मिस्र में चुनाव निरस्त होने से अनिश्चय

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Image caption मुस्लिम ब्रदरहुड के उम्मीदवार मोहम्मद मोर्सी ने कहा है कि देश निर्णायक मोड़ पर खड़ा है

मिस्र में सुप्रीम कोर्ट के पिछले साल हुए संसदीय चुनाव को निरस्त करने के फैसले से राजनीतिक अनिश्चय की स्थिति बन गई है. इस चुनाव में इस्लामी पार्टियाँ आगे रही थीं.

चुनाव में आगे रहनेवाले शक्तिशाली धड़े मुस्लिम ब्रदरहुड ने चेतावनी दी है कि अदालत के फैसले से देश में लोकतंत्र बहाली की दिशा में मिली सफलताएँ ख़तरे में पड़ गई हैं.

मिस्र में इस सप्ताहांत राष्ट्रपति चुनाव का दूसरे दौर का मतदान होना है जिसमें मुस्लिम ब्रदरहुड के उम्मीदवार मोहम्मद मोर्सी का सामना पूर्व प्रधानमंत्री अहमद शफ़ीक़ से हो रहा है.

राष्ट्रपति चुनाव से दो दिन पहले सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल हुए संसदीय चुनाव को असंवैधानिक ठहराते हुए फिर से चुनाव करवाने के लिए कहा. ये मिस्र में कई दशकों के बाद हुआ चुनाव था.

अदालत के फैसले से एक तरह से देश की सारी विधायी शक्तियाँ सत्ताधारी सैनिक परिषद (स्काफ़) के हाथ में चली गई है जिसे फ़रवरी 2011 में राष्ट्रपति हुस्नी मुबारक के सत्ता से बेदखल होने के बाद मिस्र में परिवर्तन की देख-रेख का दायित्व सौंपा गया था.

अदालत ने पूर्व प्रधानमंत्री अहमद शफ़ीक़ की राष्ट्रपति पद के लिए दावेदारी को भी जायज़ ठहराया है.

आलोचना

स्काफ़ पर अपनी ताक़त बढ़ाने की कोशिश करने की आशंका जतानेवाले कार्यकर्ताओं ने फ़ैसले की निन्दा करते हुए इसे उनकी क्रांति को नीचा दिखाने के लिए हुए विद्रोह की संज्ञा दी जो पूर्व राष्ट्रपति मुबारक के शासनकाल में नियुक्त न्यायाधीशों ने किया.

काहिरा स्थित बीबीसी संवाददाता जोन लेन का कहना है कि आशा ये थी कि शायद अदालत ये कहती कि चुनाव का कुछ हिस्सा असंवैधानिक था, मगर उसने बहुत आगे जाते हुए पूरे चुनाव को ही निरस्त कर दिया.

संसदीय चुनाव में 46% सीटें जीतनेवाले गुट मुस्लिम ब्रदरहुड ने एक बयान में कहा है कि ये फ़ैसला दिखाता है कि मिस्र ऐसे कठिन दिनों की ओर बढ़ रहा है जो मुबारक के दौर के आख़िरी दिनों से भी अधिक ख़तरनाक हो सकते हैं.

ब्रदरहुड ने कहा,"क्रांति से जो भी लोकतांत्रिक लाभ हुए, वे खत्म हो जा सकते हैं और सारे अधिकार पुराने दौर को याद दिलानेवाले एक प्रतीक के हाथों में दिए जा सकते हैं."

मोहम्मद मोर्सी ने कहा है कि वो अदालत के फ़ैसले को स्वीकार करते हैं मगर साथ ही उन्होंने मतदाताओं से ये कहते हुए समर्थन की अपील की कि देश अभी एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा है.

उन्होंने कहा,"एक अल्पसंख्यक गुट देश को भ्रष्ट करने और हमें पीछे ले जाने की कोशिश कर रहा है. हम मतपेटियों से ऐसे अपराधियों को नकार देंगे."

दूसरी राजनीतिक हस्तियों ने भी इस फैसले की आलोचना करते हुए चेतावनी दी है कि इससे आनेवाले राष्ट्रपति के पास ना तो संसद होगी और ना ही संविधान.

हालाँकि फैसले के बाद आपात बैठक कर सैन्य परिषद के अधिकारियों ने कहा है कि चुनाव पूर्वनिर्धारित योजना के अनुसार ही होंगे.

उन्होंने मिस्रवासियों से राष्ट्रपति चुनाव में वोट डालने की अपील की है.

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