नाईजीरिया में बोको हराम से भी 'बड़ा' खतरा

  • 6 जून 2012
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Image caption शेख जकजकी कहते हैं कि वो इस्लामी आंदोलन चला रहे हैं

नाइजीरिया में कई लोगों को चरमपंथी इस्लामी गुट बोको हराम के हमलों का डर लगा रहता है.

ये चरमपंथी पूरे नाइजीरिया में इस्लामी कानून लाना चाहते हैं और इस साल उन्होंने 400 से ज्यादा लोगों को मार डाला है. लेकिन कुछ दूसरे लोगों को मानना है कि उत्तरी नाईजीरिया के शिया चरमपंथी गुटों से ज्यादा खतरा है.

उत्तरी नाईजीरिया में ऐसे ही एक नेता हैं शेख जकजकी.

जकजकी उत्तरी नाईजीरिया के शियाओं के चरमपंथी गुट के नेता है और हमेशा अपने अंगरक्षकों से घिरे रहते हैं जो उन्हें उनके चाहनेवालों और जान की धमकी देने वालों से बचाने के लिए हैं.

आंदोलन

शेख जकजकी कहते हैं कि वो सिर्फ नाम कमाने के लिए इस्लामी संगठन का हिस्सा नहीं हैं.

वो कहते हैं, "हम एक आंदोलन का हिस्सा हैं, एक इस्लामी आंदोलन का. हम सिर्फ नाम के लिए इसका इस्तेमाल नहीं करते बल्कि एक कंसेप्ट की तरह इसे मानते है. जब सत्तर के आखिरी सालों में हम छात्र नेता थे तब उन दिनों भी समाज के बारे में जोरदार बहस करते थे."

दरअसल जकजकी के दफ्तर में ईरान के नेता अयातोल्ला खोमेनी की बड़ी तस्वीर टंगी है. ईरान की 1979 की क्रांति के दौरान ही जकजकी को भरोसा मिला कि नाइजीरिया में भी इस्लामी क्रांति संभव है. वैसे जकजकी इस बात से इंकार करते हैं कि उन्हें ईरान से आर्थिक मदद मिलती है. लेकिन वो और उनके समर्थक भी पूरी तरह से अमरीका विरोधी हैं.

बंदी

जकजकी नौ साल तक राजनीतिक बंदी रहे. उन्हें समाज में गड़बड़ी फैलाने के आरोप में नाईजीरिया की सैन्य सरकारों ने कैद में रखा.

Image caption कदूना की सरकार चाहती है कि जकजकी उनके साथ आए

अब जकजकी रिहा हैं और उनके समर्थकों की तादाद बड़ी है. उनके परेडों में हजारों समर्थक हिस्सा लेतें हैं और कई बार दूसरे धार्मिक गुटों से टकराव भी करते हैं.

फोदिया में इस्लामी केंद्र में शेख जकजकी के किताबों से पटी पड़ी हैं. यहां के निदेशक मोहम्मद कबीर कानो कहते हैं, "ये लाइब्रेरी छात्रों के लिए है जो पूरे देश से आते हैं. कई बार मलेशिया और दूसरे देशों के छात्र भी यहां आते हैं."

प्रशंसक

लाइब्रेरी में अध्ययन कर रहे हैं एक छात्र हैं इदरीस जो जकजकी के बड़े प्रशंसक है.

वो कहते हैं, "जकजकी का ध्यान और इरादा सिर्फ नाईजीरिया में ही इस्लाम के लिए काम करना नहीं बल्कि पूरे अफ्रीका में है. वो सिर्फ हमें हमारे कर्तव्य का ध्यान दिला रहे हैं क्योंकि अल्लाह ने हम सब को किसी कर्तव्य के लिए बनाया है."

लाइब्रेरी के अंदर कई धार्मिक नेताओं की तस्वीरें हैं. एक तस्वीर ध्यान खींचती है, और वो लेबनान के चरमपंथी गुट हिजबुल्ला के महा सचिव सैद नसरूल्ला की.

नसरूल्ला विवादों में घिरे रहते हैं क्योंकि वो अपनी धमकियों को अंजाम भी देते रहते हैं. नाईजीरिया में राजनीतिक विश्लेषक मोहम्मद कबीर इसा मानते हैं कि इस तरह के चरमपंथी हरकतों को नाईजीरिया जैसे नाजुक देश में फैलाने के लिए जकजकी बिल्कुल काबिल है.

सैन्य अभ्यास

वो कहते हैं, " एक चीज मैं कह सकता हूं कि उनके समर्थक सैन्य अभ्यासों में हिस्सा लेते हैं. हालांकि वो किसी हथियार के बिना होते हैं लेकिन जब आप इस तरह का अभ्यास करते हैं तो आप किसी खास हालात का इंतजार भी कर रहे होते हैं. मैं कह सकता हूं कि उनके आदमी सेना में, पुलिस में और राष्ट्र के दूसरे सुरक्षा संगठनों में काम कर रहे हैं."

शेख जकजकी भी कहते हैं कि उन्होंने सैकड़ों गार्डों को ट्रेनिंग दी है लेकिन वो इसी तरह है जैसे किसी लड़के को कराटे सिखाना. . एक प्रमुख मानवाधिकार कार्यकर्ता शेहू सानी ने जकजकी की रिहाई के लिए आंदोलन चलाया था. उनका कहना है कि जिस तरह नाईजीरिया में बोको हराम के द्वारा हिंसा में बढोतरी आई उसकी जिम्मेदारी सरकार को भी लेनी चाहिए.

सानी कहते हैं, " क्योंक इस्लामी आंदोलन के लोग पढ़े लिखे हैं और व्यवस्थित हैं."

डर

लेकिन कई लोगों को डर ये भी है कि इस तरह की हिंसा सिर्फ नाईजीरिया में हो रही घटनाओं से ही नहीं भड़क सकती.

शेख जकजकी अटल हैं कि अगर ईरान पर हमला हुआ तो उसका अंजाम नाईजीरिया में और पश्चिमी देशों में भी देखा जाएगा.

उन्होंने कहा, "कितना बड़ा असर होता ये इस बात पर निर्भर करेगा कि हमला किस भाग पर हमला हुआ है."

यहां की सरकार शेख जकजकी को अपने साथ लेना चाहती है. लेकिन जकजकी मानते है कि सरकार भी पश्चिमी देशों के लिए काम कर रही है और ऐसे में दोनों का मिलना बेहद मुश्किल लगता है.

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