विदेशी कर्मचारियों के लिए टोक्यो सबसे महंगा

टोक्यो इमेज कॉपीरइट Getty
Image caption मर्सर का ये निष्कर्ष मार्च 2011 और मार्च 2012 के बीच जुटाए गए आंकड़ों के बाद आया है

एक शोध में पता चला है कि विदेशी कर्मचारियों के रहने के लिए जापानी की राजधानी टोक्यो सबसे महंगा शहर है.

टोक्यो ने अंगोला की राजधानी लुआंडा को पीछे छोड़ दिया है.

डॉलर के मुकाबले येन की बढ़ती कीमत के कारण टोक्यो में रहना महंगा हो गया है और कंपनियाँ दूसरी मुद्राएँ खर्च कर रही हैं.

कंसेल्टंसी फर्म मर्सर के शोध से पता चला है कि कमज़ोर यूरो के कारण पेरिस, रोम और एम्स्टरडेम में रहना सस्ता हुआ है.

इस सूची में लंदन 25वें स्थान पर है और वो सात स्थान नीचे गया है.

विदेशी कर्मचारियों पर सबसे ज्यादा खर्च उनके रहने पर आता है. मर्सर ने अपने शोध में 214 शहरों के आंकड़े जुटाए और पता चला कि विदेशी कर्मचारियों के रहने पर कुल खर्च का 25 प्रतिशत व्यय होता है.

इसके बाद यातायात पर खर्च होता है.

मंदी के कारण यूरोजोन देशों में कमाई में गिरावट हुई है और बेरोज़गारी में बढोत्तरी.

पेरिस में दो बेडरूम के किराए में तीन प्रतिशत की कमी आई है. रोम, बर्लिन और मैड्रिड में भी किराए कम हुए हैं.

लेकिन मुद्रा दर में बदलाव का असर दामों पर पड़ा है. मई के बाद यूरो की कीमत में 16 प्रतिशत की गिरावट आई है. इसका मतलब है यूरोजोन में काम कर रही कंपनियों के कर्मचारियों के लिए 16 प्रतिशत की छूट.

एशिया का हाल

इसके मुकाबले एशिया-पैसिफिक अर्थव्यवस्थाओं में दामों में बढ़ोत्तरी हुई है.

शंघाई में रहने के खर्चे 73 प्रतिशत बढ़े है. दुनिया के सबसे महंगे शहरों में से एक हांगकांग में किराए 23 प्रतिशत बढ़े हैं. बीजिंग का भी यही हाल है.

मर्सर का ये निष्कर्ष मार्च 2011 और मार्च 2012 के बीच जुटाए गए आंकड़ों के बाद आया है.

संबंधित समाचार