चार करोड़ से अधिक लोग विस्थापित: संयुक्त राष्ट्र

  • 1 जून 2012
अफगानिस्तान (फाइल) इमेज कॉपीरइट AP
Image caption अफगानिस्तान में लड़ाई की वजह से बड़ी संख्या में लोग विस्थापित हुए हैं.

संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी ने अपनी ताजा रिपोर्ट में कहा है कि विश्व भर में विस्थापितों की संख्या दिन-ब-दिन बढ़ रही है और उसके आंकड़ों के मुताबिक वर्तमान में दुनियां भर में चार करोड़ से भी अधिक विस्थापित मौजूद हैं.

शरणार्थियों पर जारी रिपोर्ट में संस्था ने कहा है कि जो 4.3 करोड़ लोग विस्थापित हुए हैं उसके कारण हैं - संघर्ष, प्राकृतिक आपदा और जलवायु परिवर्तन.

संस्था का कहना है कि इन लोगों के पुनर्स्थापन के लिए जो कोशिशे हो रही हैं वो नाकाफी हैं.

छह साल में विश्व में शरणार्थियों की स्थिति पर ये पहली रिपोर्ट है और संयुक्त राष्ट्र एजेंसी का कहना है कि इन वर्षों में विस्थापितों और उनकी मदद करने की कोशिश में लगी संस्थाओं की समस्याएं और ज्यादा जटिल हुई हैं.

दुनियाभर में तकरीबन चार करोड़ 30 लाख लोगों को मजबूरन विस्थापित होना पड़ा है.

सुरक्षा

Image caption दारफुर में बेपनाह हुए लोगों को विस्थापित का दर्जा नहीं मिल पाया है.

इन चार करोड़ 30 लाख लोगों में से किन्हें विस्थापित के रूप में सुरक्षा पाने का अधिकार है, इस सवाल का जवाब देना भी मुश्किल होता जा रहा है क्योंकि जो लोग विस्थापित हुए और अपने ही देश में रह गए, उनकी स्थिति सोचनीय बनी हुई है.

जैसे कि पश्चिमी सूडान के दारफुर में विस्थापित हुए लोगों को विस्थापित का दर्जा नहीं दिया गया है जबकि उन्होंने अपना सबकुछ खो दिया है.

जो लोग युद्ध या उत्पीड़न या फिर भूकंप या सूखे से अपनी जान बचाने के लिए सीमा पार कर दूसरे इलाकों में चले गए हैं, उन्हें तकनीकी रूप से शरणार्थी नहीं माना जाता और मेजबान देशों की उन्हें सुरक्षा प्रदान करने की कोई नैतिक जिम्मेदारी नहीं बनती.

यमन और सोमालिया जैसे युद्ध प्रभावित देशों में जहां कि हजारों विस्थापित लोगों को सहायता की जरूरत है, वहां संयुक्त राष्ट्र एजेंसी के मुताबिक सहायताकर्मियों को कई तरह की धमकियां दी जाती हैं जिससे उनके काम करने की क्षमता प्रभावित होती है.

संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि विस्थापितों की स्थिति अंतरराष्ट्रीय समस्या बनती जा रही है जिसके समाधान के लिए वैश्विक स्तर पर ही काम किए जाने की जरूरत है.

संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी चाहती है कि दुनिया के देश विस्थापितों को सुरक्षा देने की दिशा में मिलकर काम करें.

साथ ही एजेंसी ने औद्योगीकृत देशों को चेतावनी दी है कि वे आश्रय चाहनेवाले और विस्थापित हुए लोगों के प्रति अपनी बंधी हुई मानसिकता बदलें.

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