दंगाग्रस्त पश्चिमी बर्मा में आपातकाल घोषित

  • 10 जून 2012
बर्मा इमेज कॉपीरइट Getty
Image caption बर्मा के पश्चिमी भाग में एक बौद्ध महिला की हत्या के बाद सांप्रदायिक हिंसा फैली है.

बर्मा के राष्ट्रपति थेन सेन ने सांप्रदायिक हमलों से ग्रस्त देश के पश्चिमी राज्य रखाइन में आपातकाल घोषित कर दिया है.

बौद्ध धर्म अनुयायियों और मुसलमानों के बीच हो रही हिंसक झड़पों में अब तक 17 लोग मारे गए है और सैकड़ों इमारतें क्षतिग्रस्त हो गई है.

हिंसा की शुरुआत पिछले महीने हुई जब एक बौद्ध महिला की हत्या कर दी गई, इसी के बाद एक बस पर हमला किया गया जिसपर मुसलमान यात्री सफर कर रहे थे.

कानून-व्यवस्था के हालात पर चिंता प्रकट करते हुए अधिकारियों ने पिछले दिनों चार शहरों में कर्फ्यू लागू कर दिया था.

समाचार एजेंसी एपी के अनुसार आपातकाल की स्थिति में प्रभावित इलाके की कानून-व्यवस्था सेना के जिम्मे आ जाती है.

सरकारी टेलिविज़न चैनल में कहा गया कि इलाके में अशांति और चरमपंथ की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए आपातकाल का फैसला लिया गया है ताकि लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके.

सांप्रदायिक तनाव

हिंसा की शुरुआत चार जून को हुई जब रखाइन के तौंगप इलाके में गुस्साई भीड़ ने एक बस पर हमला कर दिया. माना जा रहा है कि भीड़ को बस में सवार लोगों पर एक बौद्ध महिला के साथ बलात्कार करने और फिर उसके कत्ल का शक था.

इस घटना के बाद संदिग्ध आरोपियों को रामरी शहर में गिरफ्तार कर लिया गया और अब उनपर मामला चलाया जा रहा है.

बस मे बैठे लोगों पर हुए इस हमले में दस मुसलमानों की मौत हो गई थी जिसके बाद मौंग डॉ और बुथीडोंग में दंगा भड़क गया.

सरकारी मीडिया के अनुसार दंगे में 30 लोगों की मौत हो गई जबकि 17 अन्य घायल हो गए.

रखाइन को बौद्ध संप्रदाय बहुल इलाका माना जाता है लेकिन यहां रहने वाले मुसलमानों खासतौर पर रोहिंग्या समुदाय की भी बड़ी संख्या है.

रोहिंग्या मुसलमान धर्म को मानने वाला समुदाय है, जिसके माननेवालों को बर्मा गैरकानूनी तरीके से देश में आए बांगलादेशी मानता है.

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