अरबों का कारोबार

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Image caption सी भी एक समय पर क़रीब 500 से 700 जहाजी समुद्री लुटेरों के कब्ज़े में होते हैं

अदन की खाड़ी में जलदस्युओं ने दुनिया की अर्थव्यवस्था को साल 2011 में सात अरब डॉलर का नुकसान पहुंचाया. साल 2012 के आरंभ से अब तक 11 ज़हाज़ों को सोमालिया के समुद्री लुटेरे अब तक बंधक बना चुके हैं.

अगर इन डाकुओं के कब्ज़े में मौजूद 173 लोगों की सोचें तो अपहरण के इस व्यवसाय की मानवीय कीमत भी कम नहीं है.

दुनिया की सबसे बड़ी व्यावसायिक जहाजरानी कंपनियों में से एक मर्स्क लाइन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सोहरेन स्कू का कहना है कि हालत काबू से बाहर हो गए हैं और अब दुनिया को इस बारे में कुछ करना चाहिए.

परेशान जहाजी

डेनमार्क के आरहस बंदरगाह पर खड़े दुनिया के सबसे बड़े मालवाहक जहाज़ों में से एक, एबा मर्स्क, पर सबसे ऊँचे स्थान पर बने एक कंट्रोल रूम से नज़र डालना चकित कर देने वाला होता है. इस पर हज़ारों बहुत बड़े कमरों जितने बड़े स्टील के कंटेनर लदे हुए हैं.

स्वेज़ नहर से होता हुआ यह जहाज़ एशिया में सिंगापुर और शंगाई जाने के लिए निकला है लेकिन उसके पहले उसे सोमालिया के नज़दीक से निकलना होगा. उस इलाके से जहाँ समुद्री लुटेरों का राज है.

इस जहाज़ के कप्तान ज्यां एल्फ बीएरवेल हैं.

पूछने पर बीएरवेल स्वीकार करते हैं कि सोमालिया के पास से गुजरने के पहले तनाव आ जाते हैं.

बीएरवेल बताते हैं कि सोमालिया के पास से गुजरने के पहले जहाज़ चौकन्ना हो जाता है. लोग रात में अपनी जगहों से बाहर नहीं निकलते, सभी दरवाजों पर ताले मार दीए जाते हैं और जहाज़ पर लगे अत्याधुनिक रडार शुरू कर दीए जाते हैं.

बीएरवेल बताते हैं की यूँ तो स्वेज़ नहर के बाद से हिंद महासागर में घुसने का आने का रास्ता पांच दिन का है लेकिन इनमे से दो रोज़ ख़तरनाक हैं.

बीएरवेल समुद्री डाकुओं की समस्या के मूल को याद करते हुए कहते हैं " यूँ तो यह सब शुरू हुआ था सोमालिया में उन लोगों की तरफ़ से जिनके पास करने के लिए कुछ और नहीं था. लेकिन अब यह बहुत ही संगठित हो गया है."

बीएरवेल कहते हैं कि समुद्री लुटेरे अब तो बढ़ते बढ़ते श्रीलंका की सरहद तक हमले करने लगे हैं लेकिन सोमालिया के पास से गुजरने वाले दो रोज़ तो बहुत ही ख़तरनाक हैं.

कमजोर बचाव

इन लुटेरों से बच निकलने के लिए समुद्री जहाज़ ना केवल अपनी खिड़कियाँ दरवाज़े बंद कर लेते हैं बल्कि जहाज़ की रफ़्तार भी अधिकतम कर देते हैं.

एबा मर्स्क इतना विशाल जहाज़ है कि उसका इंजन क़रीब तीन मंजिला इमारत जितना उंचा है. यह जहाज़ हर दिन 200 टन ईंधन जला देता है. सोमालिया के पास से तेज़ी से गुजरने के चलते यह जहाज़ और अधिक ईंधन जलाता है.

मर्स्क लाइन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सोहरेन स्कू कहते हैं कि जहाज़रानी व्यवसाय के लिए समुद्री लुटेरे बहुत ही ख़राब साबित हो रहे हैं.

स्कू बताते हैं कि किसी भी एक समय पर क़रीब 500 से 700 जहाजी समुद्री लुटेरों के कब्ज़े में होते हैं. वो मानते हैं की दुनिया इस समस्या को नज़रंदाज़ कर रही है. लेकिन उनके हिसाब से इस समस्या का निदान जहाज़ों को सैन्य सुरक्षा प्रदान करने से नहीं होगा.

स्कू कहते हैं कि इस समस्या का हल केवल सोमालिया की ज़मीन पर ही निकल सकता है.

अफ़गानिस्तान और ईराक में बाहरी सेनाओं का हश्र देख रही दुनिया में शायद इस समय तो कोई सोमालिया में अपने सैनिक उतरना नहीं चाहता.

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