हर इंसान के हिस्से दो बुलेट

  • 1 जून 2012
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Image caption कई देश गोलियों के व्यापार पर नियंत्रण के खिलाफ हैं.

ब्रितानी स्वंयसेवी संस्था ऑक्सफैम का कहना है कि प्रत्येक वर्ष विश्व भर में छोटे हथियारों के लिए गोले-बारूद का चार अरब डॉलर से अधिक का कारोबार होता है.

मानव कल्याण से जुड़ी संस्था ने अपनी ताजा रिपोर्ट में कहा है कि दुनिया भर में हर साल 12 अरब बुलेट का उत्पादन किया जाता है, और अगर धरती पर रहने वाली कुल जनसंख्या के आधार पर इसका अनुपात निकाला जाए तो हर व्यक्ति के हिस्से दो बुलेट आती हैं.

ऑक्सफैम ने गोले-बारूद की बिक्री पर नियन्त्रण के लिए एक नया अभियान शुरू किया है.

संयुक्त राष्ट्र में हथियारों के कारोबार पर जुलाई के महीनों में एक नई संधि पर चर्चा होनी है और संस्था का कहना है कि किसी भी संधि में गोले-बारूद के व्यापार पर नियंत्रण पर भी चर्चा और संधि होनी चाहिए वरन् पूरी संधि का कोई अर्थ ही नहीं होगा.

'स्टॉप ए बुलेट, स्टॉप ए वार' अभियान की शुरुआत करते हुए ऑक्सफैम ने कहा कि ऐसी किसी भी संधि का असर पड़ने वाला नहीं है जिसमें युद्ध सामग्री की बिक्री पर सख्त नियंत्रण न हो.

विरोध

लेकिन आक्सफैम के इस विचार का अमरीका और चीन जैसे कई देशों ने विरोध कर रहे हैं. मिस्र, सीरिया, ईरान और वेनुजुएला जैसे मुल्क इसे संधि में शामिल किए जाने का विरोध कर रहे हैं.

संस्था की आर्मस कंट्रोल की प्रमुख एना मैकडोनाल्ड ने कहा, “ बुलेट के बिना बंदूक महज एक लोहे की छड़ की तरह है. असल में गोली-बारूद ही लड़ाई को हवा देती है. यकीनन हथियारों का कारोबार में काफी पैसा है. लेकिन इसके उत्पादन की लागत कम है. लेकिन मानवता को इस कारोबार में जो नुकसान उठाना पड़ रहा है, उसका कोई हिसाब नही.”

अगर इस संधि पर सहमति बन जाती है तो हथियारों की बिक्री और हस्तांतरण का रिकार्ड रखने के लिए नियम बनाए जाएंगे.

हालांकि 153 देश पहले ही संधि के मसौदे पर अपनी सहमति दे चुके हैं लेकिन उनका कहना है कि गोली जैसी वस्तु पर, जिसका उत्पादन बड़े पैमाने पर होता है, किसी तरह का नियंत्रण रखना लगभग नामुमकिन सा है.

बातचीत

संयुक्त राष्ट्र में दो जुलाई से 27 जुलाई के दौरान हथियारों के व्यापार पर होनेवाली चर्चा संस्थाओं के लगातार दबाव का नतीजा हैं जिसमें ये मांग की जाती रही है कि इसे नियंत्रण में लाए जाने की भारी आवश्यक्ता है.

ऑक्सफैम का कहना है कि संधि के भीतर सिर्फ उन्हीं मुल्कों को न शामिल किया जाए जो हथियारों का उत्पादन करते हैं बल्कि उन्हें भी जो इसके कुछ हिस्से बनाकर निर्यात करते हैं.

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