जहाज ने जान नहीं बचाई, मुकदमा ठोका

  • 14 मई 2012
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Image caption इस मछुआरे की उम्र 18 साल की है

पनामा के एक मछुआरे ने एक पर्यटन जहाज कंपनी पर लापरवाही का मुकदमा ठोक दिया है.

मछुआरे का आरोप है कि वो 28 दिन तक प्रशांत महासागर में फंसा रहा और इस दौरान उसके दो साथी भी मारे गए लेकिन पास से गुजरने वाले इस पर्यटन जहाज ने उन्हें बचाने के लिए कुछ नहीं किया.

इस मछुआरे का नाम एडरिएन वासक्येज है और इनके वकील के अनुसार उन्होंने फ्लोरिडा में 'प्रिंसेस क्रूज़' के खिलाफ लापरवाही का मामला लगाया है.

लेकिन इस अमरीकी पर्यटन कंपनी का कहना है कि उन्हें इस बात का दुख है कि उनका जहाज मरते हुए लोगों को नजरअंजदाज करते हुए आगे निकल गया.

यात्रियों का कहना था कि उन्होंने इस व्यक्ति को देखा था और स्टॉफ को इस बारे में सूचित भी किया था लेकिन कंपनी का कहना था कि जहाज के कैप्टन को इस बारे में जानकारी नहीं दी गई.

वासक्येज के वकील एडना रमॉस का कहना है कि इस मुकदमे के दौरान पर्यटन जहाज के दो यात्रियों से गवाही ली जाएगी जिन्होंने एक नाव का देखा था और इस बारे में स्टॉफ के सदस्यों को जानकारी दी थी.

जानकारी दी गई थी

एक यात्री जुडी मेरेडीथ ने इससे पहले रिपोर्टरों को बताया था कि उन्होंने एक विक्रय प्रतिनिधि को इस नाव के बारे में जानकारी दी थी और टेलिस्कोप के जरिए उसे दिखाया भी था.

वासक्येज और उसके दो साथी फरवरी महीने में रिओ हेतो पोत से एक तीन मीटर लंबी खुली नाव में सवार हो गए थे और मछलियां पकड़ने के बाद जब वे लौट रहे थे उस समय उनकी नाव का इंजन खराब हो गया था.

16 दिन तक दिशाहीन घुमते हुए उन्होंने एक पर्यटन जहाज को देखा और मदद के लिए लाल स्वेटर हवा में भी लहराई.

उनका कहना था,''हम खुश थे क्योंकि हमें लगा कि वो हमारी मदद के लिए आ रहे हैं.''

वासक्वेज को गलापेगोस द्वीप से एक हजार किलोमीटर की दूरी पर बचाया गया. लेकिन तब तक उनके साथियों की प्यास के कारण मौत हो गई थी.

उन्होंने अचानक आई भारी बारिश का धन्यवाद करते हुए कहा कि बारिश की वजह से पानी की सप्लाई संभव हो पाई.

प्रिंसेस क्रूज का कहना था कि ऐसा लगता है कि संपर्क ठीक से नहीं हो पाया होगा.

उनका कहना था कि कैप्टन एडवर्ड पेरिन और अन्य अधिकारियों को इस बारे में सूचित नहीं किया गया था.

प्रिंसेस क्रूज का कहना था, "हम समुद्री नियम कानून के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझते हैं, जिसके अनुसार समुद्र के भीतर जिस किसी को भी मदद को जरुरत होती है उसकी मदद की जानी चाहिए और पिछले दशकों में उन्होंने 30 से ज्यादा लोगों को बचाया है."

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