एशिया-प्रशांत में अमरीका-चीन की प्रतिद्वंदता

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Image caption एशियाई सुरक्षा सम्मेलन को संबोधित करते अमरीकी रक्षा मंत्री लियोन पैनेटा

अमरीका प्रशांत क्षेत्र की सबसे बड़ी शक्ति था, है, और बना रहेगा.

इस साल के एशियाई सुरक्षा सम्मेलन में अमरीकी विदेश मंत्री लियोन पैनेटा ने सिंगापुर में यही मूल संदेश दिया.

ये संदेश देकर अमरीकी विदेश मंत्री वियतनाम और भारत के लिए रवाना हो गए.

पैनेटा वियतनाम पहुंच गए हैं और उनका अगला पड़ाव भारत है.

ये दोनों ही देश सुरक्षा संबंधों के ख्याल से एशिया प्रशांत क्षेत्र में अमरीका के लिए अलग-अलग कारणों से महत्वपूर्ण हैं.

ओबामा प्रशासन ने साल के शुरुआत में ही इस बात की घोषणा कर दी थी कि उसका ध्यान अब एशिया पर केंद्रित होगा और उसके बाद अमरीका के दोस्तों और सहयोगियों को मनाने की जिम्मेदारी लियोन पैनेटा को सौंपी गई थी.

अमरीका ने ये भी साफ कर दिया था कि गंभीर आर्थिक कटौतियों के दौर में भी एशिया प्रशांत क्षेत्र में पैसे लगाना उसकी महत्वाकांक्षाओं के लिए कितना जरूरी है.

बढ़ी उपस्थिति

पैनेटा ने कहा कि साल 2020 तक अमरीकी नौसेना की 60 फीसदी शक्ति प्रशांत क्षेत्र में तैनात की जाएगी, जो कि फिलहाल 50 फीसदी है.

इस नौसैनिक तैनाती में छह विमानवाहक पोत, कई तरह के शक्तिशाली लड़ाकू जहाज और पनडुब्बियां शामिल होंगी.

पैनेटा ने प्रशांत क्षेत्र में गठबंधन और साझेदारी को और मजबूत करने की बात भी कही.

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Image caption अमरीका प्रशांत क्षेत्र में अपनी नौसेनिक उपस्थिति बढ़ाना चाहता है.

सुरक्षा सम्मेलन के दौरान हुई कई द्विपक्षीय वार्ताएं भी सार्थक साबित हुईं.

जैसे कि सिंगापुर अमरीका के चार लड़ाकू जहाजों की क्षेत्र में तैनाती के लिए सहमत हो गया.

लेकिन सम्मेलन में हिस्सा ले रहे कई लोग एशिया प्रशांत क्षेत्र में अमरीकी प्रशासन की महत्वाकांक्षाओं के पूरा होने के लिए उसके वित्तीयन को लेकर भी सशंकित थे.

रिपब्लिकन सिनेटर जॉन मैक्केन ने रक्षा मंत्री पैनेटा के वक्तव्यों का स्वागत किया लेकिन ये भी कहा अमरीका के रक्षा बजट में की जा रही कठोर कटौतियों को लेकर वो गंभीर रूप से चिंतित हैं.

उन्होंने कहा कि लड़ाकू जहाज़ों की संख्या मायने रखती है लेकिन अमरीकी नौसैनिक बेड़े के आकार में कटौती का मतलब ये भी होगा कि रक्षा मंत्री ने अब तक जितने भी मिशन तय कर रखे हैं वो पूरे नहीं हो पाएंगे.

चीन की चिंता

अमरीका रक्षा मंत्री लियोन पैनेटा और कई अन्य वक्ताओं ने जोर देकर कहा कि एशिया प्रशांत क्षेत्र में अमरीकी उपस्थिति और स्थानीय रक्षा क्षमता के आधुनिकीकरण को चीन के खिलाफ तैयारी के रूप में न देखा जाए, लेकिन सच्चाई यही है कि चीन इन गतिविधियों को इसी रूप में देखता है.

चीन इस सुरक्षा सम्मेलन में मौजूद था लेकिन उसका प्रतिनिधिमंडल उतना महत्वपूर्ण नहीं था.

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Image caption चीन भी प्रशांत क्षेत्र में अपनी नौसेनिक क्षमता बढ़ा रहा है.

चीन की तरफ से कुछ छोटे अधिकारी सम्मेलन में आए थे जो रक्षा मंत्री पैनेटा की बातों को गौर से सुन रहे थे.

पिछले साल चीन के रक्षा मंत्री लियांग गुआंगली ने सुरक्षा सम्मेलन में हिस्सा लिया था. लेकिन इस साल कोई बड़ा चीनी अधिकारी वहां नहीं पहुंचा.

चीन पर नजर रखनेवाले विशेषज्ञों का मानना है कि बीजिंग में जारी राजनीतिक अनिश्चितता और पूर्व चीनी नेता बो शिलाई से जुड़ी घटनाओं की वजह से चीन की सरकार का कोई महत्वपूर्ण व्यक्ति शांगरीला सम्मेलन में नहीं आया.

मैंने जब सम्मेलन के आयोजकों से बात की तो उन्होंने बताया कि चीन ने ये आश्वासन दिया है कि अगले साल से सबकुछ सामान्य हो जाएगा.

हथियारों की होड़

एशिया प्रशांत अमरीका और चीन जैसे दो बड़े रणनीतिक देशों के लिए काफी विशाल क्षेत्र है.

लेकिन जिस तरह दोनों देश एक-दूसरे के खिलाफ सेनाएं जुटाते नजर आ रहे हैं, उससे किस समय ये सामरिक प्रतिद्वंद्विता खुले रूप में सामने आ जाएगी, कहना कठिन है.

चीन की बढ़ती सैन्य ताकत के साथ-साथ समुद्री लूट और चरमपंथ जैसी स्थानीय समस्याएं क्षेत्र में हथियारों की होड़ पैदा कर रही हैं जिसके खतरनाक नतीजे सामने आ सकते हैं.

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Image caption अमरीकी रक्षा मंत्री लियोन पैनेटा सिंगापुर के बाद वियतनाम पहुंचे हैं.

सम्मेलन के एक सत्र में तो केवल पनडुब्बियों की बढ़ती संख्या पर ही चर्चा हुई.

लंदन स्थित इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रेटेजिक स्टडीज के क्रिश्चियन ला मायर ने जैसा मुझे बताया कि सिंगापुर और मलेशिया ने हाल के वर्षों में नई पनडुब्बियां अपने बेड़े में शामिल की हैं और वियतनाम और इंडोनिशिया ने भी नए जहाजों का ऑर्डर दे रखा है.

एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि प्रशांत क्षेत्र में साल 2025 तक 170 पनडुब्बियां तैनात हो जाएंगी.

एशिया प्रशांत क्षेत्र में हथियारों की होड़ की बात करना शायद जल्दबाजी होगी लेकिन जिस तरह से प्रतियोगी तरीके से सेना का आधुनिकीकरण किया जा रहा है, उसे देखकर चिंता होती है.

समृद्धि, उभरता चीन, व्यापार मार्गों का महत्व और समुद्री तनाव आधुनिकीकरण की प्रक्रिया को बढ़ावा दे रहे हैं.

लेकिन उन्नत सैन्य क्षमता एक दोधारी तलवार साबित हो सकती है, जो कि खतरा भी हो सकती है और बचाव का साधन भी.

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