कांगो में टिन के खनन से युद्ध का पोषण

मध्य अफ्रीका का देश डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो खनिज संपन्न है और यहां टिन का भी खूब खनन होता है.

टिन का इस्तेमाल जरूरत के कई सामान जैसे मोबाइल फोन और कंप्यूटर बनाने में होता है.

लेकिन कांगो में इस तरह के कई खानों पर स्थानीय सैन्य संगठनो का कब्जा है और खनन का काम ज्यादातर अवैध रूप से हो रहा है.

वहां पर संगठन अब ये कोशिश कर रहे हैं कि टिन किन खानों से आ रहा है इसकी पहचान हो सके और स्थानीय सेना के नियंत्रण में रहने वाले खानों के टिन का इस्तेमाल मोबाइल फोन और लैपटॉप बनाने में न हो.

न्याबिबवे के खान

डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो के एक सुदूर पहाड़ी के खूब भीतर टिन के खान हैं जिन्हें न्यामबिबवे के खान कहा जाता है.

इस खान तक पंहुचने के लिए लंबी दूरी तक सर झुकाए तंग सुरंगों से गुजरना पड़ता है, तब जाकर उन पत्थरों तक पंहुचा जा सकता है जिनसे टिन की खनन की जाती है.

Image caption मजदूरों के पास चंद बुनियादी औजार हैं

लेकिन यहां पर काम कर रहे मजदूरों के पास सिर्फ बुनियादी औजारों के अलावा कुछ नहीं है.

खानों की जिंदगी बेहद कठिन है. यहां काम कर रहे एक खनिक फिडेल यालाला कहते हैं, "यहां पर काम करना बहुत मुश्किल है. हम सिर्फ चंद स्थानीय औजार इस्तेमाल करते हैं जैसे हथौड़ा, रौशनी के लिए टॉर्च और एक झोला. ये सुरंग जो आप देख रहे हैं इसे हमने अपने हाथों से खोदा है. खानों की जिंदगी बिल्कुल आसान नहीं है."

यालाला के घर में उनके अलावा उनकी पत्नी और चार बच्चे हैं. सभी का खर्च टिन के खान में मजदूरी की कमाई से ही चलता है.

विद्रोही सेना को फायदा

लेकिन खान से सिर्फ मजदूरों का पेट नहीं पलता.

खान से मिलने वाली कमाई का एक बड़ा हिस्सा स्थानीय विद्रोही सेना को जाता है जो इसका इस्तेमाल युद्ध में करते हैं.

कांगों में लंबे समय से चल रही इस घरेलू जंग में अब तक लाखों लोग मारे जा चुके हैं.

कांगो में कई दल काम कर रहे हैं जो देख रहे हैं कि विद्रोही सेना द्वारा नियंत्रित खानों के टिन का प्रयोग मोबाइल फोन और लैपटॉप बनाने में न हो.

Image caption कई खानों पर विद्रोही सेनाओं का नियंत्रण है

फिडेल बाफिलेंबा एक संस्था 'इनफ प्रोजेक्ट' के लिए काम करते है जो ये अभियान चला रही है कि इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनिया इस बात की जिम्मेदारी लें कि वो कच्चा माल आखिर कहां से ले रहे हैं.

बाफिलेंबा कहते है, "जहां इस खनिज को धन का बड़ा जरिया होना चाहिए था, असल में ये एक बड़ा अभिशाप है. ये देश में लोगों की मौतों का जिम्मेदार है और जो भी खुद को इंसान कहता है उसे इसके इस्तेमाल को मनाही करनी चाहिए और कहना चाहिए कि हम इसे खत्म कर देंगे."

बदलाव

वैसे यहां के हालात कुछ बदल रहे हैं. नामबिब्वे के शहर में कभी विरोधी रहे सैनिक अब सेना में साथ है और मिलकर शहर में गश्त लगा रहे हैं.

साथ ही इस तरह के खनिजों का इस्तेमाल कर रही कंपनियों को एक नए कानून के मुताबिक अमरीकी सरकार के साथ खुद को पंजीकृत करवाना पड़ रहा है.

इस तरह के दबावों से खरीददार तो हट रहे हैं लेकिन घरेलू व्यवसायियों की आमदनी भी घट रही है.

टिन के एक स्थानीय व्यापारी कुबुसिब्वा स्हीही कहते हैं, "टिन के दाम गिरे हैं. खरीददार जो भी दाम बोलते हैं हमें उसपर उन्हें बेचना पड़ा है."

डीआर कांगो में अब कोशिश हो रही है कि खानों को श्रेणियों में रखा जाए.

नामबिब्वे का ये खान ग्रीन श्रेणी में है जिसका मतलब है कि यहां बच्चे काम नहीं करते और स्थानीय सेना का प्रभाव नहीं है. लेकिन यहां कई लोग इस तरह के कदम को गलत भी बता रहे हैं.

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