक्षा मंत्री रह चुके थे

अफगानिस्तान के एक वरिष्ठ शांति वार्ताकार की काबुल में गोली मारकर हत्या कर दी गई है.

अरसला रहमानी पूर्व तालेबान सरकार में मंत्री थे और अफगानिस्तान की शांति परिषद के अहम सदस्य भी. यही परिषद अफगानिस्तान की ओर से तालेबान के साथ शांति समझौते के लिए कोशिशों में लगी है.

संवाददाताओं के अनुसार उनकी मौत राष्ट्रपति हामिद करजई के लिए एक बड़ा झटका है क्योंकि रहमानी तालेबान के कमांडरों तक बात पहुँचाने की दृष्टि से काफी अहम थे.

वैसे पिछले साल ही शांति परिषद के प्रमुख बुरहानुद्दीन रब्बानी की एक आत्मघाती हमले में मौत हो गई थी.

अमरीका में पढ़े उनके बेटे सलाहुद्दीन रब्बानी को ही पिछले हफ्ते उस परिषद में उनकी जगह नियुक्त किया गया है.

पुलिस का कहना है कि रहमानी की हत्या रविवार सुबह कुछ अज्ञात बंदूकधारियों ने की. उस समय वह काबुल के पश्चिमी इलाके में काम पर जा रहे थे. पुलिस इसे काफी सुनियोजित हमला मान रही है.

बीबीसी संवाददाता बिलाल सरवरी के अनुसार हथियारबंद लोग एक सफेद रंग की टोयोटा करोला कार में थे और उन्होंने साइलेंसर लगी पिस्तौल से एक गोली मारी.

अहम सदस्य

काबुल पुलिस के प्रमुख जनरल अयूब सालंगी ने बीबीसी को बताया, "रहमान के दिल पर गोली लगी और उनकी तुरंत ही मौत हो गई. उनका भतीजा ही गाड़ी चला रहा था और उसे पता भी नहीं चला कि रहमानी को गोली लग गई है."

इससे पहले भी उन्हें जान से मारने की धमकी दी जा चुकी थी इसलिए अब ये भी सवाल उठेगा कि आखिर वह बिना अंगरक्षकों के क्यों जा रहे थे.

तालेबान ने रहमानी की हत्या में हाथ होने से इनकार किया है.

राष्ट्रपति के एक वरिष्ठ सहयोगी ने बीबीसी संवाददाता को बताया कि रहमानी ही पहले वरिष्ठ तालेबान सदस्य थे जिन्होंने शांति वार्ता में हिस्सा लिया था और अब उनकी मौत के बाद अन्य तालेबान अधिकारी सरकार के साथ वार्ता में हिस्सा लेने से हिचकेंगे.

तालेबान नेतृत्त्व के काम के तरीके और उनकी सोच समझने के लिए अफगान राष्ट्रपति अकसर रहमानी से चर्चा करते थे. वह तालेबान प्रशासन में उच्च शिक्षा के मंत्री थे.

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