'सीरिया में लोगों की हत्या की गई'

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Image caption जाँचकर्ताओं के मुताबिक़ लोगों को नज़दीक से गोली मारी गई या गला काट दिया गया

संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि सीरिया के हुला इलाक़े में जिन 108 लोगों की मौत हुई थी उनमें से ज़्यादातर की हत्या की गई थी.

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार मामलों से जुड़े एक अधिकारी का कहना है कि प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया है कि राष्ट्रपति बशर अल असद के समर्थक हथियारबंद गुट ने ये हत्याएँ की हैं.

इस हमले के बाद जीवित बचे लोगों ने बताया है कि किस तरह हमलावरों ने अंधाधुंध गोलियाँ चलाईं और कई बच्चों का गला काट दिया.

संयुक्त राष्ट्र की जाँच रिपोर्ट ऐसे समय आई है जब अरब लीग के विशेष दूत कोफ़ी अन्नान राजधानी दमिश्क में बशर अल असद से मुलाक़ात कर रहे हैं.

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त के प्रवक्ता रूपर्ट कोलविल ने जिनेवा में पत्रकारों से कहा कि तोलादू नाम के गाँव में ज़्यादा से ज़्यादा 20 लोग गोलाबारी में मारे गए थे जबकि बाक़ी लोग हथियारबंद गुट की हिंसा का शिकार बने. मारे गए लोगों में 49 बच्चे 34 महिलाएँ थीं.

हमले के बाद जीवित बचे लोगों ने बीबीसी को बताया कि हमले करने वाले सरकार समर्थक गुट का नाम शाबीहा है, इनका कहना है कि वही लोग जीवित बचे जिन्हें हमलावरों ने मरा हुआ मान लिया या जो उनकी नज़रों से बचकर कहीं छिप गए.

संयुक्त राष्ट्र के जाँचकर्ताओं का कहना है कि ज्यादातर लोगों को बहुत नज़दीक से गोली मारी गई या उनका गला रेत दिया गया.

सीरियाई सरकार का कहना है कि यह विद्रोहियों का काम है, जिन्हें राष्ट्रपति असद आतंकवादी कहते हैं. सरकार का कहना है कि विद्रोही शांति प्रक्रिया को नाकाम करने और विदेशी शक्तियों का हस्तक्षेप कराने की मंशा से ऐसा कर रहे हैं.

कोफ़ी अन्नान ने इस जनसंहार को बेहद दुखद घटना बताया है और कहा है कि इसके गंभीर परिणाम होंगे. बशर अल असद से बातचीत शुरू करने के पहले संयुक्त राष्ट्र के पूर्व महासचिव अन्नान ने कहा कि सीरियाई सरकार को बड़े क़दम उठाने होंगे ताकि दुनिया उनका विश्वास कर सके कि वे शांति चाहते हैं.

माना जा रहा है कि अगर कोफ़ी अन्नान की कोशिशें नाकाम रहती हैं तो सीरिया को गृह युद्ध की आग से बचाना बेहद कठिन हो जाएगा.

अरब लीग की योजना को सीरियाई सरकार ने स्वीकार किया था, उसके मुताबिक़ 12 अप्रैल तक दोनों पक्षों को हिंसा रोकनी थी और रिहाइशी इलाक़ों से सेना को हटाना था. मगर ऐसा बिल्कुल नहीं हुआ.

हुला की हिंसा के बाद पश्चिमी देशों ने सीरिया पर एक बार फिर नए सिरे से दबाव बनाना शुरू किया है, ब्रिटेन, फ्रांस और अमरीका जैसे देशों ने इस हिंसा की कड़ी निंदा की है.

संयुक्त राष्ट्र में सीरिया के ख़िलाफ़ प्रस्ताव लाए जाने का विरोध करने और उसे हथियारों की सप्लाई करने वाले रूस ने शुक्रवार की घटना के लिए दोनों पक्षों को ज़िम्मेदार ठहराया है.

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