ब्रिटेन की एक और नदी में हो सकेगा अस्थि विसर्जन

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Image caption अंतिम संस्कार के बाद हिंदू किसी शुभ दिन का चयन कर अस्थियों को नदी में विसर्जित करते हैं.

ब्रितानी हिंदुओं को देश की एक और नदी में परिवार वालों की अस्थियां विसर्जित करने का अधिकार मिलने जा रहा है.

ब्रिस्टल के मेयर पीटर मेन ने कहा है कि हिन्दू समुदाय को सगे-संबंधियों की अस्थियां और राख नदी में बहाने के लिए इजाजत दिलवाना उनकी पहली प्राथमिकता है.

ब्रिस्टल के पर्यावरण विभाग को इस काम के लिए एवन नदी में उपयुक्त स्थान तलाश करने का काम सौंपा गया है.

इस कार्य के पूरा होते ही क्षेत्र के हिंदू समुदाय को अपने अजीजों की अस्थियों और राख विसर्जित करने के लिए भारत में गंगा नदी तक का सफर करने की जरूरत नहीं पड़ेगी.

स्थानीय हिंदू मंदिर के पराग भट्ट कहते हैं कि बड़े परिवारों और बजुर्गों के लिए भारत की यात्रा मुश्किल होती है.

पीटर मेन कहते हैं, ''जल में अस्थियों का विसर्जन करना उनकी परंपरा है और अक्सर उन्हें इसके लिए भारत भेजा जाता है. वे ब्रिस्टल के निवासी हैं. उनमें से अधिकांश का जन्म और लालन-पालन यहीं हुआ है. उन्हें ब्रिस्टल में ही अस्थियां विसर्जन करने के लिए स्थान क्यों नहीं दिया जा सकता?''

पराग भट्ट कहते हैं कि ब्रिस्टल और पास के क्षेत्र में करीब दस हजार हिन्दू रहते हैं.

उनके मुताबिक, ''इससे केवल ब्रिस्टल के हिंदू समुदाय को ही नहीं बौद्ध और सिखों को भी फायदा होगा.''

टेम्स में भी करते हैं अस्थि विसर्जन

ब्रिटेन की नदियों में अस्थियों को विसर्जित करना कोई नया नहीं है. लंदन की टेम्स और लेस्टरशायर की सोअर और दूसरी कई नदियों में खास स्थानों पर अस्थि विसर्जन की अनुमति है.

हालांकि पर्यावरण से जुड़े लोगों ने कई बार इस मामले को उठाया है कि इससे नदियों में प्रदूषण का स्तर बढ़ेगा. लेकिन दूसरी ओर ब्रितानी नागरिकों का एक तबका इसे नागरिकों के एक वर्ग के धार्मिक और सांस्कृतिक अधिकार के तौर पर भी देखता है.

केवल हिंदू ही नहीं बल्कि सिखों में भी अंतिम संस्कार के बाद अस्थियों और राख को बहते पानी में डालने की परंपरा है.

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