घायल कमांडो की तस्वीर ने बदला नजरिया

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अफगान पुलिस के एक घायल कमांडो की तस्वीर न सिर्फ अफगान सुरक्षाबलों की बहादुरी और हिम्मत की प्रतीक बनकर जनमानस के मन-मस्तिष्क पर छा रही है बल्कि उसने आम लोगों में सुरक्षाबलों की छवि को बदलने मे बड़ा काम किया है.

पंद्रह अप्रैल को राजधानी काबुल पर हुए लगातार चरमपंथी हमलों के दौरान ली गई इस तस्वीर में अफगान पुलिस का एक कमांडो बूरी तरह से लहू-लूहान है, उसके पैर से खून निकल रहा है, जिससे उसकी खाकी पतलून तर हो गई है, बावजूद इसके वो अपने कर्तव्य से मूंह नहीं मोड़ रहा.

बूरी तरह से घायल होने के बाद भी ये कमांडो अपनी क्लाशनिकोव राइफल को थामकर चल रहा है इस तस्वीर में.

ये तस्वीर अफगानिस्तान में एक 'पोस्टर-इमेज' में तब्दील हो गई है और इसने देश की सेना के लिए आम लोगों के समर्थन की नई लहर पैदा कर दी है.

मीडिया के एक हिस्से में तो इसकी चर्चा है ही, इंटरनेट ने फेसबुक और ट्विटर जैसी सोशल नेटवर्किंग साइट के जरिए इस चर्चा के दायरे को और बढ़ा दिया है.

सोच बदली

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Image caption घायल अफगान कमांडो की तस्वीर ने लोगों का मन मोह लिया है.

इस तस्वीर पर सैकड़ों टिप्पणियां आ रही हैं. ऐसी ही एक टिप्पणी में कहा गया है, ''ये मेरे जीवन का सबसे गौरवपूर्ण पल है, मैंने एक वास्तविक हीरो को देखा.''

एक अन्य टिप्पणी में कहा गया है, ''इस सैनिक ने मुझे खुशी से चिल्लाने पर मजबूर कर दिया. हमें ऐसे नायकों पर नाज है जो शत्रु को हराने के लिए अपनी जान पर खेल रहे हैं, हमारी जान बचा रहे हैं, हमें इस बात का अहसास करा रहे हैं कि हम महफूज अफगानिस्तान में रह रहे हैं.''

उल्लेखनीय है कि 15 अप्रैल को काबुल की सड़कों पर चरमपंथियों से मुठभेड़ में अफगान पुलिस के कमांडो सबसे आगे थे.

चरमपंथियों ने काबुल में कई जगहों पर हमला बोला था, लेकिन अफगान सुरक्षाबलों ने उन्हें मुंहतोड़ जबाव दिया. इस पूरी कार्रवाई में 17 चरमपंथी मारे गए थे. हमले में दो कमांडो की भी मौत हो गई थी.

इंटरनेशनल सिक्योरिटी असिस्टेंस फोर्स (आईएसएएफ) के कमांडर जॉन एलन ने भी कहा कि उन्हें अफगान सुरक्षाबलों की कार्रवाई पर गर्व है.

अफगानिस्तान में तैनात नेटो सैनिक वापस जाने की तैयारी कर रहे हैं. ऐसे में अफगानिस्तान की सेना और पुलिस की भूमिका सुरक्षा कार्यों मे दिन-ब-दिन बढ़ती जाएगी.

दिल भी जीता

नेटो सुरक्षाबल अफगानिस्तान की पुलिस और सेना को प्रशिक्षण दे रहे हैं.

काबुल की सड़कों पर 15 अप्रैल को हुई गोलीबारी की घटना और अफगान सुरक्षाबलों की कार्रवाई पर अफगान बोखरी न्यूज एजेंसी ने अपनी खबर का शीर्षक भी दिलों को जीतने से संबंधित लगाया.

काबुल स्थित मेक्सिको के फोटो-जर्नलिस्ट जेवियर मेनजेनो हाल ही में अफगान-पाक सीमा पर गये थे जहां अमरीका और अफगानिस्तान की सेना चार दिवसीय संयुक्त अभ्यास कर रही थी.

जेवियर कहते हैं कि वे अफगान सुरक्षाबलों से प्रभावित हुए हैं. वे कहते हैं, ''अच्छी बात ये है कि ये उनका अपना देश है, वे तेजी से आना-जाना कर सकते हैं, उन्हें पैदल चलने की आदत है और वे शारीरिक रूप से भी अच्छे हैं.''

लेकिन एक सवाल ये उठता है कि अफगान सुरक्षाबलों को जो समर्थन इंटरनेट पर मिल रहा है, क्या वो आम लोगों की व्यापक अभिव्यक्ति का प्रतिनिधित्व करता है?

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