इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं के फॉर्मेट में बदलाव

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Image caption मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल के मुताबिक आईआईटी-जी और एआईईई की जगह अब नया फोरमेट लेगा

अगले साल से आईआईटी और एनआईटी व आईआईआईटी जैसे अन्य केंद्रीय संस्थानों में सीट पाने की कोशिश करने वाले छात्रों को नए फोरमेट में प्रवेश परीक्षा देनी होगी. इसमें प्लस टू के बोर्ड के नतीजों को भी ध्यान में रखा जाएगा.

अब आईआईटी-जी और एआईईई की जगह यह नया फोरमेट लेगा.

मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल ने सोमवार को आईआईटी परिषद और एनआईटी व आईआईआईटी की संयुक्त परिषद के साथ बैठक के बाद इस आशय की घोषणा की.

सिब्बल ने जोर देकर कहा कि परिषद में किसी प्रकार का कोई मतभेद नहीं था. लेकिन स्वीकार किया कि आईआईटी प्रणाली के साथ परामर्श के दौरान उन्हे काफी विरोध का सामना करना पड़ा. आईआईटी सीनेट खासकर फेकुल्टी फेडेरेशन इस नए फोरमेट का विरोध कर रही थी.

लेकिन सिब्बल ने कहा कि आईआईटी व अन्य केंद्रीय संस्थानों के उम्मीदवारों का चयन भिन्न होगा.जहां तक कि सभी संभावितों को नए फोरमेट के तहत सभी चरणों से गुजरना होगा.

नए फोरमेट के तहत मैन और एडवांस टेस्ट एक ही दिन में होगा.

केंद्र के पैसे से चलने वाले संगठनों में प्रवेश के लिए बाहरवीं के प्रदर्शन के 40 फीसदी तक की तरजीह दी जाएगी. जबकि मैन और एडवांस टेस्ट के लिए यह 30-30 प्रतिशत रहेगी.

बोर्ड नतीजों को तरजीह

आईआईटी के मामले में छटनी प्रणाली काम करेगी. बोर्ड के परिणामों व मैन टेस्ट को 50 फीसदी की तरजीह मिलेगी. बोर्ड की परीक्षा और मैन टेस्ट के रिज्लट के आधार पर एडवांस टेस्ट के लिए केवल 50 हजार छात्र ही चुने जाएंगे.

सिब्बल ने कहा," आईआईटी में प्रवेश के लिए एडवांस टेस्ट की मेरिट पर ही विचार किया जाएगा. "

उन्होंने बताया कि आईआईटी परिषद 2015 तक अन्य प्रणाली को स्वीकार करने को राजी हो गई है.

आईआईटी के लिए नए फोरमेट के तहत उम्मीदवारों के चयन प्रक्रिया को समझाते हुए आईआईटी के एक निदेशक ने बताया मेरिट लिस्ट तैयार करते समय सिर्फ उन छात्रों के एडवांस व मैन टेस्ट के नतीजों को माना जाएगा जो बोर्ड के 50 फीसदी अंकों की सीमा को पार करेंगे.

उन्होंने बताया कि आईआईटी के लिए चयन प्रक्रिया बाकी संस्थानों से अलग होगी.हालांकि आईआईटी व अन्य इंस्टीट्यूट के लिए काउंसलिग संयुक्त रूप से होगी और सीट का आबंटन भी साथ ही होगा.