बैरोनेस वारसी पर धांधली के आरोप

Image caption बारोनेस वार्सी का कहना है कि वे एक दोस्त नवीद खान के घर रह रही थी और वहां रहने के लिए वे किराया देती थी.

ब्रिटेन में कंज़रवेटिव पार्टी की सह-अध्यक्ष बैरोनेस वारसी पर उनके घर के किराए को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं.

लेबर पार्टी के सांसदों का कहना है कि लंदन में उनके घर के किराये से जुड़े सवालों की जांच होनी चाहिए.

दरअसल बैरोनेस वारसी पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि लंदन में जिस घर के लिए उन्होंने सरकार से भत्ता लिया, उस घर का किराया उन्होंने अदा किया या नहीं.

इन आरोपों के जवाब में वारसी का कहना है कि उन्होंने किराए की पूरी राशि अदा की है.

कंज़रवेटिव पार्टी के उपाध्यक्ष माइकल फैलॉन ने स्काई न्यूज़ को बताया कि ये विवाद ‘शर्मनाक’ है लेकिन वारसी को लगता है कि उन्होंने नियमों के दायरे में रह कर काम किया.

2008 में लंदन से बाहर रहने वाले पार्टी सदस्यों को हर दिन 165.50 पाउंड का भत्ता दिया जाता था, ताकि वे लंदन में ही रहने की व्यवस्था कर सकें.

किराया

बैरोनेस वारसी का कहना है कि वे एक दोस्त नवीद खान के घर रह रही थी और वहां रहने के लिए वे किराया देती थी.

लेकिन पश्चिमी लंदन में उस घर के मालिक डॉक्टर वाफिक मुस्तफा ने कहा कि उन्हें कभी वारसी की तरफ से कोई किराया नहीं मिला.

नवीद खान टोरी पार्टी के एक अधिकारी हैं और उन्होंने इस बात की पुष्टि की कि वारसी उन्हें खर्चे के लिए कुछ पैसे देती थीं.

नवीद खान ने बताया, "2008 के शुरुआती दिनों में बैरोनेस वारसी थोड़े समय के लिए मेरे साथ रही थीं. वे मुझे नियमित रूप से कुछ पैसे देती थीं, जिससे कि उनके वहां रहने से होने वाले खर्चे की भरपाई हो जाती थी."

नवीद खान बाद में वारसी के खास सलाहकार बन गए थे.

एक वक्तव्य में कहा गया कि वारसी ने सितंबर 2007 में वेम्बली में एक फ्लैट खरीदा था, लेकिन जब तक वो तैयार नहीं हुआ था, तब तक वे कभी होटलों में रहती थी, तो कभी नवीद खान के घर पर.

वारसी का कहना है कि वे उस घर में हफ्ते में दो रातों के लिए रही और ये सिलसिला 2008 की शुरुआत में छह हफ्तों के लिए चला.

कंज़रवेटिव पार्टी के उपाध्यक्ष माइकल फैलॉन ने बताया कि वारसी ने कबूल किया है कि उन्होंने गलती की और उन्होंने उसके लिए माफी भी मांगी.

लेकिन विरोधी पार्टियां इस मामले में जांच की मांग कर रही हैं.

इसके अलावा वारसी ने ये भी कबूल किया है कि वेम्बली में उनके फ्लैट से आने वाले किराये को भी उन्होंने घोषित नहीं किया था.

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